पहलगाम आतंकी हमला: कश्मीर की वादी में बार-बार गूंजा खून का खेल, जानें आतंकी हमलों की पूरी टाइमलाइन

khabar pradhan

संवाददाता

23 April 2025

अपडेटेड: 1:20 PM 0rdGMT+0530

जम्मू-कश्मीर का पहलगाम, जो अपनी मनोरम वादियों और शांति के लिए जाना जाता है, एक बार फिर आतंकवाद की काली साये में डूब गया। 22 अप्रैल, 2025 को बैसरण मीडो में हुए आतंकी हमले ने पूरे देश को झकझोर दिया, जिसमें 28 लोग मारे गए, जिनमें ज्यादातर पर्यटक थे। यह हमला न केवल कश्मीर के पर्यटन उद्योग के लिए खतरा है, बल्कि आगामी अमरनाथ यात्रा से पहले सुरक्षा चिंताओं को और गहरा करता है। लेकिन यह कोई पहला मौका नहीं है जब आतंकियों ने कश्मीर की इस खूबसूरत धरती को खून से लाल किया हो। आइए, कश्मीर में हुए बड़े आतंकी हमलों की टाइमलाइन पर नजर डालते हैं, जो घाटी के दर्द और आंसुओं की कहानी बयां करती है।
कश्मीर में आतंकी हमलों का काला इतिहास
21 मार्च, 2000 – चट्टियासिंहपुरा नरसंहार
अनंतनाग के चट्टियासिंहपुरा गांव में आतंकवादियों ने सिख समुदाय को निशाना बनाया। रात के अंधेरे में 36 लोगों को गोलियों से भून दिया गया, जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल थे। इस हमले का मकसद सांप्रदायिक तनाव को भड़काना था।
1 अगस्त, 2000 – अमरनाथ यात्रा पर हमला
पहलगाम के नुनवान बेस कैंप में आतंकियों ने अमरनाथ तीर्थयात्रियों पर हमला किया। इस हमले में 32 लोग मारे गए, जिनमें ज्यादातर श्रद्धालु थे। यह घटना घाटी में धार्मिक पर्यटन को डराने की साजिश थी।
2 अगस्त, 2002 – अमरनाथ यात्रा पर दूसरा हमला
आतंकियों ने एक बार फिर अमरनाथ यात्रियों को निशाना बनाया। इस हमले में 9 तीर्थयात्री मारे गए और कई घायल हुए। यह हमला कश्मीर में शांति की कोशिशों पर एक और चोट था।
23 मार्च, 2003 – नंदीमार्ग नरसंहार
पुलवामा के नंदीमार्ग गांव में कश्मीरी पंडितों पर आतंकी हमला हुआ। 24 लोग, जिनमें महिलाएं और बच्चे शामिल थे, इस हमले में मारे गए। यह कश्मीरी पंडितों के खिलाफ लक्षित हिंसा का एक और क्रूर उदाहरण था।
13 जून, 2005 – पुलवामा बाजार विस्फोट
पुलवामा के भीड़भाड़ वाले बाजार में आतंकियों ने विस्फोटक से भरी कार को उड़ा दिया। इस हमले में 13 लोग मारे गए, जिनमें दो स्कूली बच्चे और तीन CRPF जवान शामिल थे। 100 से ज्यादा लोग घायल हुए।
12 जून, 2006 – कुलगाम में मजदूरों की हत्या
कुलगाम में आतंकवादियों ने नेपाल और बिहार के 9 मजदूरों को निशाना बनाया और उनकी हत्या कर दी। यह हमला गैर-स्थानीय कामगारों को डराने और घाटी से भगाने की कोशिश थी।
10 जुलाई, 2017 – अमरनाथ यात्रियों पर हमला
कुलगाम में अमरनाथ यात्रा की बस पर आतंकी हमला हुआ, जिसमें 8 तीर्थयात्री मारे गए। इस हमले ने एक बार फिर धार्मिक यात्रा को बाधित करने की आतंकी मंशा को उजागर किया।
14 फरवरी, 2019 – पुलवामा CRPF हमला
पुलवामा में CRPF के काफिले पर आत्मघाती हमला हुआ, जिसमें 40 जवान शहीद हुए। यह कश्मीर में सुरक्षा बलों पर सबसे बड़े हमलों में से एक था, जिसने भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव को चरम पर पहुंचा दिया।
22 अप्रैल, 2025 – पहलगाम बैसरण मीडो हमला
लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े आतंकी संगठन द रेसिस्टेंस फ्रंट (TRF) ने इस हमले की जिम्मेदारी ली। आतंकियों ने सेना की वर्दी में पर्यटकों पर अंधाधुंध गोलीबारी की, जिसमें 28 लोग मारे गए। मृतकों में दो विदेशी नागरिक (यूएई और नेपाल) और भारतीय नौसेना के अधिकारी लेफ्टिनेंट विनय नरवाल शामिल थे।
पर्यटन और अमरनाथ यात्रा पर बढ़ता खतरा
पहलगाम हमला उस वक्त हुआ, जब कश्मीर का पर्यटन उद्योग अपने चरम पर था। 2024 में करीब 35 लाख पर्यटकों ने कश्मीर का दौरा किया, जिसमें 43,000 विदेशी पर्यटक शामिल थे। यह हमला पर्यटन को नुकसान पहुंचाने की साजिश का हिस्सा माना जा रहा है। खास तौर पर, 3 जुलाई, 2025 से शुरू होने वाली अमरनाथ यात्रा पर इसका गहरा असर पड़ सकता है। पहलगाम इस यात्रा का एक अहम पड़ाव है, और इस हमले ने यात्रा की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
सुरक्षा बलों का कड़ा रुख
हमले के तुरंत बाद भारतीय सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस, और CRPF ने बैसरण वैली और आसपास के इलाकों में सघन तलाशी अभियान शुरू किया। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने मामले की जांच शुरू कर दी है और तीन संदिग्ध आतंकियों—आसिफ फौजी, सुलेमान शाह, और अबू तल्हा—के स्केच जारी किए हैं। बारामूला में नियंत्रण रेखा पर एक घुसपैठ की कोशिश को भी सेना ने नाकाम किया, जिससे आतंकियों के मंसूबों पर पानी फिर गया।
देश और दुनिया में गुस्सा
पहलगाम हमले ने देश-विदेश में गुस्से की लहर पैदा की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सऊदी अरब का दौरा बीच में छोड़कर दिल्ली लौटकर सुरक्षा स्थिति की समीक्षा की। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, और यूरोपीय संघ की प्रमुख उर्सुला वॉन डेर लेयन ने हमले की कड़ी निंदा की और भारत के साथ एकजुटता जताई। सुप्रीम कोर्ट ने भी इस हमले को ‘अमानवीय’ बताते हुए दो मिनट का मौन रखा।
कश्मीर की शांति पर सवाल
पहलगाम हमला कश्मीर में शांति और विकास की राह में एक बड़ी चुनौती है। यह हमला न केवल पर्यटकों को डराने की कोशिश है, बल्कि घाटी में सामान्य स्थिति बहाल करने की भारत सरकार की कोशिशों को भी नुकसान पहुंचाता है। कश्मीर के स्थानीय अखबारों ने अपने पहले पन्ने काले कर इस हमले का विरोध जताया, जिसमें लिखा था, “कश्मीर तबाह, कश्मीरी गम में।

टिप्पणियां (0)