विटामिन डी -कैसे समझें शरीर के लिए इसकी संतुलित मात्रा…
संवाददाता
17 May 2025
अपडेटेड: 12:50 PM 0thGMT+0530
विटामिन D-- कम भी बुरा, तो ज्यादा भी बुरा-
VITAMIN D:
ह म भारतीयों की स्कीन डार्क है अतः हमें विटामिन डी की ज्यादा जरूरत होती है। विटामिन-डी वसा में घुलनशील प्रो-हार्मोन का एक समूह है।
ये दो प्रकार के होते हैं।
- विटामिन डी-2 या अर्गोकेलसीफेरोल और
- विटामिन डी-3 या कोलेकेलसीफेरोल।
यह फेट्स में घुलनशील विटामिन है। सूरज की पराबैंगनी किरणें, विटामिन-डी युक्त फूड्स या सप्लीमेंट्स से मिलने वाला विटामिन-डी लीवर में पहुंचता है और रसायन में बदलकर शरीर के अन्य अंगों को मिलता है। यह आंतों से कैल्शियम को सोखकर हड्डियों में पहुंचाता है।
(1)विटामिन-डी कमी क्यों ?
शाकाहारी लोगों में विटामिन-डी की मात्रा कम होती है। इसके विपरीत जो लोग समुद्री इलाके में रहते है और दूना और सेल्मोन मछलियों का सेवन करते हैं, उनमें विटामिन-डी की कमी नहीं होती। हमारे देश की शहरी आबादी में विटामिन डी की कमी का प्रमुख कारण है धूप से दूरी, घरों में सूर्य की रोशनी नहीं पहुंचना, छतरी और सन स्क्रीन का ज्यादा उपयोग, शरीर को पूरी तरह ढंक लेने वाले वस्त्र और मोटापा।
(2)विटामिन डी के स्रोत:
सूरज की किरणें। एक हफ्ते में कम से कम 2-3 बार 5 से 10 मिनट सूरज की किरणों के सम्पर्क में रहना चाहिए। अंडे की जर्दी, मछली के जिगर का तेल, विटामिन डी युक्त फोर्टीफाइड डेयरी उत्पाद और अनाज, मशरूम, सप्लीमेंट्स आदि।
(3)अधिकता भी है खतरा:
विटामिन डी की कमी जहां नुकसान देती है वहीं इसका स्तर अधिक होने पर शरीर के विभिन्न अंगों-जैसे गुर्दो, हृदय, रक्त वाहिकाओं और अन्य स्थानों में पथरी हो सकती है। साथ ही कोलेस्ट्रॉल और रक्तचाप का बढ़ जाना या हृदय संबंधी रोग। इसके साथ ही चक्कर आना, कमजोरी लगना और सिरदर्द आदि भी हो सकता है।
(4)क्या करता है विटामिन-डी:
प्रटामिन-डी का प्रमुख काम है हड्डियों को मजबूती के लए कैल्शियम का स्तर मेन्टेन करना। यह शरीर में फास्फोरस का स्तर भी बनाए रखता है। शरीर को बाहरी संक्रमण से बचाने वाली कोशिकाओं की गतिविधि विधि विटामिन-डी से बढ़ जाती है। रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है तो हम संक्रमण से होने वाले रोगों से बचते हैं। इम्यून सिस्टम को मजबूत करने में भी विटामिन-डी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। मांसपेशियों और नसों की कार्यक्षमता के लिए विटामिन-डी जरूरी है। यह फेफड़ों की कार्यक्षमता बढ़ाता है। दिल को भी चुस्त-दुरुस्त रहने के लिए पर्याप्त मात्रा में विटामिन-डी चाहिए। यह रक्त प्रवाह को भी सुचारू बनाए रखता है। मस्तिष्क के लिए जरूरी है यह विटामिन।
(5)विटामिन-डी की कमी और रोग:
विटामिन-डी की कमी से बच्चों की मांसपेशियों में जकडन और ऐंठन होने लगती है। बच्चों के मुड़े पैरों का प्रमुख कारण है विटामिन-डी की कमी। इसकी कमी के कारण बच्चों का कद नहीं बढ़ता, वे देर से खड़े होते हैं। देर से चलना शुरू करते हैं। उन्हें सांस लेने में कठिनाई होती है और वे बार-बार संक्रमण का शिकार होते हैं। विटामिन-डी की कमी से वयस्कों की हड्डियों और मांसपेशियों में दर्द होता है। उन्हें थकान महसूस होती है। बहुत ज्यादा पसीना खासकर पसीने से सिर भीगने का कारण है विटामिन-डी की कमी। इसकी कमी से मांसपेशियों में फड़फड़ाहट या संकुचन होने लगता है। सीढ़ियां चढ़ने में कठिनाई होने लगती है। सिरदर्द होता है। मस्तिष्क विकार हो जाता है। एकाग्रता में कमी, स्मृति विकार और मनोबल घटने जैसी समस्याएं आने लगती है।