महायुति में सियासी भूचाल: भुजबल की एंट्री से अजित पवार नाराज…

khabar pradhan

संवाददाता

28 May 2025

अपडेटेड: 10:30 AM 0thGMT+0530

महायुति में सियासी भूचाल: भुजबल की एंट्री से अजित पवार नाराज…

महायुति में सियासी भूचाल: भुजबल की एंट्री से अजित पवार नाराज,

शाह से गुप्त मुलाकात ने बढ़ाई हलचल

महाराष्ट्र की सियासत में एक बार फिर तूफान उठ खड़ा हुआ है। महायुति गठबंधन में अंदरूनी खींचतान और सियासी समीकरणों ने नया मोड़ ले लिया है। खबर है कि छगन भुजबल की मंत्रिमंडल में एंट्री ने गठबंधन के एक बड़े नेता अजित पवार को नाराज कर दिया है। इस नाराजगी के बीच अजित पवार ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुंबई में एक गुप्त मुलाकात की, जिसमें करीब 20 मिनट तक चर्चा हुई। इस मुलाकात ने महायुति के भीतर की सियासी रार को और हवा दे दी है। आइए, इस सियासी ड्रामे की पूरी कहानी को करीब से समझते हैं और जानते हैं कि आखिर महायुति में यह लक्ष्मण रेखा क्या है।

भुजबल की वापसी: महायुति में नया ट्विस्ट

छगन भुजबल, जो महाराष्ट्र की राजनीति में एक कद्दावर नेता और एनसीपी (शरद पवार गुट) के पूर्व दिग्गज रहे हैं, हाल ही में महायुति गठबंधन में शामिल हुए हैं। उनकी मंत्रिमंडल में एंट्री की खबर ने गठबंधन के भीतर खलबली मचा दी है। भुजबल, जो अपनी बेबाक बयानबाजी और ओबीसी समुदाय में मजबूत पकड़ के लिए जाने जाते हैं, को मंत्रिमंडल में शामिल करने का फैसला गठबंधन के शीर्ष नेतृत्व ने लिया। लेकिन यह फैसला अजित पवार को रास नहीं आया।

सूत्रों के मुताबिक, अजित पवार इस बात से नाराज हैं कि भुजबल की एंट्री से गठबंधन में सत्ता का संतुलन बिगड़ सकता है। अजित पवार, जो पहले से ही महायुति में अपनी पार्टी (एनसीपी-अजित पवार गुट) की स्थिति को मजबूत करने की कोशिश में हैं, भुजबल की मौजूदगी को अपनी सियासी जमीन पर खतरे के रूप में देख रहे हैं। भुजबल की ओबीसी वोट बैंक पर पकड़ और उनके अनुभव को देखते हुए यह नाराजगी स्वाभाविक लगती है।

अमित शाह से गुप्त मुलाकात: क्या थी चर्चा?

अजित पवार की नाराजगी के बीच उनकी अमित शाह से गुप्त मुलाकात ने सियासी गलियारों में हलचल मचा दी है। यह मुलाकात मुंबई में हुई और करीब 20 मिनट तक चली। सूत्रों का कहना है कि इस मुलाकात में अजित पवार ने भुजबल की मंत्रिमंडल में एंट्री और महायुति के भीतर सत्ता के बंटवारे पर अपनी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि अगर गठबंधन में उनकी पार्टी की भूमिका को कम किया गया, तो वह भविष्य में कड़े कदम उठा सकते हैं।

इस मुलाकात ने कई सवाल खड़े किए हैं। क्या अजित पवार महायुति में अपनी स्थिति को और मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं? क्या वह भुजबल की एंट्री को रोकना चाहते हैं? या फिर यह मुलाकात केवल गठबंधन के भीतर संतुलन बनाए रखने की एक रणनीति थी? सोशल मीडिया पर लोग इसे ‘सियासी ड्रामा’ करार दे रहे हैं, और कुछ यूजर्स ने लिखा है, “अजित पवार की यह मुलाकात महायुति में नई जंग की शुरुआत हो सकती है।”

महायुति में लक्ष्मण रेखा: सत्ता का नया समीकरण

महायुति गठबंधन, जिसमें बीजेपी, शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट) और एनसीपी (अजित पवार गुट) शामिल हैं, हमेशा से सत्ता के बंटवारे को लेकर चर्चा में रहा है। भुजबल की एंट्री ने इस गठबंधन में एक नई लक्ष्मण रेखा खींच दी है। यह लक्ष्मण रेखा न केवल सत्ता के बंटवारे की है, बल्कि यह गठबंधन के भीतर विभिन्न समुदायों और नेताओं के प्रभाव को भी दर्शाती है।

भुजबल की ओबीसी समुदाय में मजबूत पकड़ को देखते हुए बीजेपी और शिंदे गुट उन्हें मंत्रिमंडल में लाकर इस समुदाय के वोट बैंक को मजबूत करना चाहते हैं। लेकिन अजित पवार को लगता है कि यह उनकी अपनी सियासी जमीन को कमजोर कर सकता है। महाराष्ट्र में ओबीसी और मराठा वोट बैंक हमेशा से सियासत का केंद्र रहे हैं, और इस नए समीकरण ने इन समुदायों के बीच एक नई जंग की आशंका को जन्म दिया है।

सोशल मीडिया पर हलचल: समर्थक और आलोचक आमने-सामने

इस खबर ने सोशल मीडिया पर भी खूब चर्चा बटोरी है। कुछ यूजर्स ने अजित पवार की नाराजगी को ‘सियासी नाटक’ करार दिया, तो कुछ ने भुजबल की एंट्री को महायुति के लिए एक सकारात्मक कदम बताया। एक यूजर ने लिखा, “भुजबल का अनुभव और ओबीसी समुदाय में उनकी पकड़ महायुति को मजबूत करेगी। अजित पवार को इसे स्वीकार करना चाहिए।” वहीं, अजित पवार के समर्थकों ने इसे गठबंधन में उनकी उपेक्षा का प्रतीक बताया। एक अन्य पोस्ट में लिखा गया, “अजित पवार ने महायुति को मजबूत करने के लिए बहुत कुछ किया, लेकिन अब उनकी अनदेखी हो रही है।”

महाराष्ट्र की सियासत: एक नया मोड़

महाराष्ट्र की राजनीति हमेशा से अपने उतार-चढ़ाव और सियासी ड्रामों के लिए जानी जाती है। भुजबल की एंट्री और अजित पवार की नाराजगी ने इस गठबंधन में एक नया मोड़ ला दिया है। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि यह नाराजगी केवल सतही नहीं है, बल्कि यह महायुति के भविष्य को भी प्रभावित कर सकती है। अगर अजित पवार अपनी नाराजगी को और हवा देते हैं, तो यह गठबंधन में दरार डाल सकता है।

वहीं, बीजेपी और शिंदे गुट इस स्थिति को संभालने की कोशिश में हैं। अमित शाह के साथ अजित पवार की मुलाकात को इसी दिशा में एक कदम माना जा रहा है। लेकिन सवाल यह है कि क्या यह मुलाकात गठबंधन में शांति ला पाएगी, या फिर यह सियासी जंग को और भड़काएगी?

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