संदिग्ध हालात में जीएमसी छात्रा की मौत की जांच के लिए बनी विशेष टीम
संवाददाता
18 February 2026
अपडेटेड: 3:48 PM 0thGMT+0530
मामले ने छात्रावास सुरक्षा और मानसिक दबाव जैसे मुद्दों पर नई बहस छेड़ दी है।
भोपाल के गांधी मेडिकल कॉलेज की प्रथम वर्ष एमबीबीएस छात्रा रोशनी कलश (19) की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के मामले में पुलिस ने विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया है। छात्रा का शव करीब एक सप्ताह पहले उसके निजी पीजी हॉस्टल के बाथरूम में मिला था, जिसके बाद पूरे मामले को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं।
छात्रा की मौत को लेकर अलग-अलग आशंकाएं, परिवार ने जताया संदेह।
प्रारंभिक जानकारी में इसे आत्महत्या का मामला बताया गया था, लेकिन रोशनी के परिजन और परिचितों ने घटना को संदिग्ध बताते हुए साजिश की आशंका जताई है। उन्होंने उच्च स्तरीय जांच की मांग करते हुए कहा है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए ताकि सच्चाई सामने आ सके।
तीन महिला पुलिस अधिकारियों की टीम करेगी विस्तृत जांच।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, तीन महिला पुलिस अधिकारियों की एसआईटी बनाई गई है, जिसकी अगुवाई एसपी अंकिता खतरकर करेंगी। इस टीम को मामले के सभी पहलुओं की गहराई से जांच करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है, ताकि हर कोण से तथ्य सामने आ सकें।
परिजनों, दोस्तों और हॉस्टल स्टाफ के बयान होंगे दर्ज।
एसआईटी छात्रा के रूममेट, सहपाठियों, परिजनों, पीजी हॉस्टल संचालक और स्टाफ से पूछताछ करेगी। इसके साथ ही छात्रा के मोबाइल फोन, कॉल डिटेल और डिजिटल साक्ष्यों की भी जांच की जाएगी, जिससे घटना से पहले की परिस्थितियों को समझा जा सके।
मोबाइल से मिले संदेशों ने बढ़ाई जांच की दिशा।
प्रारंभिक जांच में छात्रा के मोबाइल से कुछ संदेश मिले हैं, जिनसे शैक्षणिक दबाव और मानसिक तनाव की आशंका जताई जा रही है। हालांकि पुलिस सभी संभावनाओं को ध्यान में रखकर जांच कर रही है और किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले हर तथ्य को परख रही है।
छात्र सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य पर उठे सवाल।
इस घटना के बाद मेडिकल छात्रों के बीच बढ़ते मानसिक दबाव, हॉस्टल निगरानी और परामर्श सुविधाओं को लेकर चर्चा तेज हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि संस्थानों में बेहतर काउंसलिंग और सपोर्ट सिस्टम की व्यवस्था से ऐसी घटनाओं को रोका जा सकता है।