मानहानि केस में केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान को मिली राहत

khabar pradhan

संवाददाता

19 March 2025

अपडेटेड: 6:58 PM 0thGMT+0530

नई दिल्ली। जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस राजेश बिंदल की पीठ ने मामले पर सुनवाई 26 मार्च तक भी टाल दी। और तब तक सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से पेश होने में भी छूट दे दी गई।

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान को राहत देते हुए मानहानि मामले में व्यक्तिगत पेशी से छूट भी जारी रखी। दरअसल कांग्रेस सांसद विवेक तन्खा ने शिवराज सिंह चौहान, मध्य प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष वीडी शर्मा और पूर्व मंत्री भूपेंद्र सिंह के खिलाफ मानहानि का मुकदमा भी दायर किया था। तन्खा का भी आरोप है कि राजनीतिक फायदे के लिए उनकी छवि को खराब भी किया गया। तन्खा का भी कहना है कि उन्हें साल 2012 में मध्य प्रदेश पंचायत चुनाव के दौरान अन्य पिछड़ा वर्ग आरक्षण का भी विरोधी बताया गया।

पीठ ने भी दी राहत
जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस राजेश बिंदल की पीठ ने मामले पर सुनवाई 26 मार्च तक भी टाल दी और तब तक सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से पेश होने में भी छूट दे दी गई। शिवराज सिंह चौहान की तरफ से पेश हुए वरिष्ठ वकील महेश जेठमलानी ने कहा है कि तन्खा ने जिस पर आपत्ति भी की है। वह बयान सदन में भी दिया गया था और वह संविधान के अनुच्छेद 194(2) के तहत भी आता है। इससे पहले मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने शिवराज सिंह चौहान के खिलाफ दायर मानहानि के मामले को रद्द करने से इनकार भी कर दिया था। जिसके बाद चौहान ने सुप्रीम कोर्ट में अपील भी की। सुप्रीम कोर्ट ने शिवराज सिंह चौहान समेत तीनों भाजपा नेताओं के खिलाफ जारी वारंट के निष्पादन पर रोक भी लगा दी।

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को राजस्थान सरकार को निर्देश भी दिया है कि सरिस्का टाइगर रिजर्व के नजदीक अवैध खनन रोकने के लिए नोडल अफसर की नियुक्ति भी करें। जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने एक याचिका पर यह आदेश भी पारित किया। याचिका में दावा किया गया है कि अलवर स्थित सरिस्का टाइगर रिजर्व के एक किलोमीटर के इलाके में अवैध खनन भी हो रहा है, जबकि सुप्रीम कोर्ट ने इस पर रोक भी लगाई हुई है। राजस्थान सरकार ने आरोपों से इनकार किया और कहा है कि इसे लेकर लगातार जांच की जाती है।

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