ठाकरे बंधुओं का मिलन अधूरा! बीजेपी की नई चाल…
संवाददाता
26 May 2025
अपडेटेड: 7:02 AM 0thGMT+0530
ठाकरे बंधुओं का मिलन अधूरा! बीजेपी की नई चाल,
बावनकुले ने रची सियासी साजिश
महाराष्ट्र की सियासत में एक बार फिर हलचल मच गई है। शिवसेना (UBT) के प्रमुख उद्धव ठाकरे और मनसे (MNS) के नेता राज ठाकरे के बीच संभावित मिलन की चर्चा को बीजेपी ने एक नई चाल से ठंडा करने की कोशिश शुरू कर दी है। महाराष्ट्र बीजेपी के दिग्गज नेता चंद्रशेखर बावनकुले ने इस मुलाकात को रोकने के लिए सियासी दांव-पेच तेज कर दिए हैं। क्या है इस सियासी खेल की असल कहानी? क्यों नहीं होने दिया जा रहा ठाकरे बंधुओं का मिलन? आइए, इस पूरे मामले को गहराई से समझते हैं और जानते हैं कि महाराष्ट्र की राजनीति में यह नया मोड़ क्या रंग लाएगा।
ठाकरे बंधुओं का मिलन: एक सियासी सपना
उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे, जो कभी एक ही शिवसेना के दो मजबूत स्तंभ थे, 2006 में अलग हो गए। उद्धव ने शिवसेना की कमान संभाली, जबकि राज ने महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) बनाकर अपनी अलग राह चुनी। पिछले कुछ समय से दोनों भाइयों के बीच फिर से नजदीकी की खबरें सुर्खियों में थीं। खासकर 2024 के लोकसभा चुनावों के बाद, जब शिवसेना (UBT) और MNS के बीच कुछ मुद्दों पर समान विचारधारा दिखाई दी, तब यह कयास लगाए जाने लगे कि दोनों भाई एक बार फिर एक मंच पर आ सकते हैं।
इन चर्चाओं को और हवा तब मिली, जब उद्धव के करीबी सहयोगी अनिल परब ने एक बयान में कहा कि “ठाकरे बंधुओं की मुलाकात जल्द हो सकती है।” यह खबर महाराष्ट्र की सियासत में भूचाल लाने के लिए काफी थी। अगर उद्धव और राज एक साथ आते हैं, तो यह न केवल शिवसेना (UBT) और MNS के लिए, बल्कि पूरे महाराष्ट्र की राजनीति के लिए एक बड़ा बदलाव हो सकता है। लेकिन बीजेपी, जो महाराष्ट्र में सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन का हिस्सा है, इस मिलन को आसानी से होने देना नहीं चाहती।
बीजेपी की नई चाल: बावनकुले का मास्टरस्ट्रोक
महाराष्ट्र बीजेपी के अध्यक्ष चंद्रशेखर बावनकुले ने ठाकरे बंधुओं के इस संभावित मिलन को रोकने के लिए एक नई रणनीति अपनाई है। सूत्रों के मुताबिक, बावनकुले ने मनसे प्रमुख राज ठाकरे से संपर्क साधा और उन्हें बीजेपी के साथ गठबंधन की पेशकश की है। यह पेशकश न केवल राज को सियासी तौर पर मजबूत करने का वादा करती है, बल्कि उन्हें महायुति गठबंधन में शामिल करके उद्धव के खिलाफ एक बड़ा सियासी हथियार बनाने की कोशिश भी है।
बावनकुले का यह दांव कई मायनों में महत्वपूर्ण है। पहला, अगर राज ठाकरे बीजेपी के साथ चले जाते हैं, तो यह शिवसेना (UBT) के लिए एक बड़ा झटका होगा। उद्धव की पार्टी पहले ही 2022 में एकनाथ शिंदे के विद्रोह के बाद कमजोर हो चुकी है, और राज का बीजेपी के साथ जाना उनकी स्थिति को और कमजोर कर सकता है। दूसरा, बीजेपी इस चाल के जरिए महाराष्ट्र में अपनी सियासी जमीन को और मजबूत करना चाहती है, खासकर तब जब 2025 में होने वाले स्थानीय निकाय चुनाव नजदीक हैं।
क्यों डर रही है बीजेपी?
ठाकरे बंधुओं का मिलन बीजेपी और महायुति गठबंधन के लिए एक बड़ा खतरा बन सकता है। दोनों भाइयों की एकजुटता न केवल शिवसेना की पुरानी ताकत को वापस ला सकती है, बल्कि यह महाराष्ट्र में मराठी अस्मिता और हिंदुत्व के मुद्दों को फिर से हवा दे सकती है। उद्धव और राज, दोनों ही मराठी माणूस के मुद्दों पर मुखर रहे हैं, और अगर वे एक साथ आते हैं, तो यह बीजेपी के लिए एक सियासी चुनौती बन सकता है।
लोकसभा चुनाव 2024 में शिवसेना (UBT) ने विपक्षी गठबंधन MVA (महा विकास अघाड़ी) के साथ मिलकर अच्छा प्रदर्शन किया था। अगर राज ठाकरे भी इस गठबंधन में शामिल होते हैं, तो MVA की ताकत और बढ़ सकती है। बीजेपी को डर है कि ठाकरे बंधुओं का यह मिलन उनकी सियासी रणनीति को ध्वस्त कर सकता है। यही वजह है कि बावनकुले ने राज को अपने पाले में लाने की कोशिश शुरू कर दी है।
राज ठाकरे का रुख: बीजेपी या उद्धव?
