त्योहार और इमरजेंसी के समय विमान किराया बढ़ाना शोषण के दायरे में-सुप्रीम कोर्ट:
संवाददाता
17 February 2026
अपडेटेड: 1:28 PM 0thGMT+0530
अगली सुनवाई 23 फरवरी को:
त्योहार और अन्य इमरजेंसी के समय में विमान के किराए में मनमानी तरह से बढ़ोतरी करने पर विमान कंपनियां अब सुप्रीम कोर्ट के रडार पर आ गई हैं । सुप्रीम कोर्ट ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए इस मनमाने अंदाज पर चिंता जताते हुए संज्ञान लिया है । सुप्रीम कोर्ट ने किराए की बढ़ोतरी को शोषण करार दिया है। साथ ही केंद्र सरकार और डीजीसीए को नोटिस जारी किया है। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने इस आईपीएल पर सुनवाई की और याचिका में मुफ्त चेक इन बैगेज सीमा को 25 किलो से घटाकर 15 किलो किए जाने और किराए की डायनेमिक प्रोसेसिंग को लेकर चुनौती दी है।
इसके साथ ही विमान के किराए के निर्धारण और अतिरिक्त शुल्कों पर नियामक नियंत्रित किए जाने की मांग की है । सुनवाई के दौरान जस्टिस नाथ ने कोर्ट में मौजूद अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल अनिल कौशिक से कहा कि कुंभ मेले और पहलगाम घटना के बाद जोधपुर और प्रयागराज से बढ़ते हुए किराए को देखा। वह तीन गुना तक बढ़ गया था। यह समस्या सिर्फ कुंभ तक ही सीमित नहीं है ,बल्कि हर त्यौहार के दौरान यही स्थिति देखने को मिलती है।
याचिका में कहा गया है कि हवाई परिवहन एक आवश्यक सेवा है और आवश्यक सेवा अनुरक्षण अधिनियम 1981 के तहत राज्य का दायित्व है। ऐसी सेवाएं किफायती और गैर शोषणकारी होना चाहिए । यह सेवाएं संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत गरिमा पूर्ण जीवन के मौलिक अधिकार के दायरे में आती हैं । कोई भी साधारण व्यक्ति योजनाबद्ध यात्रा नहीं करता । इस मामले में अगली सुनवाई 23 फरवरी को होगी।