संघ ने निकाली सपा की काट..

khabar pradhan

संवाददाता

9 April 2025

अपडेटेड: 1:17 PM 0thGMT+0530

साल 2027 यूपी के लिए बेहद खास है..विधानसभा चुनाव जो होने हैं ऐसे में माना जा रहा है कि 2027 में अखिलेश की पार्टी का बचा कुचा हाल भी बेहाल हो जाएग..क्योंकि यूपी में कई मुद्दे ऐसे उठ रहे हैं जिनका फायदा सीधे तौर पर भाजपा को होगा फिर चाहे वो संभल वाला मामला हो, वक्फ वाला मामला हो या फिर रामजीलालसुमन की राणा सांगा को लेकर टिप्पणी हो..इसी बीच अब एक और मामला सामने आया है जिसमें मोहन भागवत ने इशारों ही इशारों में भाजपा के लिए वोट साधने का काम किया है..आपको बता दें कि वक्फ बिल पारित होने के बाद मुस्लिमों के बीच भाजपा और राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के खिलाफ नाराजगी पहले से ज्यादा बढ़ गई है.. इस बीच, आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने खुद को औरंगजेब का वंशज नहीं मानने वालों का संघ में स्वागत वाली बात कहकर बड़ा ऑफर दिया है..
एक ओर संघ इंडी गठबंधन के पीडीए के जवाब में हिंदुत्व, सनातन और राष्ट्रवाद के नाम पर हिंदुओं की एकजुटता पर ताकत लगा रहा है… दूसरी ओर मुस्लिम वोट बैंक में सेंध लगाने की कोशिश भी तेज कर रहा है…
आईए समझते हैं संघ की संगठन वाली रणनीति दरअसल, संघ प्रमुख मोहन भागवत 4 दिन के प्रवास पर यूपी आए.. इसी दौरान उन्होंने ये दोनों बयान दिए.. वाराणसी में संघ की शाखाओं में शामिल होने के साथ संघ के पदाधिकारियों के साथ बैठक भी की.. जिसमें यूपी में विपक्ष की ओर से जाति के आधार पर पिछड़ों-दलितों को तोड़ने की रणनीति के खिलाफ उन्होंने हिंदुत्व के नाम पर एकजुट करने की योजना की समीक्षा पर ध्यान दिया.. रामनवमी पर भी संघ की ओर से दलित बस्तियों में कन्या पूजन के साथ सामाजिक भोज के आयोजन भी किए गए..
राजनीति के जानकारों का मानना है कि पसमांदा के बाद अब पिछड़े और गरीब मुसलमान भाजपा के एजेंडे में हैं.. ईद से पहले इस वर्ग को मोदी की सौगात बांटी गई..इसके अलावा यही वर्ग मोदी सरकार की ज्यादातर योजनाओं का लाभार्थी भी है.. वक्फ बिल के बाद भाजपा और संघ ये संदेश भी देना चाहते हैं कि ये बिल गरीब और कमजोर मुस्लिमों के पक्ष में है.. अगर इन प्रयासों से भाजपा को दो-तीन फीसदी भी मुस्लिम वोट मिलता है तो उसके लिए फायदेमंद और विपक्ष के लिए नुकसानदायक रहेगा..
यानी संघ प्रमुख ने साफ कर दिया है कि कट्‌टरपंथी मुसलमानों को छोड़कर संघ सभी को साथ लेकर चलने को तैयार है.. वक्फ बिल पास होने से बढ़ी तनातनी के बीच संघ ने गरीब, पिछड़े और वंचित मुसलमानों को साधने की कोशिश भी तेज कर दी है….
लेकिन देखने वाली बात ये होगी कि इतना सब कुछ करने के बाद भी क्या भाजपा को मुसलमानों का साथ मिल पाता है या नहीं…

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