पाकिस्तानी हाई कमीशन में स्टाफ कटौती से पड़ेगा ये असर, इस तरह होता है काम
संवाददाता
26 April 2025
अपडेटेड: 6:57 AM 0thGMT+0530
पाकिस्तानी हाई कमीशन में स्टाफ कटौती से पड़ेगा ये असर, इस तरह होता है काम
उच्चायोग का कामकाज और भारत-पाक संबंधों पर असर
भारत और पाकिस्तान के बीच तनावपूर्ण रिश्तों के बीच एक और बड़ा कूटनीतिक कदम उठाया गया है। भारत ने नई दिल्ली स्थित पाकिस्तानी उच्चायोग के कर्मचारियों की संख्या को 55 से घटाकर 30 करने का फैसला किया है, और इसके जवाब में पाकिस्तान ने भी इस्लामाबाद में भारतीय उच्चायोग में कर्मचारियों की संख्या को समान अनुपात में कम करने का निर्णय लिया है। यह कदम 26 अप्रैल 2025 को लागू हुआ, जिसके बाद दोनों देशों के उच्चायोगों में अब केवल 30-30 कर्मचारी रहेंगे। यह कटौती, विशेष रूप से पहलगाम आतंकी हमले के बाद, भारत की सख्त जवाबी कार्रवाई का हिस्सा है। आइए, इस कटौती के प्रभाव और उच्चायोग के कामकाज को विस्तार से समझते हैं।
उच्चायोग का कामकाज: उच्चायोग एक देश का राजनयिक मिशन होता है, जो किसी अन्य देश में उनके हितों का प्रतिनिधित्व करता है। भारत और पाकिस्तान, जो राष्ट्रमंडल देश हैं, अपने दूतावासों को उच्चायोग कहते हैं। नई दिल्ली में पाकिस्तानी उच्चायोग और इस्लामाबाद में भारतीय उच्चायोग का मुख्य कार्य वीजा जारी करना, व्यापारिक और सांस्कृतिक संबंधों को बढ़ावा देना, नागरिकों की सहायता करना, और सरकारों के बीच संचार बनाए रखना है। इसके अलावा, उच्चायोग खुफिया जानकारी एकत्र करने और कूटनीतिक नीतियों को लागू करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कर्मचारियों में राजनयिक, प्रशासनिक स्टाफ, सुरक्षा कर्मी, और सैन्य सलाहकार शामिल होते हैं।
कटौती का तात्कालिक प्रभाव: कर्मचारियों की संख्या आधी होने से उच्चायोगों का दैनिक कामकाज गंभीर रूप से प्रभावित होगा। वीजा प्रक्रिया, जो पहले से ही जटिल और समय लेने वाली थी, में और देरी हो सकती है। दोनों देशों के नागरिकों, खासकर उन लोगों को परेशानी होगी जो व्यापार, चिकित्सा, या पारिवारिक कारणों से यात्रा करते हैं। उदाहरण के लिए, भारत में पाकिस्तानी नागरिकों और पाकिस्तान में भारतीयों को कांसुलर सेवाएं, जैसे पासपोर्ट नवीनीकरण या आपातकालीन सहायता, प्राप्त करने में मुश्किल होगी। इसके अलावा, सांस्कृतिक और व्यापारिक आदान-प्रदान, जो पहले ही सीमित थे, और कम हो सकते हैं।
कूटनीतिक संबंधों पर असर: यह कटौती भारत-पाकिस्तान के पहले से ही खराब रिश्तों को और सीमित कर देगी। उच्चायोगों में कर्मचारियों की कमी से दोनों देशों के बीच संवाद के औपचारिक चैनल कमजोर होंगे। भारत ने पाकिस्तानी सैन्य सलाहकारों को अवांछित घोषित कर वापस भेजने का फैसला किया है, जिसे पाकिस्तान ने भी दोहराया। यह कदम दोनों देशों के बीच सैन्य और खुफिया स्तर पर तनाव को और बढ़ाएगा। पहलगाम हमले के बाद भारत ने पाकिस्तानी नागरिकों को 48 घंटे में देश छोड़ने का आदेश दिया और सिंधु जल संधि को निलंबित कर दिया, जिससे कूटनीतिक रिश्ते ऐतिहासिक निचले स्तर पर पहुंच गए हैं।
सुरक्षा और जासूसी का आयाम: भारत ने यह कदम पाकिस्तानी उच्चायोग के अधिकारियों पर जासूसी और आतंकी संगठनों से संबंध रखने के आरोपों के बाद उठाया है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि पाकिस्तानी अधिकारी वियना संधि और द्विपक्षीय समझौतों का उल्लंघन कर रहे थे। ऐसी घटनाएं पहले भी हो चुकी हैं—2020 में भारत ने जासूसी के आरोप में पाकिस्तानी उच्चायोग के स्टाफ को 50% कम किया था, और 2001 में संसद हमले के बाद भी ऐसा ही कदम उठाया गया था। इस बार पहलगाम हमले के बाद भारत का रुख और सख्त है, क्योंकि राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को लश्कर-ए-तैयबा के सहयोगी ‘द रेसिस्टेंस फ्रंट’ (TRF) की संलिप्तता के सबूत मिले हैं।
पाकिस्तान की प्रतिक्रिया: पाकिस्तान ने भारत के इस फैसले को “बेबुनियाद” बताते हुए खारिज किया और दावा किया कि यह भारत की “राज्य प्रायोजित आतंकवाद” और कश्मीर में मानवाधिकार उल्लंघन से ध्यान हटाने की कोशिश है। इस्लामाबाद में भारतीय उच्चायोग के सामने विरोध प्रदर्शन हुए, जहां पाकिस्तानी पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोकने के बजाय उनका समर्थन किया। पाकिस्तान के पूर्व राजनयिक अब्दुल बासित ने भारत को “गीदड़भभकी” दी, लेकिन सोशल मीडिया पर पाकिस्तानी यूजर्स में भारत की जवाबी कार्रवाई का डर साफ दिख रहा है