मध्य प्रदेश में ओबीसी आरक्षण का फैसला हाई कोर्ट की स्पेशल बेंच करे -सुप्रीम कोर्ट:

khabar pradhan

संवाददाता

21 February 2026

अपडेटेड: 9:46 PM 0stGMT+0530

मध्य प्रदेश में ओबीसी आरक्षण का फैसला हाई कोर्ट की स्पेशल बेंच करे -सुप्रीम कोर्ट:

मध्य प्रदेश में ओबीसी आरक्षण 14 प्रतिशत से बढ़कर 27 प्रतिशत करने का विवाद का फैसला हाई कोर्ट करें – सुप्रीम कोर्ट:
मध्य प्रदेश में ओबीसी आरक्षण 14% से बढ़कर 27 प्रतिशत करने के विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने सभी लंबित मामलों को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट को वापस भेज दिया है । जस्टिस पी नरसिंहा और जस्टिस आलोक आराधे
की पीठ ने इस मामले से जुड़ी अपील विशेष अनुमति याचिकाएं और हाई कोर्ट से ट्रांसफर हुए सभी केसों पर अब हाई कोर्ट को ही सुनवाई करने के निर्देश जारी किए हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस से कहा है कि आरक्षण मामले की गंभीरता को देखते हुए एक स्पेशल बेंच गठित की जाए और यह बेंच 3 माह के भीतर सभी विवादों का अंतिम निपटारा करें। सुप्रीम कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि आरक्षण नीति की वैधता की जांच संबंधित राज्य की सामाजिक संरचना के आधार पर होनी चाहिए और इसके लिए हाई कोर्ट ही उपयुक्त मंच है।  सुप्रीम कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि उसने मामले के गुण दोष मेरिट पर कोई टिप्पणी नहीं की है।  कोर्ट ने यह अधिकार मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की विशेष पीठ को दिया है और वह विभिन्न पक्षों द्वारा दायर अंतरिम आवेदनों पर सुनवाई करके निर्णय यानि भर्ती प्रक्रियाओं पर लगी रोक हटेगी या नहीं।  इसका फैसला अब हाई कोर्ट की नई स्पेशल बेंच करेगी।

कोर्ट ने कहा राज्य की सामाजिक संरचना पर हाईकोर्ट ही करें परीक्षण :

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आरक्षण नीति राज्य की सामाजिक और जनसांख्यिकीय परिस्थितियों पर आधारित होती है।  इसलिए छत्तीसगढ़ की स्थिति मध्य प्रदेश के लिए बाध्यकारी नहीं हो सकती।  बिना हाई कोर्ट के अंतिम निर्णय के सीधे अनुच्छेद 32 के तहत सुप्रीम कोर्ट में परीक्षण उचित नहीं है।

आईए जानें अभी कहां कितना प्रतिशत है आरक्षण।

श्रेणी—    मध्य प्रदेश    छत्तीसगढ़
SC–           20%        32%
ST             16%        13%
OBC         27%        27%
EWS          10%         4%
कुल आरक्षण 73%        76%

मुख्य विवाद क्या है :

यह विवाद 2019 में कमलनाथ सरकार के उस अध्यादेश और संशोधन अधिनियम से शुरू हुआ, जिसमें ओबीसी आरक्षण 14% से बढ़कर 27% कर दिया गया था।  हाईकोर्ट ने इस बढ़ोतरी पर अंतरिम रोक लगा दी।  जिससे प्रदेश की कई भर्ती प्रक्रियाएं प्रभावित हुई। राज्य सरकार ने यह तर्क दिया कि कर्मचारियों की कमी से प्रशासनिक कामकाज प्रभावित है और छत्तीसगढ़ की तर्ज पर नियुक्तियों को अनुमति दी जाना चाहिए।

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