भोपाल में नगर-नगर आयोजित हुए हिंदू सम्मेलन, सामाजिक एकता और सनातन मूल्यों का दिया संदेश:
संवाददाता
19 January 2026
अपडेटेड: 1:48 PM 0thGMT+0530
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में 18 जनवरी, रविवार को राजधानी भोपाल में नगर-नगर *सकल हिंदू समाज* के तत्वावधान में हिंदू सम्मेलनों का आयोजन किया गया। इन आयोजनों का उद्देश्य समाज में जागरण, समरसता, सांस्कृतिक चेतना और संगठित हिंदू समाज की भावना को और अधिक सुदृढ़ करना रहा।
*विभिन्न क्षेत्रों में हुए आयोजन**
भोपाल के तात्या टोपे नगर, अरेरा कॉलोनी, कोलार, बैरागढ़, गोविंदपुरा, नीलबड़, करोंद एवं आसपास के क्षेत्रों में अलग-अलग स्थानों पर हिंदू सम्मेलन आयोजित किए गए। प्रत्येक स्थान पर स्थानीय नागरिकों, मातृशक्ति, युवाओं और वरिष्ठजनों की उल्लेखनीय उपस्थिति देखने को मिली।
*कार्यक्रम की शुरुआत धार्मिक अनुष्ठानों से*
अधिकांश सम्मेलनों की शुरुआत हवन, भारत माता की आरती एवं दीप प्रज्वलन के साथ हुई। इसके पश्चात पंच परिवर्तन और सनातन संस्कृति के जयघोष के साथ कार्यक्रम को आगे बढ़ाया गया। आयोजकों ने बताया कि पंच परिवर्तन के माध्यम से समाज में *सामाजिक समरसता, कुटुंब प्रबोधन, नागरिक कर्तव्य , पर्यावरण संरक्षण और स्वदेशी जीवन शैली* जैसे विषयों पर जनजागरण किया गया।
*वक्ताओं ने दिया संगठित समाज का संदेश*
सम्मेलनों को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि
“संगठित हिंदू समाज ही सशक्त भारत की आधारशिला है।”
उन्होंने सामाजिक भेदभाव को समाप्त कर आपसी सहयोग, सांस्कृतिक गौरव और राष्ट्रहित में एकजुट होने का आह्वान किया। वक्ताओं ने युवाओं से समाज सेवा, संस्कार और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आग्रह किया।
*मातृशक्ति और युवाओं की रही विशेष भागीदारी*
भोपाल के विभिन्न सम्मेलनों में मातृशक्ति और युवा वर्ग की सहभागिता विशेष रूप से देखने को मिली। महिलाओं ने सनातन परंपराओं, पारिवारिक मूल्यों और सामाजिक संतुलन की भूमिका पर अपने विचार रखे, वहीं युवाओं ने समाज को संगठित रखने और सकारात्मक दिशा देने का संकल्प लिया।
*सामाजिक समरसता पर दिया गया जोर*
आयोजनों के दौरान वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि हिंदू सम्मेलन किसी एक वर्ग के लिए नहीं, बल्कि समूचे समाज को जोड़ने और समरसता स्थापित करने का माध्यम हैं। सभी वर्गों, जातियों और समुदायों को साथ लेकर चलना ही इन सम्मेलनों का मूल उद्देश्य है l
सभी कार्यक्रम शांतिपूर्ण, अनुशासित और गरिमामय वातावरण में संपन्न हुए। स्थानीय प्रशासन और स्वयंसेवकों के सहयोग से व्यवस्थाएं सुचारू रूप से संचालित की गईं।
इन आयोजनों के माध्यम से सनातन संस्कृति के मूल्यों को जन-जन तक पहुँचाने का सफल प्रयास किया गया, जिसे नागरिकों ने उत्साहपूर्वक समर्थन दिया।