पाकिस्तान पर वीजा की सख्ती, अफगानियों के लिए खोले रास्ते

khabar pradhan

संवाददाता

27 May 2025

अपडेटेड: 8:01 AM 0thGMT+0530

पाकिस्तान पर वीजा की सख्ती, अफगानियों के लिए खोले रास्ते

पाकिस्तान पर वीजा की सख्ती, अफगानियों के लिए खोले रास्ते

भारत का चौंकाने वाला कूटनीतिक दांव

भारत ने हाल ही में एक ऐसा फैसला लिया है, जिसने वैश्विक कूटनीति के गलियारों में हलचल मचा दी है। एक तरफ, पाकिस्तान के नागरिकों के लिए भारत ने सभी तरह के वीजा रद्द करने का ऐलान किया है, वहीं दूसरी तरफ, अफगान नागरिकों के लिए चार साल बाद वीजा सेवाएं फिर से शुरू कर दी हैं। यह दोहरा फैसला न केवल भारत की विदेश नीति में बदलाव का संकेत देता है, बल्कि क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर नई रणनीति की ओर भी इशारा करता है। आखिर क्यों लिया गया यह बड़ा फैसला? क्या हैं इसके पीछे के कारण और इसका क्या असर होगा? आइए, इस खबर को गहराई से समझते हैं और इस कूटनीतिक चाल के हर पहलू को उजागर करते हैं।

पाकिस्तान पर सख्ती: सभी वीजा रद्द, मेडिकल वीजा भी बंद

भारत ने 27 अप्रैल 2025 से पाकिस्तानी नागरिकों के लिए सभी मौजूदा वीजा रद्द करने का फैसला किया है। इतना ही नहीं, 29 अप्रैल 2025 से पाकिस्तानी नागरिकों के लिए मेडिकल वीजा भी बंद कर दिए जाएंगे। यह फैसला भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव का परिणाम माना जा रहा है। हाल ही में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत का यह कदम एक सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है। इसके साथ ही, भारत ने सिंधु जल समझौते को निलंबित करने और अटारी-वाघा बॉर्डर चेकपोस्ट को बंद करने जैसे कदम भी उठाए हैं, जो दोनों देशों के बीच रिश्तों में और तल्खी ला सकते हैं। यह साफ है कि भारत अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता को लेकर कोई समझौता करने के मूड में नहीं है।

अफगानियों के लिए नई शुरुआत:
चार साल बाद वीजा सेवाएं बहाल

दूसरी ओर, भारत ने अफगान नागरिकों के लिए एक बड़ा और सकारात्मक कदम उठाया है। अगस्त 2021 में तालिबान के सत्ता में आने के बाद भारत ने अफगान नागरिकों के लिए वीजा सेवाएं निलंबित कर दी थीं। लेकिन अब, चार साल बाद, भारत ने छह श्रेणियों में वीजा सेवाएं फिर से शुरू कर दी हैं। इनमें छात्र, मरीज, निवेशक, और राजनयिक शामिल हैं, जो ऑनलाइन पोर्टल के जरिए वीजा के लिए आवेदन कर सकेंगे। यह कदम भारत और तालिबान प्रशासन के बीच बढ़ते कूटनीतिक रिश्तों की ओर इशारा करता है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर और तालिबान के विदेश मंत्री अमीर खान मुत्ताकी के बीच हाल की बातचीत ने इस फैसले की नींव रखी।

क्यों लिया गया यह दोहरा फैसला?

भारत का यह फैसला क्षेत्रीय भू-राजनीति और राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखकर लिया गया है। पाकिस्तान के साथ तनाव का एक लंबा इतिहास रहा है, और हाल के आतंकी हमलों ने भारत को और सतर्क कर दिया है। वीजा रद्द करने और अन्य कदमों के जरिए भारत यह संदेश देना चाहता है कि वह अपनी सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं करेगा। दूसरी ओर, अफगानिस्तान के साथ भारत के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रिश्ते रहे हैं। तालिबान के सत्ता में आने के बाद भारत ने सतर्क रुख अपनाया था, लेकिन अब मानवीय और रणनीतिक आधार पर अफगान नागरिकों के लिए दरवाजे खोलना एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है। यह कदम न केवल अफगानिस्तान में भारत की सॉफ्ट पावर को बढ़ाएगा, बल्कि क्षेत्रीय स्थिरता में भी योगदान दे सकता है।

