भारत-फ्रांस राफेल सौदा
संवाददाता
28 April 2025
अपडेटेड: 9:56 AM 0thGMT+0530
63,000 करोड़ में 26 परमाणु-सक्षम मरीन विमान नौसेना के लिए
भारत और फ्रांस ने एक ऐतिहासिक रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसके तहत भारत 63,000 करोड़ रुपये की लागत से 26 राफेल मरीन विमान खरीदेगा। ये विमान परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम हैं और भारतीय नौसेना के बेड़े में शामिल होकर समुद्री सुरक्षा को और मजबूत करेंगे। यह सौदा भारत की रक्षा क्षमताओं को नई ऊंचाइयों तक ले जाने वाला माना जा रहा है। राफेल मरीन विमान अत्याधुनिक तकनीक से लैस हैं, जो नौसेना को लंबी दूरी तक मारक क्षमता प्रदान करेंगे। ये विमान विमानवाहक पोतों जैसे आईएनएस विक्रांत पर तैनात किए जा सकेंगे, जिससे नौसेना की रणनीतिक ताकत में इजाफा होगा।इस सौदे के तहत विमानों के साथ-साथ उन्नत हथियार प्रणालियां, मिसाइलें और रखरखाव का समर्थन भी शामिल है। राफेल मरीन विमान अपनी बहु-भूमिका क्षमता के लिए जाने जाते हैं, जो हवा से हवा और हवा से जमीन पर हमला करने में सक्षम हैं। यह खरीद भारत के स्वदेशी रक्षा उत्पादन को पूरक बनाएगी और फ्रांस के साथ रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करेगी। दोनों देशों के बीच यह समझौता लंबे समय से चली आ रही बातचीत का परिणाम है, जिसमें तकनीकी हस्तांतरण और लागत पर गहन विचार-विमर्श हुआ।इस डील से भारतीय नौसेना की ताकत में तो वृद्धि होगी ही, साथ ही क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों, खासकर हिंद महासागर क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच भारत की स्थिति और सशक्त होगी। राफेल मरीन विमानों की तैनाती से नौसेना को समुद्री निगरानी, टोही और हमले की क्षमताओं में उल्लेखनीय सुधार होगा। यह सौदा भारत के रक्षा आधुनिकीकरण कार्यक्रम का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य सशस्त्र बलों को विश्वस्तरीय तकनीक से सुसज्जित करना है। फ्रांस के साथ यह सहयोग न केवल रक्षा क्षेत्र में, बल्कि दोनों देशों के बीच व्यापक कूटनीतिक और आर्थिक संबंधों को भी बढ़ावा देगा।