वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में हिस्सा लेने स्मृति ईरानी पहुंची स्वीटजरलैंड:

khabar pradhan

संवाददाता

23 January 2026

अपडेटेड: 4:50 PM 0rdGMT+0530

वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में हिस्सा लेने स्मृति ईरानी पहुंची स्वीटजरलैंड:





वर्ल्ड इकनॉमिक फोरम की चर्चा इस समय भारत में सबसे ज्यादा हो रही है। और ऐसा इसलिए क्योंकि इस फोरम से भारत को अनेकों फायदे हुए हैं। लेकिन इस समय बात करना जरूरी है एक ऐसी राजनीतिक शख्सियत की, जो फिलहाल न तो विधायक हैं, न सांसद और न ही किसी पद पर मंत्री लेकिन इसके बावजूद वैश्विक मंच पर भारत का नाम मजबूती से रख रही है। वे है स्मृति ईरानी ।


क्या स्मृति ईरानी राजनीतिक पटल से गायब है क्या कर रही है:

पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी इन दिनों किस बड़े काम में लगी है। स्मृति ईरानी इन दिनों स्विट्ज़रलैंड के दावोस शहर में हैं जहां वर्ल्ड इकनॉमिक फोरम यानी WEF में वो हिस्सा ले रही हैं। अब खास बात ये है कि दावोस में उनकी मौजूदगी केवल औपचारिक नहीं है, बल्कि उनकी अगुवाई वाले एक गठबंधन ने यहां 20 लाख डॉलर, यानी करीब 18 करोड़ रुपये जुटाए हैं।  ये रकम देशभर में महिलाओं की अगुवाई वाले छोटे उद्योगों और स्टार्टअप्स को मजबूत करने के लिए इस्तेमाल की जाएगी।

स्मृति ईरानी इस समय महिला उद्यमियों के लिए 10 करोड़ डॉलर का फंड तैयार करने की दिशा में काम कर रही हैं‌  इसी उद्देश्य के तहत वो WEF के मंच पर पहुंची हैं और वैश्विक निवेशकों से संवाद कर रही हैं। एक मीडिया एजेंसी के अनुसार स्मृति ईरानी ने बताया कि साल 2024 में उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करने का अवसर मिला था।  उसी दौरान भारतीय उद्योग परिसंघ यानी CII और गेट्स फाउंडेशन की साझेदारी में एक अहम पहल की शुरुआत हुई जिसका नाम है वैश्विक भलाई के लिए गठबंधन स्त्री-पुरुष समता एवं समानता‌
इस पहल में WEF एक नेटवर्क पार्टनर की भूमिका निभा रहा है। इस गठबंधन की संस्थापक और चेयरपर्सन के तौर पर स्मृति ईरानी लगातार दूसरे साल WEF की बैठक में भाग ले रही हैं।‌ उनका कहना है कि दावोस में स्त्री-पुरुष समानता, समान अवसर और न्याय जैसे मुद्दों को इसलिए उठाया गया, जिससे इन्हें सिर्फ सामाजिक नहीं बल्कि आर्थिक दृष्टि से भी मजबूत और व्यावहारिक बनाया जा सके।

अब सवाल उठता है कि आखिर ये गठबंधन करता क्या है…स्मृति ईरानी के मुताबिक, पिछले दो साल में इस गठबंधन ने 21 हजार से ज्यादा अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों से संवाद किया है।  साथ ही ऐसे मॉडल विकसित किए गए हैं, जिन्हें खासतौर पर महिलाओं की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए वैश्विक स्तर पर अपनाया जा सकता है। ये गठबंधन केवल उद्यमिता तक सीमित नहीं है। यह मातृ मृत्यु दर कम करने, महिलाओं के स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा जैसे अहम मुद्दों पर भी सक्रिय रूप से काम कर रहा है।

स्मृति ईरानी ने बताया कि पीएम मोदी का विशेष जोर छोटे कारोबारों, खासकर महिला उद्यमियों को सशक्त बनाने पर है। इसी सोच के चलते स्पार्क नाम का एक महत्वाकांक्षी कार्यक्रम शुरू किया गया है, जिसे देश के करीब 300 शहरों में लागू किया जा रहा है।  इसका लक्ष्य है महिला-स्वामित्व वाले एक लाख छोटे व्यवसायों की मदद करना।
उन्होंने कहा कि इस पहल के लिए पूंजी जुटाने की कोशिश जारी है और 10 करोड़ डॉलर का फंड स्थापित करने की योजना है।  इसी क्रम में उन्होंने बताया कि बीते 48 घंटों में भारत की महिला-नेतृत्व वाली इकाइयों के लिए 20 लाख डॉलर जुटाने में सफलता मिली है।‌ इसके अलावा, ये गठबंधन महिलाओं के हार्मोनल, हड्डी और मस्तिष्क स्वास्थ्य से जुड़े आयुर्वेद आधारित इलाज में 4 करोड़ डॉलर के निवेश का भी मंच बन चुका है।

महिलाओं को विधायिका में आरक्षण देने वाले नए कानून पर स्मृति ईरानी ने इसे ऐतिहासिक कदम बताया और कहा कि यह पुरुषों और महिलाओं दोनों को देश सेवा के लिए समान अवसर देता है तो कुल मिलाकर, भले ही स्मृति ईरानी फिलहाल सत्ता में न हों, लेकिन दावोस में उनकी सक्रियता ये साफ दिखाती है कि वैश्विक मंच पर भारत की महिला शक्ति की आवाज बुलंद हो रही है…

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