पाक-तुर्की गठजोड़: शहबाज-मुनीर की एर्दोगन से मुलाकात,
संवाददाता
26 May 2025
अपडेटेड: 12:07 PM 0thGMT+0530
पाक-तुर्की गठजोड़: शहबाज-मुनीर की एर्दोगन से मुलाकात,
भारत के लिए नया सियासी दांव?
पाकिस्तान और तुर्की के बीच सियासी नजदीकियां एक बार फिर सुर्खियों में हैं। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने इस्तांबुल में तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन से मुलाकात की। यह हाई-प्रोफाइल बैठक भारत के साथ हाल के तनावों के बीच हुई, जिसने सियासी हलकों में हलचल मचा दी है। क्या यह मुलाकात केवल दोस्ती का इजहार है या भारत के खिलाफ कोई बड़ा सियासी दांव? आइए, इस मुलाकात के पीछे की कहानी, इसके मायने और क्षेत्रीय सियासत पर इसके प्रभाव को करीब से समझते हैं।
इस्तांबुल में गहमा-गहमी: एक सियासी मास्टरप्लान?
पाकिस्तान और तुर्की के रिश्ते हमेशा से गहरे और रणनीतिक रहे हैं। हाल ही में इस्तांबुल के डोलमाबाह्से पैलेस में हुई इस मुलाकात ने इन रिश्तों को और मजबूत करने का संदेश दिया। शहबाज शरीफ ने तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोगन का भारत-पाकिस्तान तनाव के दौरान पाकिस्तान का साथ देने के लिए आभार जताया। यह बयान न केवल दोनों देशों की एकजुटता को दर्शाता है, बल्कि यह भी संकेत देता है कि दोनों देश क्षेत्रीय और वैश्विक मंच पर एक साथ मिलकर रणनीति बना रहे हैं।
आसिम मुनीर, जो हाल ही में फील्ड मार्शल के पद पर प्रमोट हुए हैं, ने भी इस दौरे में तुर्की के सैन्य अधिकारियों से मुलाकात की। सैन्य और कूटनीतिक स्तर पर यह मुलाकात भारत के लिए एक चेतावनी के रूप में देखी जा रही है, खासकर हाल के तनावों के बाद। क्या यह मुलाकात भारत के खिलाफ किसी साझा रणनीति का हिस्सा है? सियासी जानकारों का मानना है कि यह दौरा केवल औपचारिक नहीं, बल्कि रणनीतिक रूप से बेहद अहम है।
भारत-पाक तनाव: तुर्की की भूमिका
हाल ही में भारत और पाकिस्तान के बीच सैन्य तनाव ने वैश्विक ध्यान खींचा है। भारत द्वारा की गई सटीक सैन्य कार्रवाइयों के बाद पाकिस्तान ने अपने मित्र देशों से समर्थन मांगा। तुर्की ने इस दौरान खुलकर पाकिस्तान का साथ दिया, जिसे शहबाज शरीफ ने इस मुलाकात में बार-बार सराहा।
एर्दोगन ने कश्मीर मुद्दे पर भी पाकिस्तान के रुख का समर्थन किया है, जो भारत के लिए संवेदनशील मुद्दा रहा है। उनकी यह रणनीति भारत के खिलाफ अपनी स्थिति को मजबूत करने की कोशिश के तौर पर देखी जा रही है। शहबाज और मुनीर का यह दौरा इस बात का संकेत देता है कि दोनों देश न केवल सैन्य सहयोग बढ़ा रहे हैं, बल्कि कूटनीतिक और आर्थिक स्तर पर भी अपनी साझेदारी को नई ऊंचाइयों पर ले जाना चाहते हैं।
सैन्य सहयोग से लेकर आर्थिक गठजोड़
पाकिस्तान और तुर्की के बीच सैन्य सहयोग लंबे समय से मजबूत रहा है। तुर्की ने पाकिस्तान को ड्रोन और अन्य सैन्य उपकरणों की सप्लाई की है, जबकि पाकिस्तान ने तुर्की के रक्षा उद्योग को समर्थन दिया है। इस मुलाकात में आसिम मुनीर ने तुर्की के लैंड फोर्सेज कमांडर से बातचीत की, जिसमें सैन्य सहयोग को और गहरा करने पर जोर दिया गया।
आर्थिक मोर्चे पर भी दोनों देश अपनी साझेदारी को मजबूत करने की दिशा में काम कर रहे हैं। शहबाज शरीफ ने तुर्की के साथ व्यापार और निवेश बढ़ाने की बात कही। दोनों देशों ने ऊर्जा, इन्फ्रास्ट्रक्चर, और टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने का संकल्प लिया। यह साझेदारी न केवल द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करेगी, बल्कि क्षेत्रीय सियासत में भी दोनों देशों की स्थिति को और प्रभावी बनाएगी।
सोशल मीडिया पर हलचल
इस मुलाकात ने सोशल मीडिया पर भी खूब हलचल मचाई। कई यूजर्स ने इसे भारत के खिलाफ एक सियासी दांव के रूप में देखा। एक यूजर ने लिखा, “पाकिस्तान और तुर्की का यह गठजोड़ भारत के लिए नई चुनौतियां खड़ी कर सकता है।” एक अन्य यूजर ने टिप्पणी की, “एर्दोगन और शहबाज की यह मुलाकात दिखाती है कि दोनों देश मिलकर कुछ बड़ा प्लान कर रहे हैं।”
हालांकि, कुछ यूजर्स ने इसे केवल औपचारिक मुलाकात बताया और कहा कि यह दोनों देशों के बीच लंबे समय से चली आ रही दोस्ती का हिस्सा है
भारत के लिए चुनौती या अवसर?
पाकिस्तान और तुर्की की इस मुलाकात को भारत के लिए एक चुनौती के रूप में देखा जा रहा है। खासकर कश्मीर और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर तुर्की का पाकिस्तान के प्रति खुला समर्थन भारत के लिए चिंता का विषय हो सकता है। लेकिन यह भारत के लिए एक अवसर भी हो सकता है। भारत अपनी कूटनीतिक ताकत और वैश्विक मंच पर बढ़ती साख के दम पर इस सियासी गठजोड़ का जवाब दे सकता है।
भारत ने हाल के वर्षों में तुर्की के साथ अपने रिश्तों को भी बेहतर करने की कोशिश की है। ऐसे में, इस मुलाकात के बाद भारत की कूटनीति और सैन्य रणनीति पर सभी की नजरें होंगी।