13 अप्रैल 2026
रायसेन:
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने रायसेन में आयोजित राष्ट्रीय कृषि महोत्सव के दौरान देश का पहला ‘कृषि रोडमैप’ जारी कर दिया है। इस योजना की शुरुआत मध्य प्रदेश के सीहोर, देवास, विदिशा और रायसेन जिलों से की जा रही है। इस नए रोडमैप का मुख्य उद्देश्य किसानों को पारंपरिक खेती के साथ-साथ आधुनिक और मुनाफे वाली खेती से जोड़ना है।
गेहूं-धान और सोयाबीन से आगे बढ़ने की तैयारी
कृषि मंत्री ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि अब समय आ गया है कि हम गेहूं, धान और सोयाबीन जैसी पारंपरिक फसलों के दायरे से बाहर निकलें। नए रोडमैप के तहत फल और सब्जियों के उत्पादन पर विशेष जोर दिया जाएगा। टमाटर, प्याज, लहसुन, भिंडी, शिमला मिर्च, अनार, बैंगन, ड्रैगन फ्रूट और एवोकैडो जैसी फसलों को बढ़ावा देकर किसानों की आय बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने कहा कि खेती को ‘वैल्यू एडिशन’ और बाजार की मांग के आधार पर आगे बढ़ाना होगा।
हर ब्लॉक के 10 गांव बनेंगे ‘बीज ग्राम’
एक बड़ी घोषणा करते हुए कृषि मंत्री ने बताया कि प्रत्येक ब्लॉक के कम से कम 10 गांवों को ‘बीज ग्राम’ के रूप में विकसित किया जाएगा। इन गांवों में उच्च गुणवत्ता वाले बीजों का उत्पादन होगा। इस काम में आईसीएआर (ICAR) मदद करेगा और किसानों को ब्रीडर सीड उपलब्ध कराए जाएंगे, ताकि फसल की पैदावार और गुणवत्ता दोनों बेहतर हो सकें।
सीधे प्रयोगशालाओं से जुड़ेंगे किसान
किसानों को वैज्ञानिक सलाह और नई तकनीक से जोड़ने के लिए भोपाल और आसपास के आईसीएआर संस्थानों, कृषि विश्वविद्यालयों और विज्ञान केंद्रों को एक साथ लाया जाएगा। इससे किसानों को सीधे वैज्ञानिकों का मार्गदर्शन मिल सकेगा और वे अपनी समस्याओं का समाधान तुरंत पा सकेंगे।
मशीन बैंक और क्लीन प्लांट सेंटर की सुविधा
किसानों को उन्नत और रोगमुक्त पौधे देने के लिए ‘क्लीन प्लांट सेंटर’ बनाए जा रहे हैं। साथ ही, मध्य प्रदेश में केंद्र और पंचायत स्तर पर ‘मशीन बैंक’ की स्थापना की जाएगी। हर ब्लॉक में ‘कस्टम हायरिंग सेंटर’ भी शुरू होंगे, जिससे छोटे किसानों को सस्ती दरों पर खेती की मशीनें उपलब्ध हो सकेंगी।
शिवराज सिंह चौहान ने स्वीकार किया कि गिरता भूजल स्तर, कमजोर मिट्टी और मूल्य संवर्धन (वैल्यू एडिशन) की कमी खेती के लिए बड़ी चुनौतियां हैं। नया कृषि रोडमैप इन्हीं समस्याओं को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। देश के अन्य जिलों के लिए भी वहां की जलवायु और परिस्थितियों के अनुसार अलग-अलग योजनाएं बनाई जाएंगी। इस कार्यक्रम में कृषि मंत्री के साथ प्रहलाद सिंह पटेल और अन्य कई महत्वपूर्ण नेता भी मौजूद रहे।


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