साइबर ठगों का नया तरीका, डिजिटल गोल्ड और गिफ्ट कार्ड से ठगी

khabar pradhan

संवाददाता

24 February 2026

अपडेटेड: 12:47 PM 0thGMT+0530

एक ही बैंक शाखा के दो मामलों ने पुलिस को चौंकाया।
उज्जैन में एक ही बैंक शाखा से जुड़े दो साइबर ठगी के मामलों ने पुलिस और बैंकिंग सिस्टम की चिंता बढ़ा दी है। ठगों ने पीड़ितों को पहले झांसे में लेकर उनके खातों को निशाना बनाया और रकम को ऑनलाइन गिफ्ट कार्ड व डिजिटल गोल्ड में बदलकर ट्रेस करना मुश्किल कर दिया।

डिजिटल लेनदेन का गलत इस्तेमाल, नई चुनौती।
दोनों मामलों में ठगों ने मोबाइल हैकिंग, फिशिंग कॉलिंग और तकनीकी तरीकों का इस्तेमाल किया। रकम सीधे निकालने के बजाय डिजिटल गोल्ड और गिफ्ट कार्ड खरीदकर पैसे को ट्रैकिंग से बचाया गया। पुलिस के अनुसार यह तरीका तेजी से बढ़ रहा है और जांच एजेंसियों के लिए नई चुनौती बन रहा है।

पहले केस में किस्तों में निकाले गए हजारों रुपये।
पहले मामले में नीलगंगा क्षेत्र के युवक के खाते से परिवार के सदस्य के नंबर पर ई-चालान के नाम से फर्जी लिंक भेजा गया। लिंक खुलते ही मोबाइल हैक हो गया और 22 से 23 फरवरी के बीच किस्तों में करीब 80 हजार रुपये ट्रांसफर कर डिजिटल गोल्ड खरीदा गया। बाद में खाते को होल्ड कर लिया गया, लेकिन तब तक नुकसान हो चुका था।

दूसरे केस में फोन बंद कर खरीदे गिफ्ट कार्ड।
दूसरे मामले में फिनो एजेंट के मोबाइल पर कॉल कर ठगों ने फोन को ब्लॉक जैसा कर दिया। इस दौरान दूसरे सिम का उपयोग कर ओटीपी हासिल किया गया और करीब 44,900 रुपये के गिफ्ट कार्ड खरीद लिए गए। रकम डिजिटल माध्यम से ट्रांसफर होने के कारण वापस लाना मुश्किल हो गया।

ग्वालियर में रिटायर्ड डॉक्टर से भी करोड़ों की ठगी।
इसी तरह ग्वालियर में एयरफोर्स के रिटायर्ड डॉक्टर को वीडियो कॉल पर कोर्ट और पुलिस का डर दिखाकर 2.52 करोड़ रुपये की ठगी कर ली गई। ठगों ने उन्हें मनी लॉन्ड्रिंग और जांच का डर दिखाया, जिससे वे लंबे समय तक दबाव में रहे और अलग-अलग खातों में रकम ट्रांसफर करते रहे।

पुलिस ने लोगों से सतर्क रहने और अनजान लिंक, कॉल या मैसेज से दूर रहने की अपील की है। विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी संदिग्ध कॉल या तकनीकी समस्या पर तुरंत बैंक और साइबर हेल्पलाइन से संपर्क करना चाहिए, ताकि नुकसान से बचा जा सके।

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