फ्रांस हर साल 30 हजार भारतीय छात्रों को देगा मौका, मैक्रों का ऐलान । ब्राजील भी बढ़ायेगा भारत से व्यापार ।
संवाददाता
19 February 2026
अपडेटेड: 3:39 PM 0thGMT+0530
भारत-फ्रांस संबंधों को नई मजबूती देने की पहल
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने भारत दौरे के दौरान दोनों देशों के सांस्कृतिक और शैक्षणिक संबंधों को मजबूत करने के लिए अहम घोषणा की। उन्होंने कहा कि फ्रांस वर्ष 2030 तक हर साल 30,000 भारतीय छात्रों का स्वागत करेगा। अभी यह संख्या 10000 प्रति वर्ष है l यह कदम भारत और फ्रांस के बीच सहयोग को नई दिशा देने वाला माना जा रहा है।
वर्तमान संख्या को तीन गुना बढ़ाने की योजना
मैक्रों ने बताया कि अभी फ्रांस में लगभग 10,000 भारतीय छात्र पढ़ाई कर रहे हैं। इस संख्या को बढ़ाकर 2030 तक 30,000 करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए फ्रांस वीजा प्रक्रिया को सरल और तेज बनाएगा, ताकि भारतीय छात्रों को प्रवेश में आसानी हो सके।
शिक्षा और अनुसंधान में बढ़ेगा सहयोग

राष्ट्रपति मैक्रों ने कहा कि भारत के साथ मिलकर छात्र आदान-प्रदान और संयुक्त शोध कार्यक्रमों को बढ़ावा दिया जाएगा। फ्रांस अपने विश्वविद्यालयों में अंग्रेजी माध्यम के कोर्स बढ़ाने और विश्वस्तरीय शिक्षा प्रदान करने पर भी काम कर रहा है। इससे भारतीय छात्रों को बेहतर अवसर मिलेंगे।
ब्राजील के राष्ट्रपति लूला भी पहुंचे भारत
ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा भी एआई समिट में भाग लेने के लिए भारत पहुंचे हैं। वे 18 से 22 फरवरी 2026 तक पांच दिवसीय यात्रा पर हैं। नई दिल्ली एयरपोर्ट पर उनका स्वागत विदेश राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा ने किया।
भारत-ब्राजील व्यापार को 50 अरब डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य
भारत और ब्राजील के बीच व्यापार बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है। राष्ट्रपति लूला ने कहा कि दोनों देश मौजूदा लगभग 15-20 अरब डॉलर के व्यापार को बढ़ाकर 50 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रख रहे हैं। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ बैठक में एआई और उभरती तकनीकों में सहयोग बढ़ाने पर भी चर्चा होगी।
भारत-फ्रांस नवाचार वर्ष 2026 का शुभारंभ
इस दौरे के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति मैक्रों ने मुंबई में 2026 को भारत-फ्रांस नवाचार वर्ष घोषित किया। साथ ही एसएम इंडिया-फ्रांस कैंपस में ‘एआई इन ग्लोबल हेल्थ’ पहल का उद्घाटन भी किया गया, जिसका उद्देश्य स्वास्थ्य क्षेत्र में सुधार और तकनीकी सहयोग को बढ़ाना है।
