लखनऊ का डॉ. रोहित निकला किडनी तस्करी का मास्टरमाइंड, मेरठ से दिल्ली तक फैला है ‘मौत का सौदागरों’ का जाल
संवाददाता
2 April 2026
अपडेटेड: 11:36 AM 0ndGMT+0530
2 अप्रैल 2026
कानपुर/लखनऊ:
उत्तर प्रदेश में अवैध तरीके से अंगों के व्यापार का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। लखनऊ का एक डॉक्टर, रोहित, इस पूरे काले कारोबार का मुख्य सरगना निकला है। पुलिस की जांच में पता चला है कि यह गिरोह न केवल किडनी की खरीद-फरोख्त कर रहा था, बल्कि इसका नेटवर्क मेरठ, नोएडा और दिल्ली जैसे बड़े शहरों तक फैला हुआ है।
कैसे पकड़ा गया ‘डॉक्टर किलर’ और उसका गिरोह?
पुलिस कमिश्नर ने खुलासा किया है कि डॉ. रोहित उर्फ राहुल बेहद शातिर तरीके से काम करता था। वह हर ट्रांसप्लांट के समय नया मोबाइल नंबर इस्तेमाल करता था ताकि पुलिस की नजरों से बचा रह सके। इस रैकेट का खुलासा तब हुआ जब आयुष नाम के एक छात्र ने पुलिस को अपनी आपबीती सुनाई।
बेगूसराय का रहने वाला आयुष, जो देहरादून में MBA का छात्र है, पैसों की तंगी के चलते इस जाल में फंसा। उसे टेलीग्राम ग्रुप के जरिए संपर्क किया गया और किडनी ‘डोनेट’ करने के बदले मोटा कमीशन देने का वादा किया गया।
पुलिस ने कानपुर के कल्याणपुर स्थित आहूजा अस्पताल में छापेमारी की, जहाँ रविवार रात को ही एक महिला (मुजफ्फरनगर निवासी) को किडनी ट्रांसप्लांट की गई थी।
जांच के घेरे में 50 अस्पताल और कई बड़े नाम
इस खुलासे ने चिकित्सा जगत को हिलाकर रख दिया है। फिलहाल पुलिस की रडार पर शहर के 50 अस्पताल हैं, जिनकी भूमिका की जांच की जा रही है।
*डॉ. रोहित के साथ मेरठ और नोएडा के तीन अन्य डॉक्टरों (डॉ. अफजल, डॉ. अनुराग और डॉ. वैभव मुद्गल) की तलाश में पुलिस की तीन टीमें दिल्ली, मेरठ और नोएडा में छापेमारी कर रही हैं।
*आरोपियों के विदेश भागने की आशंका को देखते हुए पुलिस उनके खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी करने की योजना बना रही है।
गिरोह का काम करने का तरीका
टेलीग्राम ग्रुप्स के जरिए जरूरतमंद और गरीब युवाओं को निशाना बनाया जाता था।
डोनर को 20 हजार रुपये तक का कमीशन और मोटी रकम का लालच देकर दिल्ली और कानपुर बुलाया जाता था।
दलाल (जैसे शिवम अग्रवाल) और डॉक्टर मिलकर उन अस्पतालों को चुनते थे जहाँ बिना ज्यादा पूछताछ के सर्जरी की जा सके।
पुलिस ने आहूजा अस्पताल के संचालक डॉ. सुरजीत सिंह आहूजा, उनकी पत्नी प्रीति आहूजा और दलाल शिवम अग्रवाल समेत कई लोगों को हिरासत में लिया है। पुलिस अब इस बात की तहकीकात कर रही है कि डॉ. रोहित अब तक कितने सौदे कर चुका है और इस गैंग में और कितने ‘सफेदपोश’ लोग शामिल हैं।
सोशल मीडिया पर ‘किडनी डोनेशन’ या ‘क्विक मनी’ के विज्ञापनों से बचें। यह एक बड़े अपराध का हिस्सा हो सकते हैं।