रामजी लाल सुमन के बयान ने फिर मचाया बवाल, करणी सेना को दी खुली चुनौती

khabar pradhan

संवाददाता

15 April 2025

अपडेटेड: 1:12 PM 0thGMT+0530

रामजी लाल सुमन का तीखा वार कहा ‘मंदिर के नीचे बौद्ध मठ

समाजवादी पार्टी के राज्यसभा सांसद रामजी लाल सुमन ने आगरा में एक बार फिर अपने तीखे और विवादास्पद बयानों से सियासी तूफान खड़ा कर दिया है। एक सार्वजनिक सभा में सुमन ने करणी सेना, मंदिर-मस्जिद विवाद और सांप्रदायिक बयानबाजी पर जमकर हमला बोला, जिसके बाद बिहार से लेकर उत्तर प्रदेश तक राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। उनके बयानों ने न केवल विपक्षी दलों बल्कि सामाजिक संगठनों को भी निशाने पर लिया, जिससे एक नए विवाद की शुरुआत हो गई है।
करणी सेना को ललकार: “हो जाएंगे दो-दो हाथ”
आगरा में आयोजित एक जनसभा में सुमन ने करणी सेना को “फर्जी” करार देते हुए खुली चुनौती दी। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “हमने तो थल सेना, जल सेना और वायु सेना सुनी थी, ये करणी सेना कहां से आ टपकी? ये सब बीजेपी की बनाई हुई नकली सेनाएं हैं।” सुमन यहीं नहीं रुके, उन्होंने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव का जिक्र करते हुए कहा, “19 अप्रैल को अखिलेश जी आगरा आ रहे हैं। फिर देखते हैं मैदान में कौन टिकता है। करणी सेना आए, होंगे दो-दो हाथ!”
मंदिर-मस्जिद पर भड़काऊ टिप्पणी: “हर मंदिर के नीचे बौद्ध मठ”
सुमन ने मंदिर-मस्जिद विवाद को लेकर भी एक ऐसा बयान दिया, जिसने सबके कान खड़े कर दिए। उन्होंने कहा, “तुम कहते हो कि हर मस्जिद के नीचे मंदिर है। ठीक है, तो फिर हम भी कहेंगे कि हर मंदिर के नीचे बौद्ध मठ है। गड़े मुर्दे उखाड़ने की कोशिश मत करो, वरना इतिहास का हर पन्ना खोल देंगे।” इस बयान को सांप्रदायिक तनाव भड़काने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। सुमन ने सांप्रदायिक बयानबाजी पर निशाना साधते हुए कहा, “अगर तुम कहते हो कि मुसलमानों में बाबर का DNA है, तो पहले ये बताओ कि तुममें किसका DNA है? ये सब समाज को बांटने की साजिश है।”
राणा सांगा विवाद की गूंज
यह पहली बार नहीं है जब रामजी लाल सुमन अपने बयानों से विवादों में घिरे हैं। इससे पहले मार्च 2025 में उन्होंने मेवाड़ के ऐतिहासिक योद्धा राणा सांगा को लेकर विवादित टिप्पणी की थी। सुमन ने राणा सांगा को “समाज को बांटने वाला” करार देते हुए कहा था, “उन्हें वीर कहने से पहले उनके कृत्यों पर गौर करना चाहिए।” इस बयान के बाद करणी सेना और कई राजपूत संगठनों ने आगरा में उनके आवास पर प्रदर्शन किए और पथराव तक किया। सुमन ने उस वक्त भी माफी मांगने से इनकार करते हुए अपने बयान को ऐतिहासिक तथ्य बताया था।
सियासी माहौल में उबाल
सुमन के ताजा बयानों ने बिहार और उत्तर प्रदेश की सियासत को एक बार फिर गर्मा दिया है। करणी सेना ने उनके खिलाफ कड़ा रुख अपनाने का ऐलान किया है, जबकि बीजेपी ने इसे “सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने की कोशिश” करार दिया है। एक बीजेपी नेता ने कहा, “सुमन बार-बार ऐसी बातें कहकर समाज को बांटना चाहते हैं। यह उनकी और समाजवादी पार्टी की हताशा दिखाता है।” दूसरी ओर, समाजवादी पार्टी ने अभी तक सुमन के बयान पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है, लेकिन पार्टी सूत्रों का कहना है कि सुमन का बयान उनकी व्यक्तिगत राय हो सकता है।
क्या होगा आगे?
सियासी जानकारों का मानना है कि सुमन का यह बयान बिहार विधानसभा चुनाव से पहले महागठबंधन की रणनीति का हिस्सा हो सकता है, जिसमें सामाजिक ध्रुवीकरण की कोशिश की जा रही है। दूसरी ओर, करणी सेना ने 19 अप्रैल को अखिलेश यादव के आगरा दौरे के दौरान बड़े प्रदर्शन की चेतावनी दी है। आगरा पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है और संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त बल तैनात किया है।
रामजी लाल सुमन के इस बयान ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि उनकी जुबान से निकला हर शब्द सियासी भूचाल लाने की ताकत रखता है। अब सवाल यह है कि क्या यह बयान महागठबंधन को फायदा पहुंचाएगा या करणी सेना और विपक्ष के निशाने पर समाजवादी पार्टी और कमजोर होगी? आने वाले दिन इसकी तस्वीर साफ करेंगे।

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