राज ठाकरे का अब तक का सियासी सफर उतार-चढ़ाव से भरा रहा है। मनसे ने 2009 के विधानसभा चुनावों में 13 सीटें जीतकर एक मजबूत शुरुआत की थी, लेकिन इसके बाद उनकी पार्टी का प्रभाव धीरे-धीरे कम होता गया। 2024 के लोकसभा चुनावों में राज ने बीजेपी के साथ अनौपचारिक गठबंधन किया और कई सीटों पर NDA के लिए प्रचार किया। हालांकि, इस गठबंधन का मनसे को कोई खास फायदा नहीं हुआ।
अब सवाल यह है कि राज ठाकरे बावनकुले की इस पेशकश को स्वीकार करेंगे या अपने भाई उद्धव के साथ फिर से एकजुट होंगे? कुछ विश्लेषकों का मानना है कि राज ठाकरे बीजेपी के साथ गठबंधन को प्राथमिकता दे सकते हैं, क्योंकि यह उनकी पार्टी को फिर से सियासी तौर पर प्रासंगिक बना सकता है। वहीं, कुछ का कहना है कि ठाकरे परिवार की भावनात्मक एकता राज को उद्धव के करीब ले जा सकती है।
उद्धव ठाकरे की रणनीति: MVA का दांव
उद्धव ठाकरे और उनकी पार्टी शिवसेना (UBT) इस समय MVA गठबंधन के साथ मजबूती से खड़े हैं। कांग्रेस और शरद पवार की NCP (SP) के साथ मिलकर उद्धव ने 2024 के लोकसभा चुनावों में बीजेपी को कड़ी टक्कर दी थी। अगर राज ठाकरे MVA में शामिल होते हैं, तो यह गठबंधन और मजबूत हो सकता है। उद्धव के करीबी अनिल परब ने पहले ही संकेत दे दिए हैं कि ठाकरे बंधुओं की मुलाकात का “मुहूर्त” जल्द निकल सकता है।
हालांकि, बीजेपी की ताजा चाल ने उद्धव के सामने एक नई चुनौती खड़ी कर दी है। अगर राज बीजेपी के साथ चले जाते हैं, तो यह MVA के लिए एक बड़ा नुकसान होगा। उद्धव को अब न केवल अपनी पार्टी को एकजुट रखना होगा, बल्कि राज को अपने पाले में लाने के लिए भी सियासी जोड़-तोड़ करनी होगी।
महाराष्ट्र की सियासत: एक नया मोड़
महाराष्ट्र की राजनीति हमेशा से जटिल और अप्रत्याशित रही है। ठाकरे बंधुओं का मिलन, अगर होता है, तो यह न केवल शिवसेना की पुरानी ताकत को वापस ला सकता है, बल्कि यह MVA को भी एक नई ऊर्जा दे सकता है। दूसरी ओर, अगर बीजेपी राज ठाकरे को अपने साथ ले जाती है, तो यह महायुति गठबंधन को और मजबूत करेगा।
इस पूरे सियासी ड्रामे में चंद्रशेखर बावनकुले की भूमिका अहम हो गई है। उनकी यह चाल बीजेपी के लिए कितनी कारगर साबित होगी, यह तो समय ही बताएगा। लेकिन इतना तय है कि महाराष्ट्र की सियासत में यह नया दांव एक बड़ा बदलाव लाने की क्षमता रखता है।
क्या कहते हैं विश्लेषक?
सियासी विश्लेषकों का मानना है कि ठाकरे बंधुओं का मिलन महाराष्ट्र की राजनीति में एक गेम-चेंजर हो सकता है। एक वरिष्ठ विश्लेषक ने कहा, “उद्धव और राज अगर एक साथ आते हैं, तो यह मराठी वोटों को एकजुट करने का एक बड़ा मौका होगा। लेकिन बीजेपी इस मिलन को रोकने के लिए हर संभव कोशिश करेगी।”
दूसरी ओर, कुछ विश्लेषकों का कहना है कि राज ठाकरे की सियासी महत्वाकांक्षा उन्हें बीजेपी के करीब ले जा सकती है। उनके लिए बीजेपी के साथ गठबंधन एक सुरक्षित और फायदेमंद रास्ता हो सकता है।
क्या होगा अगला कदम?
इस सियासी जंग में अगला कदम किसका होगा, यह देखना दिलचस्प होगा। उद्धव ठाकरे को अब राज को मनाने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंकनी होगी। वहीं, राज ठाकरे के सामने दो रास्ते हैं – या तो वह अपने भाई के साथ फिर से शिवसेना की विरासत को संभालें, या फिर बीजेपी के साथ जाकर अपनी सियासी जमीन को मजबूत करें।
बीजेपी की तरफ से बावनकुले इस खेल में कोई कसर नहीं छोड़ रहे। अगर उनकी चाल कामयाब होती है, तो यह महायुति के लिए एक बड़ी जीत होगी। लेकिन अगर ठाकरे बंधु एकजुट हो जाते हैं, तो यह बीजेपी के लिए एक बड़ा झटका होगा।
सियासत का रोमांचक रण
महाराष्ट्र की सियासत में ठाकरे बंधुओं का मिलन और बीजेपी की रोकटोक का यह खेल एक रोमांचक मोड़ ले चुका है। चंद्रशेखर बावनकुले की नई चाल ने इस सियासी ड्रामे को और दिलचस्प बना दिया है। क्या उद्धव और राज फिर से एक हो पाएंगे, या बीजेपी अपनी चाल में कामयाब होगी? यह सवाल महाराष्ट्र की जनता के साथ-साथ पूरे देश की नजरों में है।
इस सियासी रण में एक बात तो तय है – महाराष्ट्र की राजनीति में अभी बहुत कुछ बदलने वाला है। ठाकरे बंधुओं का भविष्य और बीजेपी की रणनीति इस कहानी के अगले अध्याय को लिखेगी।