भोजपुर मंदिर … एक अनसुलझी पहेली
संवाददाता
24 March 2025
अपडेटेड: 2:13 PM 0thGMT+0530

भोजपुर…जो राजधानी भोपाल से 32 किमी दूर ज़िला रायसेन में स्थित है…यहां अधूरा शिवमंदिर हमेशा से ही एक अनसुलझी पहेली रहा…भोजेश्वर के नाम से प्रसिद्ध इस मंदिर को उत्तर भारत का सोमनाथ भी कहा जाता है….जिसे परमार वंश के राजा भोज ने बनवाया था…यहां एक ही पत्थर से बना शिवलिंग कई रहस्य समेटे हुए है….बड़ी रहस्यमयी है इस अधूरे मंदिर की दास्तान…बिना छत वाले आधे-अधूरे मंदिर में हैं भोलेनाथ….ऊंची पहाड़ी पर विराजे हैं भोजेश्वर…एक ही पत्थर पर बना विश्व का सबसे बड़ा शिवलिंग……इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता है….इसका अधूरा निर्माण… इतिहास में इसका कोई पुख्ता प्रमाण अब तक नहीं मिला है पर लोककथा में इसे द्वापर युग में महाभारत काल से जोड़ा जाता है….मान्यता है कि पांडवों के द्वारा ये मंदिर एक ही रात में निर्मित होना था लेकिन छत का काम पूरा होने के पहले ही सवेरा हो गया और काम अधूरा रह गया….बलुआ पत्थर से बने विशाल शिवलिंग को एशिया का सबसे बड़ा शिवलिंग माना गया है जो एक ही पत्थर से निर्मित हैं…शिवलिंग की लम्बाई 21 फीट और व्यास 7.5 फीट है…. उस जमाने में 70 टन भार वाले विशाल पत्थर को इतनी ऊंचाई पर कैसे पहुंचाया गया…भव्य निर्माण की कौन सी तकनीक थी…ये अब भी अबूझ पहेली है….मंदिर के पीछे का हिस्सा काफी ढलान पर है,अंदाजा लगाया जाता है कि इसका उपयोग विशाल पत्थरों को ऊपर पहुंचाने के लिए किया गया था…यहां 40 फीट ऊंचाई वाले चार स्तम्भों पर अधूरी बनी छत टिकी है…मंदिर की छत गुम्बद आकार में है… कुछ विद्धान इसे भारत की प्रथम गुम्बदीय छत वाली इमारत मानते हैं… और यह एक सशक्त प्रमाण भी है कि भारत में गुम्बद निर्माण का प्रचलन मुगलों के आगमन के पहले भी था… मकरसंक्रांति और महाशिवरात्रि को यहां मेले का आयोजन किया जाता है…..वहीं राज्य सरकार द्वारा महाशिवरात्रि पर तीन दिवसीय भोजपुर महोत्सव का भी भव्य आयोजन होता है…जहां बड़े-बड़े कलाकार जैसे कैलाश खेर साधना भक्ति करते हैं…भोजपुर शिव मंदिर के बिलकुल सामने पार्वती गुफा है…जिसमें पुरातात्विक महत्व की कई मूर्तियां हैं….भारतीय पुरातत्व ने इसे राष्ट्रीय महत्व का स्मारक चिह्नित किया है…भोजेश्वर मंदिर के विशाल चबूतरे पर मंदिर निर्माण की अद्भुत योजना का पूरा विवरण चबूतरे के पत्थरों पर उकेरा गया है…देखा जाए तो शिल्पकारों, वास्तुकारों और इंजीनियर्स के लिए ये परिसर एक महाविद्यालय जैसा है…बेतवा नदी के किनारे स्थित इस मंदिर को लेकर दंतकथाएं और भी बहुत कुछ कहती हैं…लेकिन भोजेश्वर महादेव के लिए भक्तों की आस्था की ध्वजा निरंतर लहरा रही है…