सरकारी नौकरी में अफसर की जाति से जुड़े 232 केस सालों से लंबित, 156 में जांच रिपोर्ट प्राप्त नहीं:

khabar pradhan

संवाददाता

27 March 2026

अपडेटेड: 4:55 PM 0thGMT+0530

27 मार्च 2026 :

मध्य प्रदेश

सरकारी नौकरी में जाति से जुड़े मामले कई सालों से लंबित:

डीएसपी से नायब तहसीलदार तक जांच के घेरे में:

मध्यप्रदेश में सरकारी तंत्र की ‘रीढ़’ कहे जाने वाले बड़े पदों पर फर्जी जाति  प्रमाणपत्रों का साया मंडरा रहा है। प्रदेश की उच्च स्तरीय छानबीन समिति की जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। जिसमें  टीएंडसीपी के जॉइंट डायरेक्टर से लेकर साइबर सेल की उप पुलिस अधीक्षक (डीएसपी) तक के जाति प्रमाणपत्र जांच के दायरे में हैं।

जनजातीय कार्य विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, साल 2020 से अब तक अनुसूचित जनजाति (एसटी) वर्ग के कुल 174 प्रकरणों का निराकरण किया जा चुका है। लेकिन 112 प्रकरण अब भी अटके पड़े हुए हैं।

वहीं अनुसूचित जाति विकास की रिपोर्ट के अनुसार 2020 से अब तक समिति ने 123 प्रकरणों का निराकरण तो किया है, लेकिन 120 मामले आज भी लंबित हैं। 156 से ज्यादा केस केवल पुलिस और कलेक्टर की रिपोर्ट न मिलने से अटके हुए हैं। 10 प्रकरण ऐसे भी सामने आए जिनमें बिना कोई कार्रवाई किए सीधे फाइल बंद कर दी गई और समिति ने उन्हें खत्म मान लिया।

सरकार का तर्क:

समिति हर हफ्ते बैठकें कर रही पर समय सीमा तय नहींहो पा रही।‌ इस मामले को लेकर सरकार ने 1 अगस्त 2025 को सदन में लिखित रूप से जवाब दिया था। सरकार का कहना है कि छानबीन समिति द्वारा त्वरित निराकरण के लिए हर सप्ताह बैठकें आयोजित की जा रही हैं। लेकिन समिति की प्रक्रिया अर्द्धन्यायिक होने के कारण, अंतिम फैसले के लिए कोई निश्चित समय सीमा तय नहीं की जा सकी है।

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