मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने सरकारी डॉक्टरों को दी बड़ी राहत: PG के बाद बांड जरूरी नहीं:
संवाददाता
14 January 2026
अपडेटेड: 4:52 PM 0thGMT+0530
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने सरकारी अस्पताल में कार्यरत सरकारी डॉक्टरों को बड़ी राहत देते हुए कहा कि डॉक्टर को पोस्ट ग्रेजुएशन पूरा करने के बाद उन्हें ग्रामीण सेवा के लिए अलग से बॉन्ड भरने की जरूरत नहीं है। कोर्ट ने यह भी कहा कि यह शर्त नये अभ्यर्थियों पर लागू होती है ना कि सरकार की सेवा में कार्यरत डॉक्टरों पर।
जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की खंडपीठ ने सरकारी डॉक्टर से संबंधित यह फैसला सुनाया। कोर्ट ने मध्य प्रदेश स्वायत्त मेडिकल और दांत स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम प्रवेश नियम 2017 की व्याख्या करते हुए कहा कि यह नियम 11 के तहत बांड की बाध्यता केवल नए उम्मीदवारों तक ही सीमित है। यह आदेश डॉक्टर दीपाली बेरवा की याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया गया। याचिकाकर्ता ने मांग की थी कि उन्हें ग्रामीण सेवा बांड से मुक्त करें और मूल शैक्षणिक दस्तावेज लौटाएं जाए।
ग्रामीण सेवा बांड क्या है?
मेडिकल की पढ़ाई और मेडिकल में पीजी करने के बाद डॉक्टर को 1 वर्ष ग्रामीण क्षेत्र में सेवा करना अनिवार्य है। ऐसा न करने पर बांड की राशि चुकानी पड़ती है । मध्य प्रदेश में यह राशि 10 से 30 लाख रुपए है, जो कोर्स और नियमों के अनुसार तय की जाती है।