महाशिवरात्रि 2026:
आईए जानें पूजा का शुभ मुहूर्त और सही पूजा विधि:

khabar pradhan

संवाददाता

14 February 2026

अपडेटेड: 5:03 PM 0thGMT+0530

महाशिवरात्रि 2026:<br>आईए जानें पूजा का शुभ मुहूर्त और सही पूजा विधि:



महाशिवरात्रि: आस्था, साधना और शिव भक्ति का महापर्व:

महाशिवरात्रि हिंदू धर्म का एक अत्यंत पवित्र और महत्वपूर्ण पर्व है, जो भगवान शिव को समर्पित होता है। यह पर्व फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है। महाशिवरात्रि का अर्थ है ‘शिव की महान रात्रि’। इस दिन भक्त उपवास रखते हैं, शिवलिंग की पूजा करते हैं और रातभर जागरण कर भगवान शिव की आराधना करते हैं।

महाशिवरात्रि केवल एक पर्व नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, साधना और आध्यात्मिक जागरण का प्रतीक है। शिव भक्तों के लिए यह दिन विशेष पुण्यदायी माना जाता है। ऐसा विश्वास है कि इस रात भगवान शिव की पूजा करने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं, मन को शांति मिलती है और शिव कृपा प्राप्त होती है।

महाशिवरात्रि 2026 की तिथि और शुभ समय:
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महाशिवरात्रि 2026 इस बार 15 फरवरी 2026 (रविवार) को मनाई जाएगी।
चतुर्दशी तिथि 15 फरवरी की शाम से शुरू होकर 16 फरवरी की शाम तक रहेगी। इसलिए रात्रि पूजा और जागरण का विशेष महत्व है।

शिव पूजा के लिए रात्रि के चार प्रहर:
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पहला प्रहर: 15 फरवरी शाम 6:11 से 9:23 तक
दूसरा प्रहर: 15 फरवरी रात 9:23 से 12:35 तक
तीसरा प्रहर: 16 फरवरी रात 12:35 से 3:47 तक
चौथा प्रहर: 16 फरवरी सुबह 3:47 से 6:59 तक

इन प्रहरों में शिवलिंग का अभिषेक और मंत्र जाप करना अत्यंत फलदायी माना जाता है।

महाशिवरात्रि का धार्मिक महत्व:
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महाशिवरात्रि के पीछे कई धार्मिक मान्यताएं जुड़ी हुई हैं। सबसे प्रसिद्ध मान्यता यह है कि इसी दिन भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह संपन्न हुआ था। इसलिए यह पर्व शिव-शक्ति के मिलन का प्रतीक भी माना जाता है।

एक अन्य कथा के अनुसार समुद्र मंथन के दौरान जब हलाहल विष निकला, तब भगवान शिव ने संसार की रक्षा के लिए उस विष का पान किया। इस कारण शिव को नीलकंठ भी कहा जाता है।

महाशिवरात्रि यह संदेश देती है कि शिव केवल संहार के देव नहीं हैं, बल्कि वे जीवन में परिवर्तन, संतुलन और पुनर्निर्माण के देवता हैं।

शिवलिंग पूजा का महत्व:
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महाशिवरात्रि पर शिवलिंग की पूजा का विशेष महत्व होता है। शिवलिंग को ब्रह्मांडीय ऊर्जा और शिव तत्व का प्रतीक माना गया है। इस दिन शिवलिंग पर जल और दूध अर्पित करने से मन की अशांति दूर होती है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

शिव पूजा में निम्न वस्तुएं विशेष रूप से अर्पित की जाती हैं:

जल और गंगाजल
दूध, दही, घी, शहद (पंचामृत)
बेलपत्र
धतूरा और भस्म
सफेद पुष्प और फल

भक्त ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप करते हैं, जो शिव भक्ति का सबसे सरल और प्रभावशाली मंत्र माना जाता है।

महाशिवरात्रि व्रत और जागरण:
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महाशिवरात्रि के दिन व्रत रखने की परंपरा अत्यंत प्राचीन है। भक्त दिनभर उपवास रखते हैं और फलाहार करते हैं। माना जाता है कि इस दिन व्रत रखने से आत्मसंयम बढ़ता है और जीवन में शुभता आती है।

