सुप्रीम कोर्ट की कार्रवाई से पहले जस्टिस यशवंत वर्मा का इस्तीफा, घर पर मिले थे जले हुए नोट

khabar pradhan

संवाददाता

11 April 2026

अपडेटेड: 3:37 PM 0thGMT+0530

सुप्रीम कोर्ट की कार्रवाई से पहले जस्टिस यशवंत वर्मा का इस्तीफा, घर पर मिले थे जले हुए नोट

11 अप्रैल 2026

नई दिल्ली:
दिल्ली स्थित सरकारी आवास पर नोटों की गड्डियां मिलने के मामले में घिरे इलाहाबाद हाई कोर्ट के जस्टिस यशवंत वर्मा ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। जस्टिस वर्मा ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को अपना त्यागपत्र भेज दिया है। उनके इस्तीफे के साथ ही संसद में उनके खिलाफ चलने वाली महाभियोग (पद से हटाने) की प्रक्रिया अब बेअसर हो गई है।

क्या है पूरा मामला
यह विवाद पिछले साल मार्च 2025 में शुरू हुआ था। दिल्ली में जस्टिस वर्मा के सरकारी आवास पर 14 और 15 मार्च की दरम्यानी रात को आग लग गई थी। जब आग बुझाई गई, तो स्टोर रूम से भारी मात्रा में 500-500 रुपये के नोटों की जली हुई गड्डियां बरामद हुईं। उस वक्त जस्टिस वर्मा दिल्ली से बाहर थे और सूचना मिलने पर अगले दिन वापस लौटे थे।

जांच में पाए गए दोषी
इस घटना के बाद सुप्रीम कोर्ट ने आरोपों की जांच के लिए तीन हाई कोर्ट जजों की एक कमेटी बनाई थी। मई 2025 में इस कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में जस्टिस वर्मा को कदाचार (गलत व्यवहार) का दोषी पाया और उन्हें पद से हटाने की सिफारिश की। इसके बाद केंद्र सरकार ने उनके खिलाफ महाभियोग की प्रक्रिया शुरू की और अगस्त 2025 में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने जांच के लिए एक और तीन सदस्यीय समिति का गठन किया।

इस्तीफा देने की असली वजह
जानकारों का मानना है कि जस्टिस वर्मा ने महाभियोग की शर्मिंदगी से बचने के लिए यह कदम उठाया है। अगर संसद उन्हें पद से हटाती, तो उनके पेंशन और रिटायरमेंट के बाद मिलने वाले अन्य सरकारी लाभ रुक जाते। अब इस्तीफा देने की वजह से उन्हें ये सभी फायदे मिलते रहेंगे। हालांकि, पद छोड़ने के बाद उन पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों की आपराधिक जांच अब भी शुरू की जा सकती है।

इतिहास में दूसरी बार ऐसी घटना
भारतीय न्यायिक इतिहास में यह दूसरा मौका है जब किसी जज ने महाभियोग की प्रक्रिया के दौरान इस्तीफा दिया है। इससे पहले कलकत्ता हाई कोर्ट के जस्टिस सौमित्र सेन ने साल 2011 में फंड के दुरुपयोग के आरोपों के बाद इसी तरह इस्तीफा दे दिया था।
न्यायपालिका में इस तरह के मामले कम ही देखने को मिलते हैं, लेकिन इस घटना ने एक बार फिर जजों की जवाबदेही पर बहस छेड़ दी है। अब देखना यह होगा कि इस्तीफा स्वीकार होने के बाद जांच एजेंसियां इस मामले में आगे क्या कदम उठाती हैं।

टिप्पणियां (0)