प्रशांत किशोर के हुए आरसीपी सिंह…
संवाददाता
19 May 2025
अपडेटेड: 1:38 PM 0thGMT+0530
प्रशांत किशोर के हुए आरसीपी सिंह......बिहार की राजनीति में नया समीकरण
बिहार की राजनीति में नया समीकरण…
इधर बिहार में चुनाव हैं और हर पल यहां का सियासी मौसम बदल रहा है….अब नई खबर ये है पी के यानि प्रशांत किशोर और आरसीपी सिंह का मिलन हो गया है यानि दोनों की पार्टी का विलय अब नया समीकरण बनाने जा रहा है…. अब सवाल ये है कि इस मिलन से किस गठबंधन को ज्यादा नुकसान होगा? …इनके साथ आने से क्या एनडीए के संगठन की ताकत और सीएम नीतीश का राजनीतिक अनुभव बिहार के चुनाव में मजबूती दे पायेगा…बिहार की राजनीति में प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी और आरसीपी सिंह की पार्टी ‘आप सबकी आवाज’ (आसा) के विलय ने 2025 के विधानसभा चुनाव को बेहद दिलचस्प बना दिया है….या यूं कहें कि चुनाव से पहले ही पहले सियासी समीकरणों को और जटिल बना दिया है….बिहार की राजनीति से जो जुड़े हैं वो जोनते ही होंगे कि प्रशांत किशोर और आरसीपी सिंह दोनों ही नीतीश कुमार के करीबी रहे हैं और उनकी राजनीति को करीब से समझते भी हैं. आरसी पी सिंह का नालंदा और कुर्मी समुदाय में खासा प्रभाव है जो नीतीश के पारंपरिक वोट बैंक को नुकसान पहुंचा सकता है. कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि आरसी पी सिंह की भूमिका मुख्य रूप से वोटकटवा की हो सकती है, जैसा कि चिराग पासवान ने किया था 2020 में.अब इससे होगा क्या…इससे अनुमान ये लगाया जा रहा है कि सीधे सीधे जेडीयू की सीटें कम हो सकती हैं, जिसका लाभ महागठबंधन को मिल सकता है. इस समीकरण के बन जाने से अब समझिये बीजेपी की मुश्किल क्या है…नीतीश कुमार की घटती लोकप्रियता के कारण बीजेपी उन्हें मुख्यमंत्री चेहरा घोषित करने से बच रही है….बार बार उनकी हेल्थ को लेकर विपक्षी हमलावर हैं…लेकिन प्रशांत किशोर ने दावा किया है कि अगर एनडीए जीतता है, तो बीजेपी अपना मुख्यमंत्री लाएगी. यही बात है जो जेडीयू-बीजेपी गठबंधन में तनाव पैदा कर सकती है. प्रशांत किशोर शुरू से ही तेजस्वी यादव और राजेडी को निशाने पर लेते रहे हैं. उनकी रणनीति राजेडी के युवा वोट बैंक, खासकर यादव और मुस्लिम मतदाताओं को आकर्षित करने की है. अगर जन सुराज महागठबंधन के वोट बैंक में सेंध लगाने में सफल होती है, तो तेजस्वी यादव के लिए मुश्किलें बढ़ सकती हैं…प्रशांत किशोर की पार्टी और आरसीपी सिंह की पार्टी में विलय का तात्कालिक नुकसान एनडीए, खासकर जेडीयू को होने की संभावना ज्यादा है, क्योंकि प्रशांत किशोर और आरसीपी सिंह दोनों ही नीतीश कुमार को मुख्य निशाना बना रहे हैं. हालांकि, अगर जन सुराज महागठबंधन के वोट बैंक में सेंध लगाने में सफल होती है, तो मुकाबला त्रिकोणीय हो सकता है, जिससे दोनों गठबंधनों को नुकसान हो सकता है. 2025 के चुनाव में एनडीए और महागठबंधन के बीच कांटे की टक्कर की उम्मीद की जा रही है. दोनों गठबंधनों की ताकत और कमजोरियों का विश्लेषण देखा जाए तो क्या तेजस्वी यादव की लोकप्रियता और युवा छवि महागठबंधन को बढ़त दे सकती है? क्या नीतीश के लिए ये चुनाव अब तक का सबसे कठिन चुनाव हो सकता है? ..अब अगर नीतीश कुमार के अनुभव को देखें तो और उनकी सरकार की कुछ लोकप्रिय योजनाएं, हैं जैसे शराबबंदी बिजली, सड़क, और खासकर महिलाओं के लिए सशक्तिकरण की योजनाएं..,…अभी भी प्रभावी हैं तो सोचा ये जा रहा है नीतीश के नेतृत्व में ही एनडीए 200+ सीटें जीत सकती है…इधर यादव और मुस्लिम वोट बैंक का मजबूत समर्थन है तेजस्वी यादव को… युवा छवि साथ में 2020 में राजेडी के सबसे बड़ी पार्टी बनने का रिकॉर्ड.. और नीतीश की कमजोर होती छवि का फायदा उठाने की रणनीति इसी में है….लेकिन राजेडी का जंगलराज अभी लोग भूले नहीं हैं…पुराना ठप्पा अभी भी लगा है, जिसे बीजेपी और जन सुराज भुनाने की कोशिश कर रहे हैं. गठबंधन में कांग्रेस और अन्य छोटे दलों की बेहद कमजोर स्थिति की वजह से प्रशांत किशोर का तेजस्वी के खिलाफ आक्रामक रुख है….नीतीश कुमार बिहार की राजनीति के सबसे अनुभवी पुराने खिलाड़ी हैं, जिन्होंने बार-बार गठबंधन बदलकर अपनी सत्ता बरकरार रखी है….मतलब मुख्यमंत्री तो हम ही रहेंगे…लेकिन इस बार उनकी स्थिति पहले से कहीं ज्यादा कमजोर दिख रही है. प्रशांत किशोर और आरसीपी सिंह, जो कभी उनके ‘हथियार’ थे, अब उनके खिलाफ सबसे बड़ी चुनौती बन गए हैं….प्रशांत किशोर ने नीतीश को शारीरिक और मानसिक रूप से थका हुआ बताया और उनकी छवि को भारी नुकसान पहुंचाया है. उनकी रणनीति नीतीश के विकास मॉडल पर सवाल उठाने की है, जैसे उनके गांव में रियलिटी चेक. आरसीपी सिंह सिंह की नीतीश के खिलाफ नाराजगी है…जो नीतीश के वोट बैंक को नुकसान पहुंचा सकती है. नीतीश की बढ़ती उम्र और घटती लोकप्रियता में राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नीतीश की उम्र और थकान उनकी सबसे बड़ी कमजोरी बन रही है…और यही बीजेपी के लिए तुरूप का इक्का हो सकती है….सीएम फेस के लिए… तो क्या नीतीश कुमार मान जायेंगे….या फिर नीतीश कुमार के दो पूर्व सहयोगियों का गठजोड़ अब उनकी सत्ता को गंभीर चुनौती देने जा रहा है? क्या बिहार में कुर्मी और ब्राह्मण का गठजोड़ नई कहानी लिखने जा रहा है क्या बिहार की राजनीति में कोई बड़ा उलटफेर होने जा रहा है….