नई शिक्षा नीति की दिशा में बड़ा कदम, डिप्लोमा धारकों को मिली 12वीं के बराबर मान्यता
संवाददाता
20 February 2026
अपडेटेड: 12:54 PM 0thGMT+0530
10वीं के बाद किए जाने वाले डिप्लोमा को अब 12वीं कक्षा के समकक्ष माना जाएगा। इस फैसले से छात्रों को इंजीनियरिंग और अन्य प्रोफेशनल कोर्सों में प्रवेश लेना पहले से आसान हो जाएगा। यह महत्वपूर्ण निर्णय राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (आरजीपीवी) की गुरुवार को आयोजित एकेडमिक काउंसिल की बैठक में लिया गया।
तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा देने की पहल, छात्रों को मिलेगा बड़ा लाभ
इस निर्णय के बाद डिप्लोमा धारक विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए अलग से 12वीं करने की आवश्यकता नहीं होगी। इससे उन्हें समय और संसाधनों की बचत होगी तथा तकनीकी क्षेत्रों में जल्दी अवसर मिल सकेंगे। साथ ही, सरकारी और निजी संस्थानों में प्रवेश की प्रक्रिया भी उनके लिए सरल होगी।
उच्च शिक्षा संस्थानों को मजबूती, दो कॉलेजों को मिला ऑटोनॉमस दर्जा
बैठक में जबलपुर के प्रतिष्ठित संस्थान टीआईटी और ज्ञानगंगा कॉलेज को ऑटोनॉमस (स्वायत्त) का दर्जा प्रदान किया गया। इससे ये संस्थान उद्योग आधारित पाठ्यक्रम लागू कर सकेंगे और अपने स्तर पर अकादमिक सुधार कर पाएंगे। इस कदम से छात्रों को बेहतर और आधुनिक शिक्षा मिलने की उम्मीद है।
शोध को प्रोत्साहन, 23 पीएचडी और 20 फेलोशिप पर लगी मुहर
बैठक में शोध के क्षेत्र में भी अहम निर्णय लिए गए। कुल 23 पीएचडी डिग्री को अंतिम स्वीकृति दी गई, जबकि 20 शोधार्थियों को यूजीसी पीएचडी फेलोशिप देने पर सहमति बनी। इससे विश्वविद्यालय में शोध संस्कृति को बढ़ावा मिलेगा और नई खोजों के अवसर बढ़ेंगे।
गुणवत्ता सुधार की दिशा में कदम, मान्यता की निरंतरता पर जोर
इंजीनियरिंग और एमबीए सहित संबद्ध कॉलेजों की मान्यता और संबद्धता की समीक्षा की गई। निरंतरता बनाए रखते हुए कई संस्थानों की मान्यता बहाल रखने का निर्णय लिया गया। विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार, ये फैसले तकनीकी शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने और छात्रों को बेहतर शैक्षणिक व रोजगार अवसर देने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होंगे।
प्रतियोगी परीक्षाओं और करियर में मदद, छात्रों का भविष्य होगा मजबूत
इस व्यवस्था से प्रतियोगी परीक्षाओं, सरकारी नौकरियों और निजी क्षेत्र में भी डिप्लोमा धारकों को अधिक अवसर मिलेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय तकनीकी शिक्षा को नई दिशा देगा और युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने में सहायक होगा।