सरकारी नौकरी में महिलाओं की हिस्सेदारी में बढ़ोतरी: रिपोर्ट

khabar pradhan

संवाददाता

23 February 2026

अपडेटेड: 4:11 PM 0rdGMT+0530

सरकारी नौकरी में महिलाओं की हिस्सेदारी में बढ़ोतरी: रिपोर्ट

आर्थिक व सांख्यिकी विभाग की रिपोर्ट विधानसभा में पेश

मध्य प्रदेश में सरकारी सेवाओं में महिलाओं की भागीदारी लगातार बढ़ रही है, जिसने लैंगिक संतुलन की दिशा में नई उम्मीद जगाई है। आर्थिक व सांख्यिकी विभाग की रिपोर्ट के अनुसार पिछले तीन वर्षों में सरकारी नौकरी में महिलाओं का प्रतिशत तेजी से बढ़ा है, जबकि पुरुषों की हिस्सेदारी में गिरावट दर्ज की गई है। यह रिपोर्ट विधानसभा के बजट सत्र में पेश की गई, जिससे महिला सशक्तिकरण की दिशा में राज्य की स्थिति सामने आई है।

तीन साल में बढ़ा महिला प्रतिशत, पुरुषों की हिस्सेदारी घटी।

मार्च 2023 में सरकारी कर्मचारियों में महिलाओं की हिस्सेदारी 27.75 प्रतिशत थी, जो मार्च 2024 में बढ़कर 29.19 प्रतिशत और मार्च 2025 में 30.03 प्रतिशत हो गई। इसी दौरान पुरुष कर्मचारियों का प्रतिशत घटकर 69.94 प्रतिशत रह गया। यह बदलाव बताता है कि भर्ती प्रक्रिया में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

ऊंचे पदों पर भी महिलाओं की उपस्थिति मजबूत, फिर भी असमानता कायम।

रिपोर्ट के अनुसार क्लास-वन, क्लास-टू और क्लास-थ्री श्रेणियों में महिलाओं की संख्या में सुधार हुआ है। अधिकारियों के स्तर पर महिलाओं की हिस्सेदारी 30 प्रतिशत से अधिक पहुंच गई है और कई विभागों में यह 33 प्रतिशत से भी ज्यादा है। हालांकि तृतीय व चतुर्थ श्रेणी में महिलाओं का प्रतिशत अभी भी अपेक्षाकृत कम है, जिससे संतुलन की जरूरत बनी हुई है।

सरकारी नौकरियां घटीं, 2024 की तुलना में 2025 में कमी।

रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि मार्च 2024 से मार्च 2025 के बीच नियमित नियुक्तियों में कमी आई है। एक साल में केवल 282 लोगों को नियमित नौकरी मिली। कुल कर्मचारियों की संख्या 6 लाख 6 हजार 876 से घटकर 6 लाख 7 हजार 158 रही, जिसमें वृद्धि बेहद मामूली रही। वहीं 2021 से 2025 के बीच सार्वजनिक उपक्रमों और स्वायत्त संस्थाओं में 15 हजार नौकरियां कम हुईं।

भोपाल-इंदौर में नियमित कर्मचारी सबसे ज्यादा, शिक्षा विभाग आगे।

आंकड़ों के अनुसार 39.8 प्रतिशत नियमित कर्मचारी केवल 8 जिलों में कार्यरत हैं। इनमें भोपाल में 6.65 प्रतिशत और इंदौर में 4.47 प्रतिशत कर्मचारी हैं। विभागों की बात करें तो स्कूल शिक्षा विभाग में सबसे ज्यादा 37.66 प्रतिशत कर्मचारी कार्यरत हैं, जबकि दूसरे स्थान पर गृह विभाग है, जहां 15.18 प्रतिशत कर्मचारी काम करते हैं। यह संकेत देता है कि शिक्षा और प्रशासनिक सेवाएं रोजगार का बड़ा आधार बनी हुई हैं।

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