पीएमओ का नया नाम ‘सेवा तीर्थ ‘:
अब सेवा तीर्थ से चलेगी सरकार:
संवाददाता
14 February 2026
अपडेटेड: 3:20 PM 0thGMT+0530
पीएमओ हुआ अब सेवा तीर्थ:
पहले दिन राहत के चार फैसले:
कल शुक्रवार को प्रधानमंत्री कार्यालय पीएमओ का पता बदल गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नए पीएमओ यानी सेवा तीर्थ का उद्घाटन किया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नई दिल्ली में नए प्रशासनिक परिसर जिसे अब सेवातीर्थ कहा जाएगा, का अनावरण किया। इस अत्याधुनिक भवन में प्रधानमंत्री कार्यालय पीएमओ, राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय और कैबिनेट सचिवालय एक जगह पर ही हो गए हैं।
प्रधानमंत्री ने नए पीएमओ में सबसे पहले भगवान गणेश की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया।
उसके बाद चार फैसलों की फाइल पर दस्तखत किए।
प्रधानमंत्री ने कहा सेवा तीर्थ नाम नहीं संकल्प है:
नए पीएमओ का नाम सेवा तीर्थ है। सेवा की भावना ही भारत की आत्मा है ,सेवा की भावना ही भारत की पहचान है ,भारतीय संस्कृति का यही विचार पीएमओ और सरकार का विजन है।
इसलिए सेवा तीर्थ केवल एक नाम नहीं यह एक संकल्प है। सेवा तीर्थ यानी नागरिक की सेवा से पवित्र हुआ स्थल।
गुलामी की मानसिकता बदलने का नया अभियान:
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि यह सिर्फ नाम बदलने का निर्णय नहीं बल्कि सत्ता के मिजाज को सेवा की भावना में बदलने का पवित्र प्रयास था। इसके पीछे वैचारिक सूत्रता एक ही है स्वतंत्र भारत की स्वतंत्र पहचान और गुलामी से मुक्त निशान।
प्रधानमंत्री मोदी ने नए पीएमओ में पहले दिन महिलाओं, सड़क दुर्घटना पीड़ितों , किसानों ,युवा, युद्ध उद्यमियों के हित में फसलों की फाइल पर हस्ताक्षर कर सेवा तीर्थ का नाम सार्थक किया।
उन्होंने कहा कि साउथ ब्लॉक और नॉर्थ ब्लॉक ब्रिटिश हुकूमत की सोच लागू करने के लिए बने हुए थे । अब सेवा तीर्थ और कर्तव्य भवन से 140 करोड़ देशवासियों की सोच को आगे बढ़ाने वाले फैसले सेवा तीर्थ से किए जाएंगे।
‘नागरिक देवो भव:’ का संदेश लिखा!
सेवा तीर्थ भवन पर नागरिक देवों भव: का संदेश लिखा है ।प्रधानमंत्री मोदी ने नए पीएमओ के साथ कर्तव्य भवन- 1 ,कर्तव्य भवन -2 ,का भी उद्घाटन किया ।उन्होंने कहा कि यह दुर्भाग्य है कि आजादी के बाद भी गुलामी के प्रतीक को ढोया जाता रहा। हमने गुलामी की मानसिकता को बदलने का अभियान शुरू किया है। वीरों के नाम पर नेशनल वॉर मेमोरियल ,पुलिस स्मारक बनाया। रेसकोर्स का नाम बदलकर लोक कल्याण मार्ग रखा।

पहले दिन किये राहत के फैसलों की फाइल पर हस्ताक्षर:
1.. पीएम राहत योजना -दुर्घटना पीड़ित को कैशलेस उपचार:
हर सड़क दुर्घटना पीड़ित को 1.5 लाख तक का कैशलेस उपचार मिलेगा। जिसका उद्देश्य है तत्काल इलाज न मिलने से किसी की जान का न जाना।
इससे दुर्घटना पीड़ित को अस्पताल तक पहुंचाने वाले को भी इनाम दिया जाएगा।
इससे तुरंत पैसा जमा करने की बाध्यता खत्म होगी और जल्दी अस्पताल पहुंचने पर पीड़ित को जल्दी इलाज मिल जाएगा।
2.. लखपति दीदी का लक्ष्य बढ़ाकर किया जाएगा 6 करोड़:
मार्च 2019 तक यानी 4 साल में 6 करोड़ लाभार्थी लखपति दीदी का एक नया लक्ष्य रखा गया है। सरकार ने मार्च 2027 की तय समय सीमा से एक वर्ष से भी अधिक समय पहले 3 करोड़ लखपति दीदी का ऐतिहासिक आंकड़ा पार कर लिया है।
3.. किसानों को दी सौगात- कृषि कोष बढ़ाकर किया दुगना:
कृषि एवं संरचना कोश का कर्ज़ का लक्ष्य को दुगना यानी 2 करोड़ कर दिया गया है। इस देश की कृषि मूल्य श्रृंखला मजबूत होगी।
इससे किसान सहकारी समितियां कृषि उद्यमियों को कृषि ढांचे के लिए कर्ज पर ब्याज सहायता और गारंटी मिलती है इससे किसान अधिक फायदा उठा पाएंगे।
4..युवा उद्यमियों को दिया संबल:
स्टार्टअप इंडिया फंड का फंड्स 2.0 हुआ मंजूर:
नवाचार इकोसिस्टम को शक्ति प्रदान करने डीप टेक उन्नत विनिर्माण और ब्रेकथ्रू टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में युवा टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में युवा उद्यमियों को मदद हेतु 10000 करोड़ के कॉपर के साथ स्टार्टअप इंडिया फंड का फंड्स को 2.0 को मंजूरी दी गई है।
इससे स्टार्टअप और डीप टेक रिसर्च को बढ़ावा मिलेगा इससे पहले 2016 में 10 हजार करोड रुपए का फंड आफ फंड बनाया गया था।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि नए भवन में फैसले महाराज की सोच से नहीं बल्कि लोगों की अपेक्षाओं और आगे बढ़ाने वाले फैसले:
प्रधानमंत्री ने उद्घाटन समारोह में कहा कि आज हम एक नया इतिहास बनते हुए देख रहे हैं। साउथ ब्लॉक और नॉर्थ ब्लॉक जैसी इमारतें , ब्रिटिश सोच की हुकूमत को लागू करने के लिए बनाई गई थी । वहीं ‘सेवा तीर्थ’ और ‘कर्तव्य भवन’ जैसे परिसर भारत की जनता की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए बनाए गए हैं । यहां पर जो भी फैसले लिए जाएंगे ,वह किसी महाराज की सोच को नहीं बल्कि 140 करोड लोगों की अपेक्षाओं को आगे बढ़ने का आधार बनेंगे। इसलिए यह आवश्यक है कि विकसित भारत की कल्पना ,नीतियों और योजनाओं में ही नहीं बल्कि कार्य स्थल और इमारत में भी दिखना चाहिए।
