शिव नवरात्रि के दूसरे और तीसरे दिन दिव्य रूप में सजे महाकाल:
संवाददाता
9 February 2026
अपडेटेड: 11:11 AM 0thGMT+0530
सुख समृद्धि की कामना से महाकाल में पुजारी ने किया रूद्र पाठ:
उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में शिव नवरात्रि पर्व धूमधाम से मनाया जा रहा है।
ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर में शिव नवरात्रि के दूसरे दिन शनिवार को भक्त भगवान के दिव्य रूप के दर्शन कर निहाल हो गए । शिव नवरात्रि के तीसरे दिन रविवार को भंवर भगवान का शेषनाग श्रृंगार किया गया।
छुट्टी का दिन होने से दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं की संख्या भी अधिक है।
मंदिर की पूजन परंपरा शनिवार सुबह 8:00 बजे कोटि तीर्थ कुंड के समीप स्थित भगवान श्री कोटेश्वर महादेव का अभिषेक पूजन किया गया । सुबह 9:30 बजे से गर्भ ग्रह में भगवान महाकाल की पूजा अर्चना का विशेष अनुक्रम शुरू हुआ पुजारी ने राष्ट्र में सुख समृद्धि की कामना से रूद्र पाठ भी किया।
इसके बाद भगवान को केसर चंदन का लेप लगाया गया और जलधारी में अबीर गुलाल कुमकुम हल्दी मेहंदी आदि सामग्री अर्पित की गई।
दोपहर 1:00 बजे भोग आरती और दोपहर 3:00 बजे संध्या पूजा हुई। शाम को 4:00 बजे मंदिर परिसर स्थित मार्बल चबूतरे पर पुणे के कीर्तनकार डॉ अजय अपामार्जने ने नारदीय संकीर्तन से हरि कथा भी सुनाई।
ज्योति महाकालेश्वर में शिव नवरात्रि के दूसरे दिन शनिवार को महाकालेश्वर का स्ट्राभिषेक के बाद केसा चंदन लेपन किया गया। जलाधारी में अबीर, गुलाल, कुमकुम, हल्दी, मेहांती पूजन सामग्री अर्पित को गई। जलइसके पहले कोटितीर्थ कुंड पर सुबह 8 का बजे से गणेश पूजन व कोटेश्वर महादेव का पूजन-अभिषेक आरती के बाद रुद्रपाठ किया गया।
श्री महाकालेश्वर मंदिर के मुख्य बहुपुजारी घनश्याम शर्मा के आचार्यत्व में 11 ब्राह्मणों ने महाकालेश्वर का अभिषेक, एकादश एकादशनी रुद्रपाठ से किया। पूजन का यह क्रम 14 फरवरी तक प्रतिदिन चलेगा। दोपहर 3 बजे संध्या काल पंचामृत पूजन के बाद महाकालेश्वर का श्रृंगार किया गया। संध्या पूजन के बाद महाकालेश्वर को नवीन वस्त्र के साथ मेखला, दुपट्टा, मुकुट मुंड-माला, छत्र आदि से सुसजित कर भांग, चंदन व सूखे मेवे से श्रृंगार किया गया ।
शिवनवरात्रि : दूसरे दिन महाकाल को अर्पित किए 125 किलो जर्दालु:
साथ ही श्री महाकालेश्वर को नागकुंडल एवं फलों की माला के साथ श्रृंगार किया गया। उन्हें 125 किलो जर्दालु (सूखा मेवा) का भोग लगाया गया।
चंदन व भाग श्रृंगार के साथ शेषनाग धारण कर हुआ श्रृंगार:
शिवनवरात्रि के क्रम में रविवार को श्रृंगार कर शेषनाग धारण करवाया। महाकालेश्वर का चंदन व भांग का जाएगा।
शिव नवरात्रि पर्व के तीसरे दिन रविवार को बाबा महाकाल ने अपने भक्तों को माता पार्वती के साथ शेषनाग स्वरूप में दर्शन दिए। आगामी सात दिनों तक बाबा महाकाल विभिन्न स्वरूपों में भक्तों को दर्शन देते रहेंगे
12 ज्योतिर्लिंगों में से एक महाकाल ज्योतिर्लिंग मंदिर में शिव नवरात्रि के दौरान प्रतिदिन भगवान का विशेष श्रृंगार किया जाता है। इस वर्ष शिव नवरात्रि दस दिनों की है, जिसके चलते दो दिन भांग से श्रृंगार कर वस्त्र धारण कराए गए। रविवार को शिव नवरात्रि के तीसरे दिन महाकालेश्वर मंदिर के गर्भगृह में मुख्य पुजारी घनश्याम शर्मा के मार्गदर्शन में 11 ब्राह्मणों ने भगवान महाकाल का पंचामृत पूजन और एकादश-एकादशनी रुद्राभिषेक संपन्न कराया।
अभिषेक के बाद भगवान महाकाल को केसर मिश्रित चंदन का लेप लगाया गया। जलाधारी पर अबीर, गुलाल, कुमकुम, हल्दी और मेहंदी सहित अन्य पूजन सामग्री अर्पित की गई। शाम को बाबा महाकाल का शेषनाग स्वरूप में भव्य श्रृंगार किया गया, जिसमें माता पार्वती को उनके मस्तिष्क पर विराजित किया गया। यह विशेष श्रृंगार क्रम 14 फरवरी तक जारी रहेगा।
शिव कथा में बताया नौ प्रकार की होती है भक्ति:
श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति की ओर से आयोजन शिव कथा, हरि कीर्तन का आयोजन शनिवार शाम 4.30 से 6 बजे तक मंदिर परिसर में नवग्रह मंदिर के पास चबूतरे पर किया गया। आयुर्वेदाचार्य डॉ. अजय अपामार्जन एवं तबला वादन में उनके साथी श्रीधर व्यास ने कहा कि परमात्मा की प्राप्ति का सर्वश्रेष्ठ मार्ग भक्ति है, यह सीख हमें नारद महाराज ने दी है। उन्होंने बताया कि भक्ति नौ प्रकार की होती है, जैसे श्रवण भक्ति, कीर्तन भक्ति, स्मरण भक्ति, पादसेवन भक्ति, अर्चन भक्ति, वंदन भक्ति, दास्य भक्ति, शरण्य भक्ति, आत्मनिवेदन भक्ति आदि नव विद्या भक्ति का विवेचन किया।