भोपाल में ‘बड़ा तालाब’ बचाने की जंग: सैर सपाटा के पास बुलडोजर ने ढहाईं 9 दुकानें, एनजीटी के निशाने पर 347 निर्माण

khabar pradhan

संवाददाता

7 April 2026

अपडेटेड: 3:51 PM 0thGMT+0530

भोपाल में ‘बड़ा तालाब’ बचाने की जंग: सैर सपाटा के पास बुलडोजर ने ढहाईं 9 दुकानें, एनजीटी के निशाने पर 347 निर्माण

7 अप्रैल 2026
भोपाल:

झीलों की नगरी भोपाल के अस्तित्व यानी ‘बड़े तालाब’ को बचाने के लिए प्रशासन ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। सोमवार सुबह भदभदा चौराहे से सैर सपाटा के बीच अतिक्रमण पर नगर निगम और जिला प्रशासन का बुलडोजर जमकर गरजा। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के आदेश के बाद, तालाब के 50 मीटर के दायरे में आने वाले अवैध निर्माणों को जमींदोज किया जा रहा है।

पहले दिन की कार्रवाई: 9 दुकानें ध्वस्त
सोमवार सुबह करीब 9 बजे प्रशासन की टीम भारी पुलिस बल और जेसीबी मशीनों के साथ भदभदा के पास सैर सपाटा पहुंची। यहाँ तालाब के ‘फुल टैंक लेवल’ के बेहद करीब बनी 9 दुकानों को बुलडोजर से तोड़ दिया गया। हालांकि, दुकानदारों ने यह कहते हुए विरोध जताया कि वे सालों से यहाँ काबिज हैं, लेकिन प्रशासन ने एनजीटी के नियमों का हवाला देते हुए कार्रवाई जारी रखी।

21 अप्रैल तक का मास्टर प्लान: कहाँ-कब चलेगा बुलडोजर?
कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह के निर्देश पर 21 अप्रैल तक का पूरा शेड्यूल तैयार कर लिया गया है। प्रशासन की लिस्ट में कुल 347 अवैध निर्माण हैं।
आने वाले दिनों का शेड्यूल:
10 अप्रैल: हलालपुरा क्षेत्र
11 अप्रैल: बैरागढ़ (काशियाना बंगले के पीछे का हिस्सा)
12-13 अप्रैल: सेवनिया गौड़
15-16 अप्रैल: बैरागढ़ (मकान और मैरिज गार्डन)
17-19 अप्रैल: हुजूर तहसील और टीटी नगर (भदभदा)
20-21 अप्रैल: बैरागढ़ के शेष हिस्से और अंतिम चरण की कार्रवाई

निगम  भदभदा रोड, TT नगर क्षेत्र, खानू गांव, कोहेफिजा, बैरागढ़ और हलालपुर में सर्वे करने के बाद कुल 347 अतिक्रमण चिह्नित कर चुका है l निगम आयुक्त संस्कृति जैन ने बताया कि इन सभी को खुद अतिक्रमण हटाने के लिए पहले भी नोटिस दे चुके हैं, कि वे खुद से  अतिक्रमण हटा ले, लेकिन किसी ने भी इसे गंभीरता से नहीं लियाl

बड़े रसूखदारों पर भी गिरेगी गाज?
कार्रवाई के दौरान स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि प्रशासन केवल छोटी दुकानों को हटा रहा है, जबकि तालाब के किनारे कई बड़े होटल और रसूखदारों के आलीशान भवन भी एनजीटी के नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं। हालांकि, नगर निगम अधिकारियों का कहना है कि सर्वे में चिन्हित सभी 347 निर्माणों को हटाया जाएगा, चाहे वो किसी के भी हों।

बड़े तालाब के कैचमेंट एरिया में निर्माण होने से बारिश के पानी का प्राकृतिक प्रवाह रुक गया है। इससे न केवल तालाब का जलस्तर प्रभावित हो रहा है, बल्कि शहर के पर्यावरण पर भी बुरा असर पड़ रहा है। एनजीटी की जांच में पाया गया कि कई स्थानों पर तालाब की सीमा के भीतर बाउंड्री वॉल और पक्के निर्माण कर लिए गए हैं, जिन्हें हटाना अब अनिवार्य है।

कौशलेंद्र विक्रम सिंह, कलेक्टर भोपाल का कहना है कि “एनजीटी के निर्देशों का सख्ती से पालन किया जा रहा है। हमारा मकसद बड़े तालाब को अतिक्रमण मुक्त कर उसे संरक्षित करना है ताकि शहर का प्राकृतिक संतुलन बना रहे।”

प्रशासन की इस मुहिम से तालाब का स्वरूप तो सुधरेगा, लेकिन कई परिवारों के रोजगार पर भी संकट खड़ा हो गया है।

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