सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद बदली भोजशाला की तस्वीर, बसंत पंचमी पर साथ-साथ हुई पूजा और नमाज़:
संवाददाता
24 January 2026
अपडेटेड: 4:02 PM 0thGMT+0530
बसंत पंचमी के पावन अवसर पर धार स्थित ऐतिहासिक भोजशाला परिसर में इस बार स्थिति पूरी तरह बदली हुई नजर आई। सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट और प्रभावी आदेश के बाद वर्षों से विवादों में रही भोजशाला में पहली बार ऐसा हुआ, जब हिंदू समाज द्वारा सूर्योदय से सूर्यास्त तक निर्बाध रूप से पूजा का क्रम चला, वहीं मुस्लिम पक्ष को नमाज़ के लिए परिसर में अलग और पूर्व-निर्धारित स्थान उपलब्ध कराया गया।
सुबह सूर्योदय के साथ ही भोजशाला में मां सरस्वती की विधिवत पूजा, यज्ञ और मंत्रोच्चार शुरू हुआ, जो पूरे दिन शांतिपूर्ण तरीके से सूर्यास्त तक जारी रहा। श्रद्धालुओं ने इसे ऐतिहासिक क्षण बताते हुए कहा कि यह व्यवस्था लंबे समय से अपेक्षित थी।
प्रशासन द्वारा सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार मुस्लिम समुदाय को नमाज़ अदा करने के लिए भोजशाला परिसर में ही एक अलग और स्पष्ट रूप से निर्धारित स्थान दिया गया था। तय समय पर मुस्लिम पक्ष ने वहां अनुशासन और शांति के साथ नमाज़ अदा की। दोनों समुदायों के धार्मिक कार्यक्रम बिना किसी व्यवधान के अपने-अपने स्थानों पर संपन्न हुए।
संवेदनशीलता को देखते हुए जिला प्रशासन और पुलिस विभाग पूरी तरह अलर्ट मोड में रहा। भोजशाला और आसपास के क्षेत्रों में हजारों की संख्या में सुरक्षा कर्मी, महिला पुलिस बल, वरिष्ठ अधिकारी और सीसीटीवी कैमरे तैनात किए गए थे। पूरे आयोजन के दौरान प्रशासन की ओर से लगातार निगरानी की जाती रही।
अधिकारियों के अनुसार, किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना सामने नहीं आई, और कानून-व्यवस्था पूरी तरह नियंत्रण में रही।
बसंत पंचमी के अवसर पर भोजशाला में पूजा और नमाज़ का यह शांतिपूर्ण आयोजन सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के पालन और प्रशासनिक सख्ती के साथ-साथ सामाजिक संयम का भी उदाहरण बना। स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने इसे धार के इतिहास में एक सकारात्मक और महत्वपूर्ण कदम बताया।