प्रदेश के विश्वविद्यालय में मंदिर प्रबंधन की होगी पढ़ाई- सीएम मोहन यादव
संवाददाता
23 February 2026
अपडेटेड: 5:11 PM 0rdGMT+0530
धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने पर सरकार का फोकस
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इंदौर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान कहा कि प्रदेश को धार्मिक पर्यटन का बड़ा केंद्र बनाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि मंदिरों के बेहतर प्रबंधन और सुविधाओं के विस्तार से श्रद्धालुओं को लाभ मिलेगा और प्रदेश की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। सीएम ने कहा सरकार ने विश्वविद्यालय के साथ मिलकर मंदिर प्रबंधन के लिए पाठ्यक्रम शुरू करने का निर्णय लिया है l इसके अंतर्गत मंदिर की वित्तीय, प्रशासनिक व्यवस्था, सुरक्षा, पर्यटन से जुड़ी सारी चीजों को शामिल किया जाएगा l टेंपल मैनेजमेंट कोर्स विक्रम विश्वविद्यालय से चालू हुआ है l
धार्मिक स्थलों के विकास से बढ़ेंगे रोजगार के अवसर
सीएम ने कहा कि मंदिरों के आसपास बुनियादी ढांचे के विकास से स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर तैयार होंगे। पर्यटन से जुड़े व्यवसाय, होटल, परिवहन और छोटे कारोबार को बढ़ावा मिलेगा, जिससे क्षेत्रीय विकास को गति मिलेगी।
परंपरा और आधुनिक व्यवस्था का होगा संतुलन
सरकार का उद्देश्य मंदिरों में पारंपरिक व्यवस्था को बनाए रखते हुए आधुनिक प्रबंधन प्रणाली लागू करना है। इसके तहत सफाई, सुरक्षा, डिजिटल सुविधा और श्रद्धालुओं के लिए बेहतर इंतजाम किए जाएंगे, ताकि धार्मिक स्थलों की पहचान और मजबूत हो सके।
नगर विकास और पंचायत स्तर पर भी होंगे बदलाव
मुख्यमंत्री ने कहा कि नगर परिषद और पंचायतों को सशक्त बनाने के लिए नई योजनाएं लागू की जा रही हैं। स्थानीय निकायों के सहयोग से विकास कार्य तेज किए जाएंगे, जिससे गांव और शहर दोनों में संतुलित प्रगति सुनिश्चित हो सके।
ललित कला और मूर्ति शिल्प को भी दिया जा रहा प्रोत्साहन
सीएम ने कहा कि सरकार ललित कला और मूर्ति शिल्प को बढ़ावा देने के लिए विशेष कदम उठा रही है। प्रदेश में ही पत्थर और धातु की प्रतिमाएं तैयार कराई जा रही हैं, ताकि स्थानीय कलाकारों को अवसर मिले और रोजगार भी बढ़े। उन्होंने बताया कि मध्य प्रदेश में जैन और अन्य धार्मिक परंपराओं से जुड़ी समृद्ध शिल्प परंपरा है, जिसे पुनर्जीवित करने का प्रयास किया जा रहा है।
महाकाल लोक में फाइबर प्रतिमाओं की जगह स्टोन और मेटल मूर्तियां
मुख्यमंत्री ने बताया कि महाकाल लोक में पहले लगी फाइबर की प्रतिमाओं को हटाकर अब पत्थर और धातु की मूर्तियां लगाने का निर्णय लिया गया है। इन प्रतिमाओं को प्रदेश के ही शिल्पकार तैयार कर रहे हैं, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा हो रहे हैं और पारंपरिक कला को संरक्षण मिल रहा है।