भोपाल में गोकाष्ठ से होलिका दहन का अभियान, सीएम डॉ. मोहन यादव का आह्वान
संवाददाता
28 February 2026
अपडेटेड: 8:03 PM 0thGMT+0530
28 फरवरी 2027
भोपाल में इस वर्ष होली के पर्व को पर्यावरण संरक्षण और गौ-संवर्धन के संदेश के साथ मनाने की तैयारी की जा रही है। राज्य सरकार और विभिन्न सामाजिक संगठनों की पहल पर शहर में पारंपरिक लकड़ी के स्थान पर गोकाष्ठ से होलिका दहन को बढ़ावा दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी प्रदेशवासियों से इस अभियान में सहभागी बनने की अपील की है, ताकि त्योहार के साथ प्रकृति और संस्कृति दोनों की रक्षा की जा सके।
हरित होली के इस अभियान का उद्देश्य जंगलों की कटाई कम करना और जैविक विकल्पों को अपनाना बताया गया है।
प्रदेश सरकार के अनुसार, गोबर से बने गोकाष्ठ का उपयोग करने से वायु प्रदूषण कम होता है और पेड़ों की कटाई पर रोक लगाने में मदद मिलती है। इसी को ध्यान में रखते हुए भोपाल सहित कई जिलों में नगर निगम, गौशालाओं और स्वयंसेवी संस्थाओं द्वारा गोकाष्ठ तैयार किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह पहल न केवल पर्यावरण के लिए उपयोगी है, बल्कि इससे गौशालाओं और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
सरकार का मानना है कि त्योहारों के माध्यम से जनजागरूकता बढ़ाना अधिक प्रभावी होता है।
सरकारी कार्यक्रमों में उन संस्थाओं और समूहों को सम्मानित करने की भी योजना है, जो बड़े पैमाने पर गोकाष्ठ बनाकर समाज में इसका प्रचार कर रहे हैं। जनसंपर्क विभाग के अनुसार, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने ऐसे प्रयासों को समाज के लिए प्रेरणादायक बताते हुए कहा कि होली जैसे त्योहारों को भारतीय संस्कृति, पर्यावरण और गौ-संरक्षण से जोड़ना समय की आवश्यकता है।
इस पहल से युवाओं और शहरी परिवारों को भी परंपरा और प्रकृति के बीच संतुलन का संदेश दिया जा रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार, गोकाष्ठ के उपयोग से कार्बन उत्सर्जन में कमी आती है और होलिका दहन के बाद बची राख का उपयोग खेतों में जैविक खाद के रूप में किया जा सकता है। इसके अलावा इससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर भी बढ़ते हैं। भोपाल में कई स्थानों पर गोकाष्ठ से होलिका दहन के लिए सामूहिक आयोजन किए जा रहे हैं, जहां लोगों को इसके लाभों के बारे में जागरूक किया जा रहा है।
यह अभियान पर्यावरण, स्वास्थ्य और सामाजिक अर्थव्यवस्था तीनों को लाभ पहुंचाने वाला बताया जा रहा है l
