दिल्ली में बहलोल लोदी का मकबरा बदहाली का शिकार

khabar pradhan

संवाददाता

29 March 2025

अपडेटेड: 1:14 PM 0thGMT+0530

दिल्ली में बहलोल लोदी का मकबरा बदहाली का शिकार

जानिए क्या है पूरा मामला

बहलोल लोदी के इस मकबरे के संरक्षण पर एएसआई ने लंबे वक्त से कोई काम नहीं किया गया है। मकबरे की पॉलिश हट चुकी है, दीवारें खंडहर में तब्दील हो चुकी हैं, और मेहराबों पर लिखी कुरान की आयतें टूट-फूट गई हैं।
दिल्ली पर 1451 में कब्जा कर लोदी वंश की नींव रखने वाले सरहिंद के अफगान सूबेदार बहलोल लोदी के मकबरे पर आज अवैध कब्जों का बोलबाला है। यह ऐतिहासिक चकोर मकबरा अब स्ट्रीट डॉग्स के आरामगाह और नशेड़ियों का अड्डा बन चुका है। वही मकबरे की बाउंड्री तोड़कर दो तरफ घर बनाए जा चुके हैं, जिनमें से एक का दरवाजा मकबरे की ओर खुलता है और वहीं से अंदर-बाहर आने-जाने का रास्ता बना लिया गया है। मकबरे की बदहाल का मेन गेट अब अस्तित्व में नहीं है, और उसके कोई अवशेष भी नजर नहीं आते है। अंदर जाने के लिए बाउंड्री को करीब तीन फुट तोड़कर रास्ता बनाया गया है, जिसके सामने संकरी गली गुजरती है।

चिराग दिल्ली के बुजुर्गों के मुताबिक, यह स्थिति कोई हालिया नहीं बल्कि करीब 40 वर्ष से बनी हुई है। मकबरे के तीनों तरफ महज 3 से 8 फुट चौड़ी गलियां बची हैं, जिनमें 30 से 80 वर्ग मीटर के फ्लैट बने हुए हैं। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण एएसआई इस स्थिति के लिए कानून और व्यवस्था की कमजोरी को जिम्मेदार मानता है।

एएसआई की राष्ट्रीय प्रवक्ता नंदिनी भट्टाचार्य साहू के मुताबिक, कब्जे के खिलाफ कई बार संबंधित एजेंसियों को शिकायतें की गई हैं। नोटिस जारी हुए, यहां तक कि एफआईआर भी दर्ज कराई गई, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। मकबरे की सफाई के लिए एक कर्मचारी तैनात है, लेकिन वहां रहने वाले लोगों के कारण वह सही से काम नहीं कर पा रहा।

बहलोल लोदी के इस मकबरे के संरक्षण पर एएसआई ने लंबे वक्त से कोई काम नहीं किया गया है। मकबरे की पॉलिश हट चुकी है, दीवारें खंडहर में तब्दील हो चुकी हैं, और मेहराबों पर लिखी कुरान की आयतें टूट-फूट गई हैं। वास्तुशास्त्र की दृष्टि से अन्य मकबरों की तुलना में यह इमारत बेहद साधारण प्रतीत होती है।
अगर आप चिराग दिल्ली में बहलोल लोदी का मकबरा देखने जाते हैं, तो इसे ढूंढना किसी चुनौती से कम नहीं। गूगल मैप से भी यहां तक पहुंचना आसान नहीं होगा। करीब एक वर्ग किलोमीटर में अव्यवस्थित तरीके से बनी इमारतों और संकरी गलियों के कारण सही रास्ता खोजना मुश्किल हो जाता है। स्थानीय लोग भी इसके बारे में नहीं जानते हैं, और पूछने पर इसे मस्जिद या अन्य इमारत बताने लगते हैं।

मकबरे तक पहुंचने के लिए स्थानीय लोगों से ‘बारादरी’ का रास्ता पूछें। इस मकबरे के चारों तरफ तीन मेहराबी दरवाजे हैं। इसके पास जैन मोहल्ला और उलिया मोहल्ला स्थित हैं। यहां एक उजाड़ इमारत ही बहलोल लोदी का मकबरा है। ASI का एक बोर्ड यहां लगा है, जो इसे संरक्षित स्मारक घोषित करता है, लेकिन इस इमारत के इतिहास की कोई जानकारी नहीं देता। दिल्ली के इस ऐतिहासिक स्मारक की वर्तमान स्थिति प्रशासनिक उदासीनता और अवैध कब्जों का प्रत्यक्ष प्रमाण है।

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