तेलंगाना ने लू को आपदा घोषित किय, मृतकों के परिवार को 4 लाख की सहायता
संवाददाता
17 April 2025
अपडेटेड: 8:55 AM 0thGMT+0530

राजस्थान में भीषण गर्मी, जैसलमेर में पारा 46°C
तेलंगाना सरकार ने गर्मी के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए एक अभूतपूर्व कदम उठाया है। सरकार ने लू (हीटवेव) को ‘राज्य-विशिष्ट आपदा’ घोषित कर दिया है, जिसके तहत लू के कारण होने वाली मृत्यु के मामलों में मृतक के परिवार को 4 लाख रुपये की अनुग्रह राशि प्रदान की जाएगी। यह निर्णय अप्रैल 2025 में बढ़ते तापमान और लू के खतरनाक प्रभावों को देखते हुए लिया गया है। तेलंगाना के आपदा प्रबंधन विभाग ने इसे एक ‘छिपा हुआ खतरा’ करार देते हुए कहा कि लू का असर विशेष रूप से कमजोर वर्गों, जैसे महिलाओं, बच्चों, बुजुर्गों और मजदूरों पर अधिक पड़ता है। मौसम विभाग ने राज्य के 28 जिलों में अगले 15 दिनों तक लू की स्थिति बने रहने की चेतावनी जारी की है।
इसके साथ ही, तेलंगाना सरकार ने लू से बचाव के लिए कई उपाय भी शुरू किए हैं। इनमें सार्वजनिक स्थानों पर पीने के पानी की व्यवस्था, छायादार क्षेत्रों की स्थापना और लोगों को दोपहर के समय घरों में रहने की सलाह शामिल है। सरकार का यह कदम न केवल प्रभावित परिवारों को आर्थिक सहायता प्रदान करेगा, बल्कि लू के प्रति जागरूकता बढ़ाने और इसके दुष्प्रभावों को कम करने में भी मददगार साबित होगा।

राजस्थान में गर्मी का कहर, जैसलमेर में तापमान 46 डिग्री
उधर, राजस्थान में गर्मी ने विकराल रूप ले लिया है। जैसलमेर में तापमान 46 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है, जो इस मौसम में सामान्य से कहीं अधिक है। मौसम विभाग ने जयपुर, जोधपुर, बीकानेर, कोटा सहित राज्य के 17 जिलों में हीटवेव की चेतावनी जारी की है। इन क्षेत्रों में दिन के समय तापमान 42 से 46 डिग्री के बीच रहने की संभावना है। गर्म हवाओं और तेज धूप के कारण लोगों का बाहर निकलना मुश्किल हो गया है।
राजस्थान के अलावा, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और गुजरात जैसे राज्यों में भी गर्मी का असर बढ़ रहा है। मध्य प्रदेश में हाल ही में हुई बारिश के बाद अब तापमान में तेजी देखी जा रही है। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण मौसमी पैटर्न में बदलाव आ रहा है, जिससे गर्मी की तीव्रता और अवधि दोनों बढ़ रही हैं।
लू के बढ़ते खतरे और जलवायु परिवर्तन
लू का बढ़ता प्रभाव जलवायु परिवर्तन और पर्यावरणीय असंतुलन का एक स्पष्ट संकेत है। विशेषज्ञों का मानना है कि अनियंत्रित शहरीकरण, जंगलों की कटाई और ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन इस समस्या को और गंभीर बना रहा है। तेलंगाना सरकार का लू को आपदा घोषित करने का फैसला इस दिशा में एक सकारात्मक कदम है, जो अन्य राज्यों के लिए भी एक मिसाल बन सकता है।
लू से बचाव के लिए लोगों को सलाह दी जा रही है कि वे दोपहर 12 से 3 बजे के बीच बाहर निकलने से बचें, हल्के रंग के कपड़े पहनें, पर्याप्त पानी पिएं और बच्चों व बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखें। सरकार और प्रशासन भी इस संकट से निपटने के लिए आपातकालीन उपाय लागू कर रहे हैं, ताकि जनहानि को न्यूनतम रखा जा सके।
निष्कर्ष
तेलंगाना का लू को आपदा घोषित करने और प्रभावित परिवारों को आर्थिक सहायता देने का निर्णय एक मानवीय और दूरदर्शी कदम है। वहीं, राजस्थान और अन्य राज्यों में बढ़ती गर्मी ने लोगों के लिए चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। यह स्थिति न केवल तात्कालिक उपायों की मांग करती है, बल्कि दीर्घकालिक स्तर पर पर्यावरण संरक्षण और जलवायु परिवर्तन से निपटने की रणनीतियों की आवश्यकता को भी रेखांकित करती है।