सुप्रीम कोर्ट की नाराजगी: न्यायिक भ्रष्टाचार चैप्टर वाली किताब पर रोक
संवाददाता
26 February 2026
अपडेटेड: 2:49 PM 0thGMT+0530
न्यायपालिका की गरिमा पर टिप्पणी बर्दाश्त नहीं, किताब के विवादित हिस्से पर तुरंत कार्रवाई
सुप्रीम कोर्ट ने सामाजिक विज्ञान की नई पाठ्यपुस्तक में ‘न्यायिक भ्रष्टाचार’ से जुड़े अध्याय को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। मुख्य न्यायाधीश की आपत्ति के बाद राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) की इस पुस्तक की बिक्री पर रोक लगा दी गई है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि न्यायपालिका की छवि को नुकसान पहुंचाने वाली किसी भी सामग्री को स्वीकार नहीं किया जाएगा।
मुख्य न्यायाधीश ने जताई नाराजगी
इस मामले की सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि दुनिया में किसी भी संस्था को बदनाम करने की छूट नहीं दी जा सकती, खासकर न्यायपालिका जैसी संवैधानिक संस्था को। उन्होंने संकेत दिया कि इस प्रकरण की व्यक्तिगत रूप से निगरानी की जाएगी। वरिष्ठ अधिवक्ता ने इस अध्याय को लेकर चिंता जताते हुए कहा कि यह छात्रों में गलत संदेश दे सकता है।
पाठ्यपुस्तक में न्यायिक व्यवस्था पर उठे सवाल
विवाद का केंद्र कक्षा 8 की सामाजिक विज्ञान की पुस्तक है, जिसमें न्यायपालिका से जुड़े भ्रष्टाचार, लंबित मामलों और न्यायाधीशों की कमी जैसे मुद्दों का उल्लेख किया गया था। भ्रष्टाचार संबंधी खंड में बताया गया है कि, न्यायाधीश एक आचार संहिता से बंधे होते हैं l जो न केवल न्यायालय बल्कि न्यायालय के बाहर भी उनके आचरण को नियंत्रित करती है l पुस्तक में गंभीर मामलों में न्यायधीशों को हटाने के संवैधानिक प्रावधान का भी उल्लेख है, कि संसद महाभियोग प्रस्ताव पारित करके न्यायाधीश को पद से हटा सकती है l इस सामग्री को लेकर कोर्ट ने कहा कि ऐसे विषयों को संतुलित और संवेदनशील तरीके से प्रस्तुत किया जाना चाहिए, ताकि संविधान और संस्थाओं के प्रति सम्मान बना रहे।
एनसीईआरटी ने मांगी माफी, संशोधित पाठ्यपुस्तक फिर तैयार होगी
एनसीईआरटी ने अदालत के समक्ष खेद व्यक्त किया है और भरोसा दिया है कि आपत्तिजनक अंश हटाकर नई पुस्तक तैयार की जाएगी। परिषद ने कहा कि वह न्यायपालिका की गरिमा का पूरा सम्मान करती है और छात्रों को सही और संतुलित जानकारी देना उसका उद्देश्य है। एनसीईआरटी ने अध्याय से जुड़े विषय विशेषज्ञों और इसे मंजूरी देने वाले अफसर की सिफारिश की समीक्षा करने के लिए आंतरिक बैठक बुलाई है l
शिक्षा और संवैधानिक मूल्यों के बीच संतुलन पर बहस तेज
इस मामले के बाद शिक्षा व्यवस्था में संस्थाओं की आलोचना और जागरूकता के संतुलन को लेकर बहस तेज हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि छात्रों को व्यवस्था की चुनौतियों से अवगत कराना जरूरी है, लेकिन इसे जिम्मेदारी और तथ्यों के साथ प्रस्तुत करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
फिलहाल अदालत ने इस पुस्तक की बिक्री पर रोक जारी रखी है और अगली सुनवाई में आगे के कदम तय किए जाएंगे। माना जा रहा है कि इस फैसले का असर भविष्य की पाठ्यपुस्तकों और उनकी समीक्षा प्रक्रिया पर भी पड़ सकता है।