महाशिवरात्रि पर 500 किन्नरों की घर वापसी, सनातन धर्म में लौटे कई राज्यों से आए लोग
संवाददाता
16 February 2026
अपडेटेड: 4:27 PM 0thGMT+0530
महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर राजधानी भोपाल में एक बड़ा धार्मिक और सामाजिक परिवर्तन देखने को मिला, जब देश के विभिन्न राज्यों से आए करीब 500 से अधिक किन्नरों ने विधि-विधान के साथ सनातन धर्म में घर वापसी की। यह आयोजन धार्मिक परंपराओं और अनुशासन के प्रतीक शंकराचार्य पद की गरिमा के बीच संपन्न हुआ।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में किन्नर समाज के लोगों ने भाग लिया और सनातन धर्म की परंपराओं को अपनाने का संकल्प लिया। आयोजकों के अनुसार यह पहल समाज में सकारात्मक बदलाव का संकेत है और आने वाले समय में और भी लोग इससे जुड़ सकते हैं।
आयोजन के दौरान बताया गया कि बीते कुछ समय में धर्म परिवर्तन और अन्य गतिविधियों को लेकर राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी चिंताएं सामने आई थीं, लेकिन अब जब बड़ी संख्या में लोग वापस सनातन परंपरा की ओर लौट रहे हैं, तो इसे शुभ संकेत माना जा रहा है।
शंकराचार्य पद पर किसी तरह का हस्तक्षेप नहीं
कार्यक्रम में पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया कि शंकराचार्य की मर्यादा अखंड है और इसमें किसी प्रकार का हस्तक्षेप या हस्तांतरण नहीं किया जा सकता। अखाड़ा परिषद के आचार्य महामंडलेश्वर डॉ. प्रो. लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ने कहा कि शंकराचार्य पद परंपरा और अनुशासन का प्रतीक है।
उन्होंने बताया कि शंकराचार्य का पद केवल उसी संन्यासी को प्राप्त हो सकता है, जो निर्धारित संन्यास परंपरा में विधिवत दीक्षित हो और वेद-वेांत में पारंगत हो। शंकराचार्य भगवान द्वारा स्थापित चारों पीठों की व्यवस्था अत्यंत विशिष्ट और अनुशासित मानी जाती है।

लाल शादी हॉल में हुआ आयोजन
यह कार्यक्रम राजधानी के जहांगीराबाद स्थित लाल शादी हॉल में आयोजित किया गया, जहां बड़ी संख्या में किन्नर समाज के लोग शामिल हुए। कार्यक्रम के दौरान पत्रकारों से चर्चा करते हुए आयोजकों ने कहा कि वर्तमान चारों शंकराचार्यों की आध्यात्मिक अधिसत्ता को किन्नर समाज पूर्ण श्रद्धा के साथ स्वीकार करता है।
उन्होंने यह भी कहा कि यही सनातन धर्म की स्थापित और शास्त्रसम्मत व्यवस्था है, जिसका संरक्षण हर सनातनी का कर्तव्य है।
देशभर से पहुंचे किन्नर समाज के लोग

कार्यक्रम में देश के अलग-अलग राज्यों से आए किन्नरों ने भाग लिया। आयोजन समिति ने जानकारी दी कि कुल मिलाकर लगभग 500 किन्नरों ने घर वापसी की है। इस आयोजन को सनातन परंपरा की ओर लौटने वाली एक बड़ी पहल माना जा रहा है।
महाशिवरात्रि जैसे पावन पर्व पर हुए इस आयोजन ने समाज में नई चर्चा को जन्म दिया है और इसे धार्मिक जागरूकता तथा सनातन परंपरा के विस्तार के रूप में देखा जा रहा है l