रात्रि जागरण का भी विशेष महत्व है। भक्त पूरी रात भजन-कीर्तन, मंत्र जाप और ध्यान करते हैं। यह रात्रि आत्मचिंतन और साधना की रात्रि मानी जाती है।
महाशिवरात्रि का पर्व हमें यह सिखाता है कि जीवन में केवल बाहरी पूजा ही नहीं, बल्कि भीतर की साधना भी आवश्यक है।

महाशिवरात्रि पर भारत के प्रमुख शिव मंदिरों में आयोजन

महाशिवरात्रि के अवसर पर देशभर के शिव मंदिरों में भव्य आयोजन होते हैं। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ मंदिरों में उमड़ती है और विशेष पूजा-अर्चना की जाती है।

महाकालेश्वर मंदिर, उज्जैन (मध्य प्रदेश)

उज्जैन स्थित महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग भारत के सबसे प्रसिद्ध शिव मंदिरों में से एक है। महाशिवरात्रि पर यहां शिव नवरात्रि उत्सव मनाया जाता है। कई दिनों तक विशेष रुद्राभिषेक, भस्म आरती, श्रृंगार और भजन-कीर्तन होते हैं। इस अवसर पर उज्जैन पूरी तरह शिवमय हो जाता है।

काशी विश्वनाथ मंदिर, वाराणसी (उत्तर प्रदेश)

काशी विश्वनाथ धाम में महाशिवरात्रि के दिन विशेष पूजा और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। वाराणसी को शिव की नगरी कहा जाता है और इस दिन यहां भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ता है। मंदिर परिसर में रातभर भक्ति आयोजन चलते हैं।

प्रयागराज संगम स्नान और शिव पूजा

प्रयागराज में महाशिवरात्रि के साथ माघ मेला का समापन भी होता है। इस अवसर पर श्रद्धालु संगम में स्नान कर शिव पूजा करते हैं। यह आयोजन बड़े धार्मिक उत्सव का रूप ले लेता है।

श्रीशैलम मंदिर, दक्षिण भारत

आंध्र प्रदेश स्थित श्रीशैलम मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग में महाशिवरात्रि पर ब्रह्मोत्सव और विशेष रात्रि पूजा होती है। यहां दीप प्रज्वलन, भजन-कीर्तन और भक्तों के लिए विशेष दर्शन की व्यवस्था की जाती है।

अन्य मंदिरों में आयोजन

देश के अन्य प्रमुख शिव मंदिरों जैसे आनंदेश्वर मंदिर (कानपुर), बैद्यनाथ धाम (झारखंड), सोमनाथ मंदिर (गुजरात) सहित कई स्थानों पर विशाल मेले, रात्रि जागरण, सांस्कृतिक कार्यक्रम और विशेष पूजा होती है।

महाशिवरात्रि का आध्यात्मिक संदेश

महाशिवरात्रि केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि यह आत्मजागरण का पर्व है। भगवान शिव ध्यान, वैराग्य और शक्ति के प्रतीक हैं। शिव हमें सिखाते हैं कि जीवन में संतुलन, संयम और आत्मशक्ति का होना आवश्यक है।

आज के तनावपूर्ण और व्यस्त जीवन में महाशिवरात्रि हमें ध्यान, शांति और सकारात्मक ऊर्जा का मार्ग दिखाती है। शिव भक्ति से मन की अशांति दूर होती है और आत्मविश्वास बढ़ता है।

महाशिवरात्रि 2026 का यह पावन पर्व हर भक्त के लिए शिव कृपा प्राप्त करने का विशेष अवसर है। पूजा, व्रत, जागरण और मंत्र जाप के माध्यम से व्यक्ति अपने जीवन में सुख, शांति और सकारात्मकता ला सकता है।

भगवान शिव सभी पर अपनी कृपा बनाए रखें और यह पर्व सभी के जीवन में आनंद, समृद्धि और शांति लेकर आए।

हर हर महादेव!

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