जस्टिस वर्मा के खिलाफ महाभियोग की तैयारी! क्या ये प्रस्ताव अंजाम तक पहुंच पायेगा!
संवाददाता
29 May 2025
अपडेटेड: 9:47 AM 0thGMT+0530
जस्टिस वर्मा के खिलाफ महाभियोग की तैयारी! क्या ये प्रस्ताव अंजाम तक पहुंच पायेगा!
भारत में अब तक किसी जज के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव को अंजाम तक नहीं पहुंचाया जा सका है. सुप्रीम कोर्ट के किसी जज के खिलाफ महाभियोग चलाने की प्रक्रिया संविधान के अनुच्छेद 124(4) में निर्धारित की गई है. जबकि अनुच्छेद 218 में कहा गया है कि यही समान प्रावधान हाईकोर्ट के जज पर भी लागू होते हैं ।
केंद्र सरकार भले ही आगामी मानसून सत्र में जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव पर आगे बढ़ा दे, पर इसे अंजाम तक पहुंचाना बहुत ही मुश्किल काम होगा । अब तक पिछले 6 ऐसे प्रस्ताव को देखा जाए तो महाभियोग प्रस्ताव कभी भी अपने अंजाम तक नहीं पहुंच सके है । यह कहना गलत नहीं होगा कि जटिल प्रक्रिया के साथ इसे पूरा करने के लिए राजनीतिक इच्छाशक्ति भी चाहि ।
अंजाम तक नहीं पहुंचे ये 6 महाभियोग प्रस्ताव–
जस्टिस वर्मा के प्रकरण से पहले 6 ऐसे मामले हुए जब किसी जज के खिलाफ प्रस्ताव रखा गया. पहला, जस्टिस जेवी रामास्वामी पहले न्यायाधीश थे जिनके खिलाफ महाभियोग की कार्यवाही शुरू की गई थी. साल 1993 में, प्रस्ताव लोकसभा में लाया गया था, लेकिन आवश्यक दो-तिहाई बहुमत हासिल करने में विफल रहा.
जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ महाभियोग ही आखिरी रास्ता, कैसे आगे बढ़ेगी हटाने की प्रक्रिया-+
राज्यसभा में यदि 50 या उससे ज्यादा सदस्य महाभियोग प्रस्ताव लाने का समर्थन करें तभी उसे पेश किया जाता है। इसी तरह लोकसभा में कम से कम 100 सांसदों की मांग पर ही ऐसा प्रस्ताव आता है। दोनों ही सदनों में सरकार के पास बहुमत है।
दिल्ली में जस्टिस यशवंत वर्मा के घर पर आग लगने के बाद वहां से कैश की बरामदगी के मामले में सत्ता पक्ष और विपक्ष के दलों ने एक सुर में कार्रवाई की मांग की है। इस मामले में जांच के साथ-साथ महाभियोग की मांग दोहराई गई है।दिल्ली हाईकोर्ट के जज यशवंत वर्मा के घर से कथित तौर पर बड़ी मात्रा में नकदी मिलने के बाद देशभर में राजनीतिक और कानूनी हलचल तेज हो गई है। इस मुद्दे पर केंद्र सरकार की तरफ से महाभियोग की प्रक्रिया शुरू करने पर विचार किया जा रहा है। बीजेपी नेता और वरिष्ठ वकील नलिन कोहली ने इस मामले को “बेहद गंभीर” बताया और कहा कि इसकी गहराई से जांच होनी चाहिए।
घर में जलती हुई नकदी मिली- गंभीर आरोप
बीजेपी नेता नलिन कोहली ने कहा, ‘किसी जज के घर पर जलती हुई नकदी का मिलना बहुत ही गंभीर और संवेदनशील मामला है। समाज की भी यह उम्मीद है कि पूरी सच्चाई सामने आए।’ उन्होंने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश संजय खन्ना ने इस मामले की आंतरिक जांच के लिए एक समिति बनाई थी, जिसने अपनी रिपोर्ट प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति को सौंप दी है।
विपक्ष की मांग- कानून सबके लिए बराबर हो
वहीं पंजाब सरकार के मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने भी सख्त रुख अपनाया। उन्होंने कहा, ‘अगर जज यशवंत वर्मा भ्रष्टाचार में शामिल हैं, तो उनके खिलाफ आम नागरिकों की तरह ही कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। यह सिर्फ महाभियोग का मामला नहीं, बल्कि आपराधिक मामला भी है।’ चीमा ने प्रधानमंत्री से अपील की कि वे इस पर सख्त कदम उठाएं।
संसद में भी हलचल- CPI ने महाभियोग का समर्थन किया
सीपीआई के सांसद पी. संतोश कुमार ने सभी राजनीतिक दलों को पत्र लिखकर अपील की है कि वे इस मुद्दे पर सांसदों के जरिए महाभियोग की प्रक्रिया शुरू करें। वहीं सीपीआई महासचिव डी. राजा ने भी कहा कि उनकी पार्टी इस कार्रवाई का समर्थन करेगी ताकि न्यायपालिका की साख को फिर से स्थापित किया जा सके।