*भारतीय मूल के जलवायु वैज्ञानिक को अमेरिका में प्रतिष्ठित क्रैफोर्ड सम्मान*
संवाददाता
3 February 2026
अपडेटेड: 1:52 PM 0rdGMT+0530
भारतीय मूल के प्रसिद्ध जलवायु वैज्ञानिक वीरभद्रन रामनाथन को भूविज्ञान के क्षेत्र में वर्ष 2026 का प्रतिष्ठित क्रैफोर्ड पुरस्कार प्रदान किया गया है। यह सम्मान रॉयल स्वीडिश एकेडमी ऑफ साइंसेज़ द्वारा दिया जाता है और इसे “भूविज्ञान का नोबेल पुरस्कार” भी कहा जाता है।
यह पुरस्कार रामनाथन के उस दीर्घकालिक शोध को मान्यता देता है, जिसमें उन्होंने सुपर-पॉल्यूटेंट्स और वायुमंडलीय भूरे बादलों (एटमॉस्फेरिक ब्राउन क्लाउड्स) के पृथ्वी की जलवायु पर पड़ने वाले प्रभावों को स्पष्ट किया। उनके शोध ने वैश्विक तापवृद्धि को समझने की दिशा में एक नई वैज्ञानिक दृष्टि प्रदान की है।
अब 82 वर्ष के हो चुके रामनाथन ने वर्ष 1975 में नासा में कार्य करते हुए एक ऐतिहासिक खोज की थी। उन्होंने यह स्थापित किया कि क्लोरोफ्लोरोकार्बन (CFCs)—जो एयरोसोल और रेफ्रिजरेशन में व्यापक रूप से उपयोग किए जाते थे—वायुमंडल में गर्मी को कार्बन डाइऑक्साइड की तुलना में लगभग 10,000 गुना अधिक प्रभावी ढंग से रोकते हैं।
रामनाथन के अनुसार, 1975 तक यह माना जाता था कि वैश्विक तापमान में वृद्धि का मुख्य कारण केवल कार्बन डाइऑक्साइड है। लेकिन उनके शोध ने यह दिखाया कि प्रौद्योगिकी और मानव गतिविधियाँ भी पर्यावरण को गहराई से बदलने की क्षमता रखती हैं, जिसने वैज्ञानिक समुदाय को नई दिशा में सोचने के लिए प्रेरित किया।
मदुरै में जन्मे और चेन्नई में पले-बढ़े रामनाथन ने अपने करियर की शुरुआत सिकंदराबाद स्थित एक रेफ्रिजरेटर फैक्ट्री में इंजीनियर के रूप में की थी। आज उनका कार्य वैश्विक जलवायु नीति और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में मील का पत्थर माना जाता है।