मोदी सरकार में मध्य प्रदेश के अफसरों का दबदबा
संवाददाता
20 April 2025
अपडेटेड: 9:54 AM 0thGMT+0530

चार और अफसरों की सचिव पद पर नियुक्ति, कुल संख्या पहुंची 10
नई दिल्ली: केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार में मध्य प्रदेश (एमपी) कैडर के भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अधिकारियों का प्रभाव लगातार बढ़ रहा है। हाल ही में चार और अफसरों को सचिव के पद पर प्रोन्नति दी गई है, जिसके बाद विभिन्न मंत्रालयों और विभागों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभालने वाले एमपी कैडर के अफसरों की संख्या 10 तक पहुंच गई है। यह उपलब्धि न केवल मध्य प्रदेश के लिए गर्व का विषय है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि एमपी के अफसरों की कार्यकुशलता और प्रशासनिक क्षमता को केंद्र सरकार में विशेष महत्व दिया जा रहा है।
चार नए सचिवों की नियुक्ति
हाल ही में हुई प्रोन्नति में मध्य प्रदेश कैडर के चार वरिष्ठ IAS अधिकारियों को सचिव के पद पर नियुक्त किया गया है। इनमें शामिल हैं:
अजय कुमार सिंह: 1989 बैच के IAS अधिकारी अजय कुमार सिंह को केंद्रीय गृह मंत्रालय में विशेष सचिव के रूप में नियुक्त किया गया है। सिंह ने पहले मध्य प्रदेश में कई महत्वपूर्ण विभागों में अपनी सेवाएं दी हैं और उनकी प्रशासनिक कुशलता को व्यापक रूप से सराहा गया है।
रेखा शर्मा: 1990 बैच की अधिकारी रेखा शर्मा को महिला एवं बाल विकास मंत्रालय में सचिव के रूप में जिम्मेदारी सौंपी गई है। शर्मा ने अपने करियर में सामाजिक क्षेत्र में कई उल्लेखनीय योगदान दिए हैं।
विवेक जोशी: 1989 बैच के विवेक जोशी को वित्त मंत्रालय के तहत वित्तीय सेवाओं के विभाग में सचिव नियुक्त किया गया है। जोशी पहले भी केंद्रभारत सरकार के कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्य कर चुके हैं।
संजय मल्होत्रा: 1990 बैच के संजय मल्होत्रा को राजस्व विभाग में सचिव के रूप में नियुक्त किया गया है। मल्होत्रा ने आर्थिक और वित्तीय मामलों में अपनी विशेषज्ञता के लिए ख्याति प्राप्त की है।
इन नियुक्तियों के साथ, मध्य प्रदेश कैडर के अधिकारियों ने केंद्र सरकार के शीर्ष प्रशासनिक ढांचे में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज की है।
10 अफसरों का मंत्रालयों पर कब्जा
चार नई नियुक्तियों के बाद, अब मध्य प्रदेश कैडर के 10 IAS अधिकारी केंद्र सरकार में सचिव या समकक्ष पदों पर कार्यरत हैं। इनमें पहले से कार्यरत छह अन्य अफसर शामिल हैं, जो विभिन्न मंत्रालयों और विभागों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। इनमें कुछ प्रमुख नाम हैं:
राकेश श्रीवास्तव: केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय में सचिव।
अनुराग जैन: सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय में सचिव।
विवेक अग्रवाल: रक्षा मंत्रालय में विशेष सचिव।
सुधांशु पांडेय: खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय में सचिव।
अमित यादव: शहरी विकास मंत्रालय में सचिव।
राजेश भूषण: पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय में सचिव।
इन अफसरों की नियुक्ति से यह साफ है कि मध्य प्रदेश कैडर के अधिकारियों ने न केवल संख्या के लिहाज से, बल्कि प्रभाव और जिम्मेदारी के मामले में भी केंद्र सरकार में अपनी स्थिति को मजबूत किया है।
क्यों खास है एमपी कैडर?
मध्य प्रदेश कैडर के अधिकारियों का यह उभार कई कारणों से उल्लेखनीय है। विशेषज्ञों का मानना है कि एमपी कैडर के अफसरों की कार्यशैली, जटिल प्रशासनिक चुनौतियों से निपटने की क्षमता और नीति निर्माण में उनकी गहरी समझ ने उन्हें केंद्र सरकार की प्राथमिकता बनाया है। मध्य प्रदेश जैसे राज्य, जहां सामाजिक-आर्थिक विविधता और प्रशासनिक चुनौतियां अधिक हैं, ने इन अधिकारियों को कठिन परिस्थितियों में काम करने का अनुभव प्रदान किया है। इसके अलावा, कई अफसरों ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी अपनी योग्यता साबित की है, जिससे उनकी प्रोन्नति का रास्ता आसान हुआ।
राजनीतिक और प्रशासनिक महत्व
मध्य प्रदेश के अधिकारियों का केंद्र में बढ़ता प्रभाव राज्य के लिए भी महत्वपूर्ण है। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे मध्य प्रदेश को केंद्र सरकार की योजनाओं और नीतियों में अधिक प्रतिनिधित्व मिलेगा। साथ ही, यह राज्य के युवा प्रशासकों के लिए प्रेरणा का स्रोत भी बनेगा। हालांकि, कुछ विश्लेषकों का मानना है कि किसी एक कैडर का इतना प्रभुत्व अन्य राज्यों के अधिकारियों के लिए असंतुलन पैदा कर सकता है।
विपक्ष का नजरिया
विपक्षी दलों, विशेष रूप से कांग्रेस ने इस मुद्दे पर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा, “यह संयोग नहीं है कि मध्य प्रदेश के इतने सारे अधिकारी शीर्ष पदों पर हैं। यह BJP की उस रणनीति का हिस्सा है, जिसमें वह अपने गृह क्षेत्रों को प्रशासनिक रूप से मजबूत करना चाहती है।” हालांकि, BJP ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि नियुक्तियां योग्यता और अनुभव के आधार पर की गई हैं।
आगे की राह
मध्य प्रदेश कैडर के अधिकारियों की यह उपलब्धि निश्चित रूप से उनके व्यक्तिगत कौशल और समर्पण का परिणाम है। केंद्र सरकार में उनकी बढ़ती भागीदारी से न केवल मध्य प्रदेश का मान बढ़ा है, बल्कि यह भी साबित हुआ है कि कठिन परिस्थितियों में काम करने वाले अधिकारी राष्ट्रीय स्तर पर भी उत्कृष्ट प्रदर्शन कर सकते हैं। भविष्य में इन अधिकारियों से अपेक्षा है कि वे अपनी जिम्मेदारियों को निभाते हुए देश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।