‘जीपीएस जैमिंग’ बना नया खतरा: युद्ध में नेविगेशन सिस्टम पर बड़ा हमला

khabar pradhan

संवाददाता

17 March 2026

अपडेटेड: 4:09 PM 0thGMT+0530

‘जीपीएस जैमिंग’ बना नया खतरा: युद्ध में नेविगेशन सिस्टम पर बड़ा हमला

17 मार्च 2026

नई दिल्ली

एक नए खतरे का अंदेशा ‘जीपीएस जैमिंग’–

ईरान और अमेरिका-इजराइल के बीच जारी तनाव ने समुद्र और आसमान में नेविगेशन सुरक्षा को लेकर नई चुनौती खड़ी कर दी है। युद्ध के दौरान सेनाएं अब जीपीएस जेमिंग और स्पूफिंग जैसे तरीकों का इस्तेमाल कर रही हैं, जिससे जहाजों और विमानों की लोकेशन सिस्टम प्रभावित हो रहा है।

क्या है GPS जैमिंग ?
जीपीएस जैमिंग एक प्रकार का इलेक्ट्रॉनिक हमला है, जिसमें जीपीएस सिग्नल को बाधित किया जाता है। आसान शब्दों में, यह ऐसी तकनीक है जिससे मोबाइल, कार या जहाज के नेविगेशन सिस्टम को उपग्रह से मिलने वाले सिग्नल सही तरीके से नहीं मिल पाते।

इस प्रक्रिया में उच्च फ्रीक्वेंसी के रेडियो सिग्नल भेजे जाते हैं, जिससे असली जीपीएस सिग्नल कमजोर पड़ जाता है और सिस्टम को सही लोकेशन नहीं मिलती। वहीं स्पूफिंग में फर्जी सिग्नल भेजकर सिस्टम को गलत लोकेशन का भ्रम पैदा किया जाता है, जो और अधिक खतरनाक माना जाता है।

युद्ध के दौरान यह तकनीक खास तौर पर प्रभावी होती है, क्योंकि उपग्रह से आने वाले सिग्नल पृथ्वी तक पहुंचते-पहुंचते कमजोर हो जाते हैं। ऐसे में जेमर द्वारा पैदा किया गया तेज सिग्नल असली सिग्नल को दबा देता है, जिससे रिसीवर भ्रमित हो जाता है और “नो सिग्नल” या “सिग्नल लॉस्ट” जैसी स्थिति बन जाती है।

विशेषज्ञों के अनुसार, इस तकनीक का सबसे ज्यादा असर उन क्षेत्रों में देखा जा रहा है, जहां समुद्री और हवाई मार्गों से भारी आवागमन होता है, जिससे सुरक्षा और संचालन दोनों पर खतरा बढ़ गया है।

जीपीएस जैमिंग और स्पूफिंग के कारण harmuz जलमार्ग से गुजरने वाला यातायात धीमा हो गया है l

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