पाकिस्तान का जवाब: अफगानियों पर नई पाबंदी

पाकिस्तान ने भी भारत के इस फैसले का जवाब अपने तरीके से दिया है। उसने उन अफगान नागरिकों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया है, जिनके पासपोर्ट में भारतीय वीजा है। हालांकि, कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि पाकिस्तान ने इस प्रतिबंध को खारिज किया है। यह कदम भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव को और गहरा कर सकता है, क्योंकि यह अफगान नागरिकों को दोनों देशों के बीच उलझा सकता है। यह स्थिति क्षेत्रीय कूटनीति को और जटिल बना रही है, खासकर तब जब भारत और तालिबान के बीच रिश्ते बेहतर हो रहे हैं।

सोशल मीडिया पर हलचल: जनता की राय

इस फैसले ने सोशल मीडिया पर भी खूब चर्चा बटोरी है। कुछ यूजर्स ने भारत के इस कदम को ‘साहसिक और जरूरी’ बताया, खासकर पाकिस्तान के खिलाफ सख्ती को लेकर। एक यूजर ने लिखा, “भारत ने सही समय पर सही कदम उठाया। सुरक्षा पहले, फिर बाकी सब।” वहीं, अफगान नागरिकों के लिए वीजा सेवाएं शुरू करने को कई लोगों ने मानवीय दृष्टिकोण से सराहा। एक अन्य यूजर ने लिखा, “अफगानिस्तान के लोगों के लिए भारत ने हमेशा दोस्ती का हाथ बढ़ाया है। यह फैसला उसका सबूत है।” हालांकि, कुछ लोग इस दोहरे रुख पर सवाल भी उठा रहे हैं, पूछते हुए कि क्या यह क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ाएगा।

भारत की रणनीति

भारत का यह फैसला केवल क्षेत्रीय नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी महत्व रखता है। एक तरफ, यह अमेरिका और अन्य पश्चिमी देशों को संदेश देता है कि भारत अपनी विदेश नीति को स्वतंत्र रूप से तय करता है। दूसरी ओर, यह तालिबान प्रशासन के साथ रिश्तों को सामान्य करने की दिशा में एक कदम है। इसके साथ ही, पाकिस्तान पर सख्ती भारत की उस नीति को दर्शाती है, जिसमें राष्ट्रीय सुरक्षा सर्वोपरि है। यह कदम भारत को दक्षिण एशिया में एक मजबूत और जिम्मेदार शक्ति के रूप में स्थापित करता है।

क्या होगा असर?

पाकिस्तान के साथ वीजा प्रतिबंध और अफगानिस्तान के लिए वीजा सेवाओं की बहाली से क्षेत्रीय समीकरण बदल सकते हैं। पाकिस्तान के साथ तनाव और बढ़ सकता है, खासकर तब जब वह अफगान नागरिकों पर नए प्रतिबंध लगा रहा है। वहीं, अफगानिस्तान के साथ बेहतर रिश्ते भारत को वहां मानवीय और आर्थिक प्रभाव बढ़ाने का मौका देंगे। लेकिन इस दोहरे फैसले का सबसे बड़ा असर दक्षिण एशिया की भू-राजनीति पर होगा, जहां भारत, पाकिस्तान, और अफगानिस्तान के बीच तनाव और सहयोग का नया अध्याय शुरू हो सकता है।

भारत की कूटनीति का नया रंग

भारत का यह वीजा फैसला एक साहसिक और रणनीतिक कदम है, जो उसकी विदेश नीति की गहराई और लचीलेपन को दर्शाता है। पाकिस्तान पर सख्ती और अफगानिस्तान के प्रति उदारता के इस मिश्रण से भारत ने साफ कर दिया है कि वह अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा और क्षेत्रीय प्रभाव दोनों को संतुलित करना जानता है। यह कदम न केवल भारत की कूटनीतिक ताकत को उजागर करता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि भारत वैश्विक मंच पर अपनी शर्तों पर खेलना पसंद करता है। आने वाले दिन इस फैसले के दूरगामी प्रभावों को और स्पष्ट करेंगे।

टिप्पणियां (0)