भारत और जर्मनी के रिश्तों को मिली नई मजबूती :जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ आये भारत :

khabar pradhan

संवाददाता

12 January 2026

अपडेटेड: 9:57 PM 0thGMT+0530

भारत और जर्मनी के रिश्तों को मिली नई मजबूती :जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ आये भारत :


भारत और जर्मनी के रिश्तों को मिली नई मजबूती :
जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मार्च का भारत दौरा:

जर्मनी के नए चांसलर फ्रेडरिक मर्ट्ज दो दिवसीय भारत यात्रा पर हैं.. चांसलर बनने के बाद ये उनकी एशिया की पहली यात्रा है, और संयोग देखिए कि ये दौरा ऐसे वक्त हो रहा है जब दुनिया की दो सबसे बड़ी ताकतें, अमेरिका और रूस, खुद भू-राजनीतिक और आर्थिक दबावों से गुजर रही हैं…ऐसे में सवाल उठता है कि क्या भारत अब जर्मनी का नया रणनीतिक साथी बनने जा रहा है…और नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फ्रेडरिक मर्ट्ज की मौजूदगी में दोनों देशों ने कई MOU पर साईन किए…अब इन समझौतों ने भारत-जर्मनी रणनीतिक साझेदारी को एक नई ऊर्जा दे दी है।

भारत और जर्मनी के बीच द्विपक्षीय व्यापार:

संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रधानमंत्री मोदी ने बड़ी बात कही…पीएम मोदी बोले कि भारत और जर्मनी के बीच द्विपक्षीय व्यापार 50 अरब डॉलर के पार पहुंच गया है, जो अब तक का सबसे ऊंचा स्तर है…इस दौरे की खास बात ये भी रही कि मर्ट्ज अपने साथ एक बड़ा जर्मन व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल भी साथ लाए है, जिसमें कई दिग्गज कंपनियों के टॉप नॉट्च अधिकारी भी शामिल हैं।


क्या जर्मनी को है भारत की जरूरत:

अब सवाल ये है कि जर्मनी को भारत की इतनी ज़रूरत क्यों पड़ रही है।

दरअसल, जर्मनी लंबे समय तक चीन पर निर्भर रहा…लेकिन अब तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है…चीन में जर्मन कंपनियों की बिक्री घट रही है ।सेमीकंडक्टर और रेयर अर्थ एलिमेंट्स पर चीन की पाबंदियों ने जर्मनी की चिंता बढ़ा दी है, और बर्लिन-बीजिंग रिश्तों में भी तल्खी आ चुकी है…ऐसे में जर्मनी को चाहिए एक नया भरोसेमंद पार्टनर और यही जगह भारत भर रहा है। दरअसल,पीएम मोदी ने बताया कि भारत में 2000 से ज्यादा जर्मन कंपनियां पहले से मौजूद हैं… ये भारत की स्थिर अर्थव्यवस्था और अपार संभावनाओं पर जर्मनी के विश्वास को दिखाता है।


भारत यूरोपीय संघ का फ्री ट्रेड एग्रीमेंट:

अब बात करते हैं उस डील की, जिस पर सबकी नजर है और वो है भारत-यूरोपीय संघ का फ्री ट्रेड एग्रीमेंट यानी FTA…दरअसल, फ्रेडरिक मर्ट्ज ने साफ कहा कि भारत यूरोपियन यूनियन FTA को अंतिम रूप देना बेहद जरूरी है…अगर ये समझौता होता है, तो जर्मन कंपनियों के लिए भारत में इंवेस्ट करना आसान होगा,और भारतीय कंपनियों के लिए यूरोप के दरवाजे और ज्यादा खुलेंगे।


जर्मन की डिफेंस कंपनी न्यू टेक्नोलॉजी से लैस पनडुब्बिया बनाने का प्रस्ताव:

अब एक और अहम मुद्दा पनडुब्बियों का भी है…बताया जा रहा है कि जर्मनी की बड़ी डिफेंस कंपनी अब भारतीय नौसेना के लिए छह new technology से लैस पनडुब्बियां बनाने के प्रस्ताव पर बातचीत कर रही है… ये पनडुब्बियां भारत की मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स के साथ मिलकर बनाई जाएंगी।
भलें ही ये दौरा सिर्फ एक औपचारिक यात्रा लग रहा होगा लेकिन ऐसा बिलकुल भी नहीं है…इस यात्रा का संकेत साफ है कि भारत अब GLOBAL POWER का सबसे trustable option बन रहा है।

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