‘बाबा’ की बढ़ी बेचैनी, 2027 में मायावती के लिए भी रंग लेगा ‘खेला’!
संवाददाता
26 May 2025
अपडेटेड: 10:51 AM 0thGMT+0530
‘बाबा’ की बढ़ी बेचैनी, 2027 में मायावती के लिए भी रंग लेगा ‘खेला’!
यूपी में कांग्रेस का मास्टर स्ट्रोक
उत्तर प्रदेश की सियासी जमीन पर एक बार फिर हलचल तेज हो गई है! कांग्रेस ने अपने ताजा दांव से सियासत के समीकरण उलट-पुलट कर दिए हैं, जिसने न केवल ‘बाबा’ यानी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की टेंशन बढ़ा दी है, बल्कि बहुजन समाज पार्टी (BSP) की सुप्रीमो मायावती की धड़कनें भी तेज कर दी हैं। 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर अभी से सियासी गलियारों में चर्चाएं गर्म हैं कि यह नया ‘खेला’ यूपी की राजनीति को नई दिशा दे सकता है। आइए, इस सियासी ड्रामे की हर परत को खोलते हैं और समझते हैं कि कांग्रेस का यह दांव कैसे यूपी की सियासत में भूचाल ला रहा है।
कांग्रेस का सियासी तड़का: नया दांव, नई रणनीति
उत्तर प्रदेश में कांग्रेस ने हाल ही में अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव किया है, जिसने सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (BJP) और BSP दोनों को सोचने पर मजबूर कर दिया है। सूत्रों की मानें तो कांग्रेस ने यूपी में अपने पुराने वोट बैंक, खासकर दलित, मुस्लिम, और पिछड़े वर्गों को फिर से जोड़ने की कवायद शुरू कर दी है। इसके लिए पार्टी ने स्थानीय नेताओं को मजबूत करने और जमीनी स्तर पर संगठन को पुनर्जनन देने का प्लान बनाया है।
कांग्रेस ने हाल के दिनों में यूपी में कई बड़े जनसंपर्क अभियान शुरू किए हैं, जिनमें ग्रामीण क्षेत्रों में विशेष फोकस किया जा रहा है। पार्टी ने युवा नेताओं को आगे लाने और सामाजिक न्याय के मुद्दों को उठाने की रणनीति अपनाई है। यह दांव इसलिए भी अहम है, क्योंकि यूपी में दलित और मुस्लिम वोटरों की बड़ी आबादी किसी भी पार्टी की जीत में निर्णायक भूमिका निभाती है।
‘बाबा’ की बेचैनी: BJP पर दबाव
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, जिन्हें यूपी की सियासत में ‘बाबा’ के नाम से जाना जाता है, के लिए यह खबर किसी झटके से कम नहीं है। BJP ने पिछले दो विधानसभा चुनावों (2017 और 2022) में यूपी में शानदार जीत हासिल की थी, लेकिन कांग्रेस का यह नया दांव उनके लिए चुनौती बन सकता है। कांग्रेस की रणनीति दलित और मुस्लिम वोटरों को अपनी तरफ खींचने की है, जो अब तक BSP और समाजवादी पार्टी (SP) के साथ गठबंधन में बंटे हुए थे।
सियासी जानकारों का मानना है कि अगर कांग्रेस इस रणनीति में कामयाब हो गई, तो यह BJP के लिए 2027 के चुनाव में मुश्किल खड़ी कर सकता है। खासकर पश्चिमी यूपी और पूर्वांचल के कुछ इलाकों में, जहां दलित और मुस्लिम वोटरों की अच्छी-खासी तादाद है, कांग्रेस की यह चाल BJP के लिए खतरे की घंटी साबित हो सकती है।
मायावती की धड़कनें तेज: BSP का गढ़ खतरे में
कांग्रेस के इस दांव ने मायावती की BSP के लिए भी खतरे की घंटी बजा दी है। BSP का पारंपरिक वोट बैंक दलित समुदाय रहा है, लेकिन पिछले कुछ सालों में इस वोट बैंक में सेंधमारी देखने को मिली है। 2019 और 2022 के चुनावों में BSP का प्रदर्शन अपेक्षा से कमजोर रहा, और अब कांग्रेस की नई रणनीति मायावती के लिए और मुश्किलें खड़ी कर सकती है।
मायावती ने हाल के दिनों में अपनी पार्टी को फिर से मजबूत करने की कोशिश की है, लेकिन कांग्रेस का दलित वोटरों पर फोकस उनकी रणनीति को चुनौती दे रहा है। सियासी हलकों में चर्चा है कि अगर कांग्रेस दलित वोटरों का एक बड़ा हिस्सा अपनी तरफ खींचने में कामयाब हो गई, तो यह BSP के लिए बड़ा झटका होगा। मायावती की धड़कनें बढ़ने की एक वजह यह भी है कि कांग्रेस ने सामाजिक न्याय और समावेशी विकास जैसे मुद्दों को उठाकर BSP के कोर वोटरों को लुभाने की कोशिश शुरू कर दी है।
2027 का ‘खेला’: यूपी में सियासी जंग
2027 का यूपी विधानसभा चुनाव अभी भले ही दूर हो, लेकिन सियासी दल अभी से अपनी रणनीतियां तैयार करने में जुट गए हैं। कांग्रेस का यह दांव इस बात का संकेत है कि पार्टी यूपी में अपनी खोई हुई जमीन वापस पाने के लिए पूरी ताकत झोंक रही है। सूत्रों की मानें तो कांग्रेस इस बार SP के साथ गठबंधन को और मजबूत करने की योजना बना रही है, ताकि BJP को कड़ी टक्कर दी जा सके।
इसके अलावा, कांग्रेस ने यूपी में अपने संगठन को मजबूत करने के लिए कई नए चेहरों को सामने लाने का फैसला किया है। युवा नेताओं को प्रोत्साहन, सोशल मीडिया के जरिए प्रचार, और ग्रामीण क्षेत्रों में जनसभाएं आयोजित करके पार्टी जनता के बीच अपनी पहुंच बढ़ाने की कोशिश कर रही है।
सोशल मीडिया पर हलचल
कांग्रेस के इस दांव ने सोशल मीडिया पर भी हलचल मचा दी है। लोग इस सियासी रणनीति को लेकर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। एक यूजर ने लिखा, “कांग्रेस का यह मास्टर स्ट्रोक यूपी की सियासत को हिला सकता है। 2027 में असली खेला होगा!” वहीं, एक अन्य यूजर ने टिप्पणी की, “BJP और BSP को अब सावधान हो जाना चाहिए। कांग्रेस की यह रणनीति गेम-चेंजर साबित हो सकती है।”