डीएमके और कांग्रेस के बीच सियासी तनातनी आई सामने:
संवाददाता
12 January 2026
अपडेटेड: 10:00 PM 0thGMT+0530
तमिलनाडु में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले डीएमके और उसकी सहयोगी कांग्रेस के बीच सियासी तनातनी:
दक्षिण भारत की राजनीति से इस वक्त एक बड़ी और अहम खबर सामने आ रही है दरअसल, तमिलनाडु में इस साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले ही सत्तारूढ़ डीएमके और उसकी सहयोगी कांग्रेस के बीच सियासी तनातनी खुलकर सामने आने लगी है… गठबंधन के भीतर बढ़ता तनाव अब दिल्ली से चेन्नई तक चर्चा का विषय बन चुका है।
सियासी तनातनी के बीच राहुल गांधी का तमिलनाडु दौरा:
इसी सियासी खींचतान के बीच कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी विदेश दौरे से लौटते ही तमिलनाडु का रुख करने जा रहे हैं…जानकारी के मुताबिक, 13 जनवरी को राहुल गांधी नीलगिरी जिले में एक स्कूल के 50वीं वर्षगांठ समारोह में शामिल होंगे… ये वही स्कूल है, जहां भारत जोड़ो यात्रा के दौरान राहुल गांधी और उनकी टीम ने विश्राम किया था… ऐसे में राहुल का ये दौरा सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि इसके सियासी मायने भी निकाले जा रहे हैं…
दरअसल, हाल के दिनों में सुपरस्टार विजय की राजनीति में एंट्री के बाद तमिलनाडु की राजनीति का समीकरण बदलता नजर आ रहा है।
कांग्रेस ने की 40 सीटों की मांग:
कांग्रेस के भीतर एक धड़ा, जिसमें राहुल गांधी के करीबी माने जाने वाले प्रवीण चक्रवर्ती जैसे नेता शामिल हैं, उन्होंने डीएमके की बजाय विजय के साथ संभावित तालमेल की वकालत कर दी थी…यहीं से कांग्रेस और डीएमके के रिश्तों में दरार और गहरी होती चली गई…इसके बाद मामला और गरमा गया जब कांग्रेस संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल के करीबी सांसद माणिक टैगोर ने खुलकर सीट बंटवारे का मुद्दा उठा दिया। माणिक टैगोर ने जहां पहले 25 सीटों की मांग थी, उसे बढ़ाकर 35 सीटें और सत्ता में हिस्सेदारी की बात कह दी। इस बयान के बाद वह सीधे-सीधे डीएमके नेताओं के निशाने पर आ गए। डीएमके की ओर से भी अब सख्त रुख सामने आ रहा है। तमिलनाडु सरकार में ग्रामीण विकास मंत्री पेरिसामी ने साफ शब्दों में कहा है कि डीएमके ने अब तक अकेले शासन किया है और आगे भी गठबंधन सरकार का कोई सवाल नहीं है।
मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन इस मुद्दे पर पूरी तरह अडिग बताए जा रहे हैं। ऐसे हालातों में राहुल गांधी का तमिलनाडु दौरा बेहद अहम माना जा रहा है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि नीलगिरी में दिया जाने वाला राहुल का भाषण दो पुराने सहयोगी दलों के रिश्तों की दिशा तय कर सकता है। क्या राहुल सख्त तेवर दिखाएंगे या फिर गठबंधन बचाने की कोशिश करेंगे—इस पर सबकी नजर टिकी है। इस बीच कांग्रेस आलाकमान ने स्थिति संभालने के लिए पांच सदस्यीय कमेटी का गठन किया है, जो डीएमके के साथ बातचीत करेगी। इतना ही नहीं, 18 जनवरी को दिल्ली में तमिलनाडु कांग्रेस के नेताओं के साथ राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की एक अहम बैठक भी प्रस्तावित है। खबरों के सूत्रों के मुताबिक, विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस 40 सीटों की मांग कर रही है, लेकिन डीएमके इसके लिए तैयार नहीं है। स्टालिन के नेतृत्व में डीएमके अपनी शर्तों पर कायम है, जबकि कांग्रेस अपनी राजनीतिक भूमिका बढ़ाने के लिए दबाव बना रही है..
.अब बड़ा सवाल यही है कि क्या कांग्रेस और डीएमके के बीच यह खींचतान किसी समझौते पर खत्म होगी, या फिर तमिलनाडु की राजनीति में कोई नया सियासी समीकरण आकार लेगा…