माघ मेला का महत्व:आध्यात्मिक चेतना का पर्व माघ मास

khabar pradhan

संवाददाता

3 January 2026

अपडेटेड: 4:29 PM 0thGMT+0530

माघ मेला का महत्व:आध्यात्मिक चेतना का पर्व माघ मास

मास का प्रारंभ 4 जनवरी से: आध्यात्मिक चेतना का पर्व माघ मास 4 जनवरी से प्रारंभ हो रहा है। जबकि इससे पहले माघ मास की पूर्णिमा 3 जनवरी से शुरू हो रही है। 15 फरवरी तक चलने वाले समाघ मास में श्रद्धालु स्नान दान जप तप के माध्यम से आत्मिक शुद्ध करते हैं। हिंदू धर्म के अनुसार माघ मास को पवित्र माह माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि इस माह में किए गए धार्मिक कर्मों का फल अन्य महीनों की तुलना में कई गुना अधिक होता है। हिंदू धर्म में माघ मास का महत्व: ऐसा माना जाता है कि जब समुद्र मंथन हुआ। तब अमृत की कुछ बंदे प्रयागराज ,हरिद्वार ,उज्जैन और नासिक में गिरी थी । इसलिए इन स्थानों पर स्नान करना पवित्र माना जाता है। माघ मेला कुंभ मेले की तरह ही होता है। यह उसका छोटा रूप होता है जो प्रयागराज में लगता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार इस समय प्रयागराज के संगम का जल अमृत के समान हो जाता है।हिंदू धर्म में जप तप और व्रत के लिए माघ का महीना बहुत ज्यादा महत्व रखता है। हिंदू मान्यताओं के अनुसार इस पवित्र महीने में प्रयागराज के संगम का तट पर कुंभ और माघ मेला लगता है। ऐसा माना जाता है कि इस माह में देवता गण देवलोक से पृथ्वी पर उतरकर आते हैं और संगम के पवित्र जल में स्नान करते हैं। जिससे इन देवताओं की उपस्थिति और आस्थावान लोगों के द्वारा किए जाने वाले जप तप और व्रत के पुण्य प्रताप से यह पूरा क्षेत्र पवित्र हो जाता है । इस साल माघ मास 4 जनवरी 2026 से शुरू होकर 1 फरवरी 2026 तक रहेगा। इन दिनों प्रभु की ,भगवान श्री हरि की साधना के लिए यह माह बहुत ही शुभ और पुण्य फलदाई माना जाता है । भगवान विष्णु के कृपा पाने के लिए लोग संगम तट पर स्नान करने जाते हैं। सबसे मुख्य बात यह है कि इस माघ मास में कई तीज त्योंहार भी पडते हैं । माघ मास में जब सूर्य उत्तरायण होने लगते हैं । उस माघ के महीने में कई बड़े पर्व आते हैं। जैसे सबसे पहले संकट चौथ ,लोहड़ी ,मकर संक्रांति जैसे पर्व आते हैं । इसके बाद मौनी अमावस्या ,गुप्त नवरात्र, बसंत पंचमी और भाग सप्तमी जैसे व्रत पड़ते हैं। इसके साथ शीतल अष्टमी , तिल एकादशी, जया एकादशी पड़ते हैं । और यह माघ का महीना शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा के दिन पूर्ण होता है यह माघ का महीना सर्दियों का अंत और नए मौसम की शुरुआत का समय माना जाता है । जिसे ऋतु परिवर्तन या ऋतु क्रांति भी कहा जाता है । इस दौरान शरीर को आंतरिक शुद्धिकरण की आवश्यकता होती है जिसे माघी स्नान और खान-पान जैसी चीजों से शुद्ध किया जाताहै।माघ मास के प्रमुख पर्व: 6 जनवरी –गौरी चतुर्थी व्रत 14 जनवरी –मकर संक्रांति 14 जनवरी– षटतिला एकादशी 16 जनवरी –प्रदोष व्रत 18 जनवरी –मौनी अमावस्या 23 जनवरी– बसंत पंचमी 25 जनवरी –रथ सप्तमी 26 जनवरी –भीष्म अष्टमी 29 जनवरी जय एकादशी 30 जनवरी– प्रदोष व्रत 1 फरवरी –गणेश जयंती। 15 फरवरी तक चलने वाले इस माघ मास में श्रद्धालु जन स्नान दान और जप तप के माध्यम से आत्मिक शुद्ध करते हैं । पद्म पुराण के अनुसार भगवान श्री हरि व्रत से उतने प्रसन्न नहीं होते, जितने माघ मास के स्नान दान से होते हैं। सकाम भाव से किया गया स्नान सांसारिक इच्छाओं की पूर्ति करता है । जबकि निष्काम भाव से किया गया स्नान मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करता है। घर पर भी कर सकते हैं गंगा स्नान :हर किसी का तीर्थ पर जाना संभव नहीं हो पाता । यदि संगम तट पर जाना संभव ना हो तो श्रद्धालु घर पर ही गंगा स्नान कर सकते हैं । घर पर रात्रि में खुले आकाश के नीचे रखा जल या सूर्य की किरणों से जल से स्नान कर सकते हैं। स्नान के समय गंगा, यमुना और सरस्वती जैसी पवित्र नदियों का स्मरण कर ओम नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जाप करना फलदाई होता है। इसके अलावा शीत निवारण वस्तुएं जैसे गुड ,ऊनी वस्त्र, रजाई का दान ‘माधवः प्रियताम्’ कहकर दान करना चाहिए।

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