लेबनान पर हमले के बाद शांति वार्ता पर संकट, ईरान ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य बंद करने की दी धमकी

khabar pradhan

संवाददाता

10 April 2026

अपडेटेड: 1:03 PM 0thGMT+0530

10 अप्रैल 2026
तेहरान / इस्लामाबाद:
पश्चिम एशिया में हालात एक बार फिर विस्फोटक हो गए हैं। लेबनान की राजधानी बेरूत पर इजरायल के भीषण हमलों के बाद ईरान और अमेरिका के बीच होने वाली शांति वार्ता खटाई में पड़ती दिख रही है। पाकिस्तान में ईरान के राजदूत रजा अमिरी मोघम के एक सोशल मीडिया पोस्ट को हटाने के बाद इस बातचीत पर संदेह और गहरा गया है।
हॉर्मुज पर कब्जे की तैयारी, दुनिया में मचेगा हाहाकार
ईरान ने संकेत दिए हैं कि वह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण व्यापारिक समुद्री रास्ते ‘हॉर्मुज जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) पर अपना पूर्ण नियंत्रण कर सकता है। आपको बता दें कि दुनिया का 20 प्रतिशत तेल इसी रास्ते से होकर गुजरता है। ईरान ने साफ कहा है कि अगर लेबनान पर इजरायली हमले नहीं रुके, तो वह इस रास्ते को पूरी तरह बंद कर देगा। अगर ऐसा हुआ, तो पूरी दुनिया में तेल की कीमतों में भारी आग लग सकती है और वैश्विक अर्थव्यवस्था चरमरा सकती है।
ट्रंप की सीधी चेतावनी: “हमले का अंजाम बुरा होगा”
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस तनाव पर कड़ा रुख अपनाया है। ट्रंप ने ईरान को चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर उसने समझौते की शर्तों का पालन नहीं किया, तो उसे पहले से कहीं ज्यादा घातक हमलों का सामना करना पड़ेगा। ट्रंप के इस बयान ने क्षेत्र में स्थिरता की उम्मीदों को करारा झटका दिया है।
शांति वार्ता से पहले सऊदी और ईरान की गुप्त चर्चा
तनाव के बीच एक अहम कूटनीतिक हलचल भी देखने को मिली है। पाकिस्तान में होने वाली निर्णायक शांति वार्ता से ठीक पहले सऊदी अरब के विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान और ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची के बीच फोन पर लंबी बातचीत हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान अब बातचीत की मेज पर जाने से पहले क्षेत्रीय शक्तियों (सऊदी अरब आदि) के साथ तालमेल बिठाकर अमेरिका पर कूटनीतिक दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है।
क्यों टल सकता है युद्धविराम?
शांति की राह में सबसे बड़ी बाधा लेबनान पर हुए ताज़ा हमले हैं। बुधवार का दिन इस युद्ध का सबसे खूनी दिन साबित हुआ, जिसमें इजरायली हमलों में 250 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई। ईरान का आरोप है कि इजरायल और अमेरिका लगातार युद्धविराम का उल्लंघन कर रहे हैं, जिससे अब बातचीत का कोई ठोस आधार नहीं बचा है।
इस्लामाबाद पर टिकी दुनिया की नजरें
दुनिया भर के देशों की निगाहें अब पाकिस्तान के इस्लामाबाद पर टिकी हैं, जहाँ बंद कमरों और कड़ी सुरक्षा के बीच शांति की एक आखिरी और मुश्किल कोशिश की जानी है। हालांकि, ईरान के भीतर भी इस बात को लेकर आशंका है कि क्या यह वार्ता वास्तव में किसी समाधान तक पहुँचेगी या यह केवल तनाव को कुछ समय के लिए टालने का दिखावा है।
फिलहाल पश्चिम एशिया में अविश्वास की खाई इतनी गहरी हो गई है कि एक छोटी सी चिंगारी भी बड़े विश्व युद्ध का कारण बन सकती है।

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