वक्फ पर सुप्रीम सुनवाई: जानें सुप्रीम कोर्ट में वक्फ कानून पर क्या हुआ…
संवाददाता
20 May 2025
अपडेटेड: 1:31 PM 0thGMT+0530
वक्फ पर सुप्रीम सुनवाई: जानें सुप्रीम कोर्ट में वक्फ कानून पर क्या हुआ:
वक्फ पर सुप्रीम सुनवाई: मंदिर, मस्जिद, चंदे का जिक्र…
वक्फ कानून पर सुनवाई में जानें सुप्रीम कोर्ट में आज क्या-क्या हुआ
केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट से आग्रह किया कि वक्फ (संशोधन) अधिनियम की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर अंतरिम आदेश पारित करने के लिए सुनवाई को तीन चिह्नित मुद्दों तक सीमित रखा जाए.
- मई 20, 2025
- नई दिल्ली:
सुप्रीम कोर्ट, वक्फ (संशोधन) अधिनियम 2025 की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार की सुनवाई पूरी हो गई.
अब बुधवार को इस पर एक बार फिर सुनवाई होगी. CJI बी आर गवई, जस्टिस एजी मसीह और जस्टिस के विनोद के चंद्रन की बेंच ने सुनवाई की. सुनवाई के दौरान तुषार मेहता ने कहा- कि बेंच ने पहले स्टे के लिए तीन मुद्दे उठाए थे । हमने इन तीनों पर जवाब दाखिल किया था। लेकिन अब लिखित दलीलों में और भी मुद्दे शामिल हो गए हैं ।
सिर्फ तीन मुद्दों तक सुनवाई सीमित हो । कपिल सिब्बल ने इसका विरोध किया, सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि शुरुआत में तीन बिंदु ही तय किए गए हैं ।हमने तीन पर जवाब दिए ।लेकिन पक्षकारों ने इन तीन मुद्दों से भी अलग मुद्दों का जिक्र किया है ।
कोर्ट का सिर्फ तीन ही मुद्दों पर फोकस– कोर्ट की सुनवाई की अहम बातें-
मदिंरों की तरह मस्जिदों में 2000-3000 करोड़ चंदे में नहीं आते…
- कपिल सिब्बल ने विरोध करते हुए कहा कि हम तो सभी मुद्दों पर दलील रखेंगे. मदिंरों की तरह मस्जिदों में 2000-3000 करोड़ चंदे में नहीं आते. वे कहते हैं, पिछले अधिनियम में पंजीकरण की आवश्यकता थी और क्योंकि आपने पंजीकरण नहीं कराया- इसे वक्फ नहीं माना जाएगा. कई 100, 200 और 500 साल पहले बनाए गए थे.
- CJI ने कहा कि क्या पंजीकरण की आवश्यकता है? इस पर सिब्बल ने कहा कि यह था, लेकिन पंजीकरण न कराने पर कोई परिणाम नहीं था. CJIने कहा कि आपको A, B, C, D से शुरू करना होगा, क्या पंजीकरण अनिवार्य था?
- कपिल सिब्बल ने फिर कहा कि ‘करेगा’ का इस्तेमाल किया गया था.
- CJI ने पूछा केवल इसलिए कि इसमें ‘करेगा’ का इस्तेमाल किया गया है, यह अनिवार्य नहीं है जब तक कि परिणाम प्रदान न किए जाएं ।
- सिब्बल ने कहा यह परिणाम नहीं था वक्फ की प्रकृति बदल जाएगी- कि इसे वक्फ नहीं माना जाएगा ।
वक्फ बाय यूजर के लिए पंजीकरण आवश्यक नहीं था?- CJI : 2013 में वक्फ के पंजीकरण का प्रावधान था. गैर-अनुपालन के लिए मुतवली को हटाने के अलावा कोई परिणाम नहीं दिया गया था ।
- सिब्बल : वक्फ के पंजीकरण के लिए जिम्मेदार है; वक्फ का चरित्र नहीं बदलेगा. यह, 2025 का अधिनियम चरित्र को बदल देता है.
- सीजेआई : हम इसे रिकॉर्ड पर ले रहे हैं. 2013 के दौरान वक्फ बाय यूजर के लिए पंजीकरण आवश्यक नहीं था? क्या यह स्वीकार्य था?
- सिब्बल : हां, यह स्थापित प्रथा है. वक्फ बाय यूजर को पंजीकृत करने की आवश्यकता नहीं है ।
- CJI: कहा कि 2013 से पहले वक्फ बाय यूजर को पंजीकृत करने की आवश्यकता नहीं थी, हम रिकॉर्ड पर ले रहे हैं ।
केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट से आग्रह किया कि वक्फ (संशोधन) अधिनियम की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर अंतरिम आदेश पारित करने के लिए सुनवाई को तीन चिह्नित मुद्दों तक सीमित रखा जाए । इन मुद्दों में ‘अदालत द्वारा वक्फ, वक्फ बाई यूजर या वक्फ बाई डीड’ घोषित संपत्तियों को गैर-अधिसूचित करने का अधिकार भी शामिल है । भारत के प्रधान न्यायाधीश बी आर गवई और न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ से केंद्र की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने आग्रह किया कि वह पहले की पीठ द्वारा निर्धारित कार्यवाही तक ही सीमित रहें ।