भोजशाला माता वाग्देवी मंदिर में बसंत पंचमी  पर पूजा अर्चना को लेकर विवाद पहुंचा सुप्रीम कोर्ट:

khabar pradhan

संवाददाता

19 January 2026

अपडेटेड: 1:43 PM 0thGMT+0530

भोजशाला माता वाग्देवी मंदिर में बसंत पंचमी  पर पूजा अर्चना को लेकर विवाद पहुंचा सुप्रीम कोर्ट:



भोजशाला माता वाग्देवी मंदिर विवाद:
मध्य प्रदेश के धार जिले में भोजशाला माता वाग्देवी मंदिर स्थित है।
यह मंदिर मूल रूप से देवी सरस्वती का मंदिर था । जिसका निर्माण परवर राजा भोज ने 11वीं शताब्दी में करवाया था।
मूल रूप से यह विद्या की देवी सरस्वती का मंदिर था । परमार वंश के महानतम सम्राट राजा भोज ने 1000 से 1055 ईस्वी में एक महाविद्यालय की स्थापना की।  जिसे बाद में भोजशाला के नाम से जाना जाने लगा । यहां दूर-दूर से छात्र अध्ययन हेतु आते थे।

विवाद का कारण:

मां सरस्वती का यह पवित्र मंदिर बताया जाता है कि बार-बार नष्ट किया गया।  1305 में अलाउद्दीन खिलजी ने इसे नष्ट किया और हजारों हिंदू छात्रों और अध्यापकों का नरसंहार किया।  इसके बाद 1401 में दिलावर खान में इस मंदिर को और भी ध्वस्त किया।
इसके बाद मंदिर के संरचनात्मक तत्वों का उपयोग करके यहां कमल मौला मस्जिद का निर्माण किया गया।

बसंत पंचमी पर भोजशाला मंदिर में पूजा अर्चना को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल:

माता सरस्वती के भोजशाला स्थित वाग्देवी मंदिर पर बसंत पंचमी के अवसर पर पूजा अर्चना के अधिकार को लेकर हिंदू पक्ष ने मांग की है। क्योंकि इस बार बसंत पंचमी शुक्रवार को पड़ रही है इसलिए विवाद संवेदनशील हो गया है।

सुप्रीम कोर्ट में विष्णु जैन शंकर जैन द्वारा याचिका दायर की गई है जिसमें स्पष्ट रूप से कहा गया है कि भोजशाला में बसंत पंचमी का पर्व हिंदू समाज द्वारा सदियों से मनाया जाता है और उनका तर्क है 23 जनवरी बसंत पंचमी के दिन एक ही समुदाय को पूजा करने का अधिकार दिया जाए।  यह मामला धार्मिक आस्था ,संवैधानिक अधिकार और कानून व्यवस्था से जुड़ा हुआ है।
अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन का कहना है कि भोजशाला माता वाग्देवी मंदिर में बसंत पंचमी का पारंपरिक व ऐतिहासिक आयोजन है।  किसी भी तरह के सांप्रदायिक तनाव को रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के लिए अनुरोध किया गया है।

इसके पहले साल 2006 में 2013 में 2016 और अब 2026 में एक बार फिर बसंत पंचमी शुक्रवार को पड़ रही है । इससे धार जिले की भोजशाला की पुलिस और प्रशासन की चिंता बढ़ गई है । इसके पहले सभी मौकों पर आगजनी ,पथराव और कर्फ्यू की स्थितियां बनी थी।  ऐसी स्थिति उत्पन्न ना हो इसके लिए दोनों पक्षों से संवाद किया जा रहा है।
कल रविवार को 200 जवानों ने फ्लैग मार्च भी निकाला । ड्रोन और 1000 सीसीटीवी कैमरों से निगरानी भी की जा रही है । एआईजी कानून व्यवस्था के आदेश पर अतिरिक्त बल 20 जनवरी को धार पहुंचेगी और 27 जनवरी तक तैनात रहेगा।  इसके लिए फुल सिक्योरिटी प्लान के तहत जिले में 2435 पुलिस अधिकारी कर्मचारी तैनात रहेंगे।  सीआरपीएफ के 8000 जवान भी सुरक्षा व्यवस्था को संभालेंगे।

बसंत पंचमी को पूजा की इजाजत संबंधी आवेदन:

इसके पहले 7 अप्रैल 2003 के एएसआई आदेश के तहत हिंदू समाज को भोजशाला में मंगलवार और बसंत पंचमी पर सूर्योदय से सूर्यास्त तक पूजा की अनुमति है । मुस्लिम समुदाय को हर शुक्रवार नमाज की अनुमति दी गई है । लेकिन बसंत पंचमी पर शुक्रवार पड़ने से स्थितियां अभी स्पष्ट नहीं की गई है।

हिंदू पक्ष ने अपील दाखिल की है कि सुप्रीम कोर्ट जल्द से जल्द इन मामलों में सुनवाई करें ‌‌ । जिससे किसी भी तरह की सांप्रदायिक स्थिति से पहले संवैधानिक समाधान निकाला जा सके।

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