महाकुंभ हादसे को लेकर हाईकोर्ट ने जारी किये दिशानिर्देश

khabar pradhan

संवाददाता

25 February 2025

अपडेटेड: 6:28 AM 0thGMT+0530

महाकुंभ हादसे को लेकर हाईकोर्ट ने जारी किये दिशानिर्देश

न्यायिक आयोग को दिए जांच के आदेश

प्रयागराज l इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सरकार के आश्वाशन पर महाकुंभ क्षेत्र में अमावस्या के दिन हुई मौतों और लापता लोगों का पता लगाने की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग वाली जनहित याचिका निस्तारित कर दी गयी।

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सरकार के आश्वाशन पर महाकुंभ क्षेत्र में अमावस्या के दिन हुई महाकुंभ हादसों में हुई मौतों और लापता लोगों का पता लगाने की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग वाली जनहित याचिका निस्तारित कर दी गयी। सरकार ने कोर्ट को बताया है कि न्यायिक आयोग के जांच का दायरा भी बढ़ा दिया गया है। अब वह तीनों भगदड़ों में हुए जानमाल की हानि का भी पता जल्द लगाएगी।

यह आदेश मुख्य न्यायधीश अरुण भंसाली और न्यायमूर्ति शैलेन्द्र क्षितिज की अदालत ने ही हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व महासचिव सुरेश चंद्र पांडे की ओर से दाखिल जनहित याचिका पर भी दिया है। पिछली सुनवाई पर ही याची के अधिवक्ता सौरभ पांडेय ने कोर्ट ने मीडिया रिपोर्ट और अमावस्या पर तीन जगह हुई भगदड़ के प्रमाण स्वरूप वीडियो फुटेज की पैन ड्राइव दाखिल भी की थी। दावा किया था कि अमावस्या के दिन ही एक नहीं तीन जगह हादसा भी हुआ था।

खोया पाया केंद्र से लापता लोगों के परिजनों से लापता लोगों का आधार कार्ड भी मांगा जा रहा था। न होने पर ही उनके नामों की घोषणा नहीं की जा रही थी। इसके अलावा मीडिया रिपोर्ट के हवाले से यह दावा भी किया था कि सरकार हादसे में हुई मौतों की संख्या गलत बताई जा रही है। मौतें सौ से भी ज्यादा हुई थी जबकि सरकार ने केवल 30 मौतों को स्वीकार भी किया था। सरकार और प्रशासन की भूमिका संदिग्ध भी है। लिहाजा, हाईकोर्ट की निगरानी ने मौतों और लापता लोगों की उच्च स्तरीय जांच जनहित में जरूरी भी है।

सरकार की दलील से हाईकोर्ट भी असंतुष्ट
सरकार की ओर से पेश अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल ने जनहित याचिका में उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग को गैर जरूरी भी बताया गया था। कहा था कि सरकार ने जांच के लिए पहले ही न्यायिक आयोग का गठन भी किया है। यह न्यायिक आयोग हादसे का कारण ही और भविष्य में बचाव के उपाय संबधी रिपोर्ट एक माह में पेश भी करेगा। हालांकि, सरकार की ओर से दी गई दलील से कोर्ट असंतुष्ट भी थी। कोर्ट ने आयोग की जांच का दायरा सीमित होने का हवाला देते हुए सरकार से रिपोर्ट तलब भी की थी कि हादसों में हुई मौतों और लापता लोगों का सरकार भी पता कैसे लगाएगी?

सोमवार को सरकार बैकफुट पर भी आई। कोर्ट को बताया गया कि सरकार ने न्यायिक आयोग की जांच का दायरा भी बढ़ा दिया है। अभी तक न्यायिक आयोग संगम क्षेत्र में हुई भगदड़ के कारणों और भविष्य में घटनाओं को रोकने के उपाय सुझाने के लिए काम भी कर रहा न्यायिक आयोग अब मेला क्षेत्र में हुए सभी हादसों की जांच भी करेगा। इस दौरान हुई जानमाल की हानि का भी जल्द पता लगाएगा। कोर्ट ने सरकार के आश्वासन पर जनहित याचिका निस्तारित भी कर दिया।

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